Hydropower In Himachal: 24 हजार मेगावाट क्षमता के बावजूद आधी बिजली ही बना पा रहा हिमाचल, 530 परियोजनाएं अटकीं
हिमाचल प्रदेश में करीब 24 हजार मेगावाट जलविद्युत उत्पादन की क्षमता है, लेकिन अब तक केवल 12,588 मेगावाट क्षमता का ही दोहन हो पाया है। ऊर्जा विभाग के अनुसार 530 परियोजनाएं अब भी मंजूरी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अटकी हैं। चिनाब और सतलुज बेसिन में सबसे अधिक संभावनाएं हैं, जबकि सरकार पर्यावरणीय संतुलन के साथ लंबित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देश की पावर स्टेट कहलाने की महत्वाकांक्षा रखने वाला हिमाचल प्रदेश आज भी अपनी जल विद्युत क्षमता का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहा है। प्रदेश में जल विद्युत उत्पादन की कुल संभावित क्षमता 23,947.25 मेगावाट आंकी गई है, लेकिन इसमें से केवल 12,588.63 मेगावाट क्षमता ही उत्पादन में लाई जा सकी है।
प्रदेश अपनी कुल संभावित क्षमता का करीब 52.6 प्रतिशत ही दोहन कर पाया है। ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में 189 जल विद्युत परियोजनाएं चालू हैं, जबकि 54 परियोजनाएं निर्माणाधीन या विभिन्न स्तरों पर अटकी हुई हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि 530 परियोजनाएं और 7,623.61 मेगावाट बिजली क्षमता अभी भी क्लीयरेंस, आवंटन अथवा अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझी हुई है। जल विद्युत विकास में निजी क्षेत्र की भूमिका सबसे अधिक रही है।
निजी क्षेत्र में 40 परियोजनाओं के माध्यम से 2,890.51 मेगावाट क्षमता विकसित की जा चुकी है, जबकि 10 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। वहीं 5 मेगावाट तक की छोटी परियोजनाओं में 110 परियोजनाएं चालू हैं, लेकिन इनकी कुल क्षमता केवल 367.77 मेगावाट है। केंद्रीय और संयुक्त उपक्रमों ने 13 परियोजनाओं के जरिए 8,311.73 मेगावाट क्षमता विकसित की है, जो राज्य की कुल स्थापित क्षमता का बड़ा हिस्सा है।
सतलुज, ब्यास, रावी, चिनाब और यमुना बेसिन में विशाल जलविद्युत क्षमता मौजूद है। इनमें सबसे अधिक संभावना चिनाब और सतलुज बेसिन में मानी जाती है। किन्नौर, लाहौल-स्पीति, चंबा, कुल्लू और मंडी जिले जलविद्युत विकास के प्रमुख केंद्र हैं। नाथपा-झाकड़ी, कोल डैम, पार्वती, कडछम-वांगतू और ब्यास परियोजनाओं ने हिमाचल को ऊर्जा मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाई है, लेकिन कई बड़ी परियोजनाएं विभिन्न चरणों में अटकी हुई हैं।
पर्यावरणीय और सामाजिक कारणों से सरकार ने कुछ परियोजनाओं को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला भी लिया है। 11 परियोजनाओं की 815.40 मेगावाट क्षमता को छोड़ दिया गया है।
हिमाचल के पास लगभग 24 हजार मेगावाट जलविद्युत क्षमता है, जो प्रदेश के आर्थिक भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है। हमारा प्रयास है कि पर्यावरणीय संवेदनशीलता और स्थानीय हितों का संरक्षण करते हुए लंबित परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाए। - राकेश कुमार प्रजापति, निदेशक ऊर्जा, हिमाचल प्रदेश सरकार