Himachal News: केंद्रीय मंत्री बोले- आरडीजी अस्थायी व्यवस्था थी, वित्तीय अनुशासन से ही राज्यों की स्थिरता संभव
शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि सरकार ने बजट में सात प्रमुख आधार स्तंभ तय किए हैं- मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती, विरासत संरक्षण, एमएसएमई सशक्तिकरण, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, शहरी विकास, सतत विकास और आर्थिक स्थिरता।
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केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि आरडीजी की व्यवस्था मूल रूप से अस्थायी राहत के रूप में शुरू की गई थी, जिससे गंभीर वित्तीय घाटे से जूझ रहे राज्यों को सीमित समय के लिए सहारा मिल सके। 12वें वित्त आयोग से शुरू यह प्रावधान बार-बार चेतावनियों के साथ आगे बढ़ाया गया, लेकिन इसे स्थायी व्यवस्था कभी नहीं माना गया। 15वें वित्त आयोग के दौरान कोविड जैसी असाधारण परिस्थिति में राज्यों को फ्रंट-लोडेड और रिकॉर्ड स्तर की सहायता दी गई। हिमाचल प्रदेश को भी इस अवधि में पहले की सभी अवधियों की तुलना में कहीं अधिक आरडीजी सहायता मिली।
रविवार को राजधानी शिमला में प्रेस वार्ता करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब वित्त आयोग ने स्पष्ट किया है कि निरंतर अनुदान के बजाय राज्यों को राजस्व बढ़ाने और व्यय अनुशासन अपनाने की दिशा में बढ़ना होगा। वित्तीय घाटा आय और व्यय के अंतर का विषय है और इसे केवल राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि संरचनात्मक सुधारों से ठीक किया जा सकता है। उन्होंने चिंता जताई कि हिमाचल का कर्ज-जीडीपी अनुपात 40 फीसदी से ऊपर पहुंचना सावधानी का संकेत है और राज्य को दीर्घकालिक वित्तीय अनुशासन की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने वित्त आयोग के नए फॉर्मूले के तहत कर हिस्सेदारी में संरचनात्मक वृद्धि की है, जिससे हिमाचल जैसे राज्यों को अधिक हिस्सा मिल रहा है और इससे आरडीजी घटने के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया जा सकता है, बशर्ते राज्य वित्तीय प्रबंधन मजबूत करें। प्राकृतिक आपदाओं के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने एसडीआरएफ और एनडीआरएफ फंड में पिछले वर्षों में कई गुना वृद्धि की है और राज्यों को न केवल राहत बल्कि प्रिवेंटिव उपायों पर भी खर्च की अनुमति दी गई है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि जलवायु परिवर्तन के दौर में आपदा-पूर्व तैयारी पर अधिक निवेश किया जाए।
हिमाचल के संदर्भ में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पर्यटन और सांस्कृतिक विकास के लिए लगातार सहयोग दिया है। हाल ही में विशेष पूंजीगत सहायता योजना के तहत हिमाचल को पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए 50 वर्ष अवधि का ब्याज-मुक्त दीर्घकालिक ऋण स्वीकृत किया गया है, जो व्यावहारिक रूप से अनुदान जैसा है। स्वदेश दर्शन, प्रसाद, चैलेंज बेस्ड डेस्टिनेशन और अन्य योजनाओं के तहत भी प्रदेश को निरंतर सहायता मिली है और आगे भी परियोजना प्रस्ताव मिलने पर सहयोग जारी रहेगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सेब के मुद्दे पर कांग्रेस अनावश्यक राजनीति कर रही है। बाहर से आने वाला सेब 100 से कम लैंडिंग कीमत पर भारत नहीं आ सकता। लगभग 80 रुपये न्यूनतम बेस प्राइस और उस पर 20 से 40 रुपये तक टैक्स जुड़ने के बाद ही आयात संभव है। ऐसे में स्थानीय बागवानों के हित सुरक्षित हैं।