सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Not breastfeeding and late marriage increase the risk of breast cancer

Health: स्तनपान न करवाना और देरी से शादी से स्तन कैंसर का खतरा, ऐसे हो सकता है बचाव

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: शिमला ब्यूरो Updated Sun, 08 Feb 2026 10:56 AM IST
विज्ञापन
Not breastfeeding and late marriage increase the risk of breast cancer
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विज्ञापन
हिमाचल प्रदेश में हर साल सामने आने वाले दस हजार से अधिक कैंसर के मामलों में स्तन कैंसर के मरीजों की संख्या ज्यादा है। आंकड़ों के अनुसार हर साल सात सौ से आठ सौ के करीब स्तन (ब्रेस्ट) कैंसर के मामले आ रहे हैं।
Trending Videos


अनुसंधान के मुताबिक स्तनपान न करवाना, देरी से शादी करना और शादी के बाद मां न बन पाने वाली महिलाओं में स्तन कैंसर रोग की संभावनाएं अधिक रहती हैं। अकेले आईजीएमसी के रेडियोथैरेपी विभाग में ही सालाना स्तन कैंसर के 175 से 200 नए मरीज आते हैं। सुकून वाली बात यह है कि इनमें तीसरी स्टेज तक आने वाली 80 फीसदी महिलाएं अब रोग मुक्त जीवन जी रही हैं। रेडियोथैरेपी विभागाध्यक्ष एवं क्षेत्रीय कैंसर सेंटर के मुखिया डॉ. मनीश गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में आने वाले स्तन कैंसर के मामलों में वृद्धि हो रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


महिलाओं में इस रोग को लेकर बढ़ी जागरूकता और जिला क्षेत्रीय अस्पतालों तथा मेडिकल कॉलेजों में होने वाली जांच से यह संभव हो रहा है।   स्तन कैंसर की तीसरी स्टेज तक अस्पतालों में पहुंचने वाली महिलाओं में से 80 फीसदी महिलाएं रोग मुक्त हो जाती हैं, उनका सफलतापूर्वक उपचार संभव हो पा रहा है।

चौथी स्टेज में भी स्तन कैंसर बोन तक हो जाने पर उपचार संभव है, इसके बाद शरीर के अन्य अंगों तक फैल जाने की स्थिति में उपचार की प्रक्रिया जटिल हो जाती है। उन्होंने कहा कि सर्जरी और कीमो, रेडिएशन थैरेपी से ही मरीजों का उपचार किया जाता है। डाॅ. मनीश ने बताया कि समय से रोग का पता लगने और उपचार शुरू होने से स्तन कैंसर के रोगियों का उपचार संभव है। इसलिए जागरूकता आवश्यक है। वेस्टर्न कंट्री में स्तन कैंसर होने की उम्र 45 से 65 वर्ष तक रहती है, जबकि भारत में 35 से 55 साल की आयु वाली महिलाओं को भी कैंसर हो रहा है। 

कैंसर के लक्षण
स्तन या बगल में गांठ, स्तन की त्वचा में जलन, गड्ढे पड़ना, लालिमा, परतदार त्वचा होना, स्तन की आकृति या आकार में बदलाव होना स्तन कैंसर के मुख्य लक्षण हैं। इसके अलावा स्तन के किसी भी हिस्से में दर्द होना, छाती में दर्द, गांठ या त्वचा का मोटा होना, स्तन के अगले भाग में खून के धब्बे या साफ तरल पदार्थ का रिसाव, स्तन सूजना और उसमें दर्द होने हो पर इसकी जांच करवाना जरूरी होता है, यह कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।

ऐसे हो सकता है बचाव 
स्तन कैंसर से बचने के लिए महिलाओं को बच्चों को लंबे समय तक स्तनपान करवाना चाहिए। बढ़ते वजन पर नियंत्रण रखना, फास्ट फूड न खाना, फिजिकल एक्टिविटी में बराबर हिस्सा लेना, शराब और तंबाकू का सेवन न करने से इस रोग से बचा जा सकता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed