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Shimla News: ग्रामीण जाठिया देवी माउंटेन टाउनशिप के लिए जमीन देने को तैयार नहीं
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एसआईए रिपोर्ट में 100 फीसदी प्रभावितों ने जताई आपत्ति
249.49 हेक्टेयर निजी भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव, 17 से 25 सितंबर तक चला घर-घर सर्वे, 29 दिसंबर को हुई जनसुनवाई
292 परिवार होंगे प्रभावित,
रिपोर्ट में मंदिर, स्कूल, दुकानें और अन्य सामुदायिक परिसंपत्तियों पर भी असर की आशंका
रोजगार और बेहतर सुविधाओं की संभावना, पारदर्शी अधिग्रहण, उचित मुआवजा और पुनर्वास पर जोर
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जाठिया देवी में प्रस्तावित माउंटेन टाउनशिप परियोजना के लिए तैयार सामाजिक प्रभाव आकलन (एसआईए) रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार प्रभावित क्षेत्र के करीब 100 फीसदी भू-स्वामियों ने प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण का विरोध किया है। सर्वेक्षण के दौरान किसी भी प्रभावित व्यक्ति ने अपनी जमीन देने पर सहमति नहीं दी। लोगों ने मांग की कि कृषि योग्य और आवासीय भूमि को परियोजना के दायरे से बाहर रखा जाए।
हिमाचल प्रदेश आवास विभाग जाठिया देवी में माउंटेन टाउनशिप विकसित करने के लिए शिमला ग्रामीण के आठ और सोलन जिले के एक गांव की 249.49 हेक्टेयर (2959.12 बीघा) निजी भूमि का अधिग्रहण करना चाहता है। परियोजना से 292 परिवार प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होंगे। इनमें से 158 परिवारों का विस्तृत सामाजिक सर्वेक्षण किया गया।
एसआईए रिपोर्ट के अनुसार सामाजिक प्रभाव आकलन का काम हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (एमएसएचआईपीए) की सामाजिक प्रभाव आकलन इकाई ने सिबार्ट एंड अग्रिमा संस्थान, नई दिल्ली को सौंपा था। अध्ययन के लिए सामाजिक वैज्ञानिकों, क्षेत्रीय सर्वेक्षकों और विषय विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम गठित की गई। टीम ने सरकारी अभिलेखों, जनगणना आंकड़ों, घर-घर सर्वेक्षण, हितधारकों से बातचीत, फोकस ग्रुप चर्चा और क्षेत्रीय निरीक्षण के आधार पर रिपोर्ट तैयार की।
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रिपोर्ट के मुताबिक अधिसूचित क्षेत्र में 17 से 25 सितंबर 2025 तक लगातार नौ दिनों तक घर-घर सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान प्रभावित परिवारों से सामाजिक, आर्थिक और आजीविका से जुड़े पहलुओं पर जानकारी जुटाई गई। इसके बाद 29 दिसंबर 2025 को शिमला ग्रामीण की बागी पंचायत भवन और सोलन जिले के ममलीग स्थित हिमुडा कार्यालय में जनसुनवाई हुई। दोनों स्थानों पर संबंधित एसडीएम की अध्यक्षता में सुनवाई हुई। इसमें प्रभावित लोगों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। जनसुनवाई से पहले स्थानीय समाचार पत्रों और सार्वजनिक स्थानों पर सूचना भी प्रकाशित की गई थी।
रिपोर्ट में कहा है कि प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण की जद में कई सार्वजनिक और सामुदायिक परिसंपत्तियां भी आएंगी। इनमें विभिन्न गांवों के मंदिर, स्कूल, 18 दुकानें, सूक्ष्म सिंचाई नहरें, पंचायत भवन, डाकघर, बैंक, आंगनबाड़ी, खेल मैदान, श्मशानघाट, आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र, ट्रांसफार्मर, पेयजल संरचनाएं और अन्य सामुदायिक सुविधाएं शामिल हैं। रिपोर्ट में माना है कि इससे विस्थापन और स्थानीय संसाधनों पर असर पड़ सकता है।
सामाजिक प्रभाव आकलन में ये भी सामने आया कि प्रभावित लोगों की सबसे बड़ी चिंता आजीविका, भूमि स्वामित्व और विस्थापन को लेकर है। अधिकांश प्रभावित किसान और पेंशनभोगी हैं। उनकी आय और जीवनयापन का प्रमुख आधार भूमि है। इसलिए लोगों ने उचित मुआवजे के साथ-साथ कृषि और आवासीय भूमि को अधिग्रहण से बाहर रखने की मांग की है।
रिपोर्ट में ये भी कहा है कि परियोजना से शिमला शहर पर बढ़ते दबाव को कम करने, नियोजित आवास, रोजगार के अवसर, बेहतर सड़क संपर्क और आधारभूत सुविधाओं के विकास में मदद मिल सकती है। लेकिन इसके लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो, प्रभावितों को समय पर उचित मुआवजा और पुनर्वास मिले तथा स्थानीय लोगों के साथ लगातार संवाद बनाए रखा जाए।
जाठिया देवी में टाउनशिप के लिए हिमुडा किसी भी ग्रामीण की जबरन जमीन नहीं लेगा। जो व्यक्ति स्वेच्छा से जमीन बेचना चाहेगा उसकी ही जमीन ली जाएगी।
-यशवंत छाजटा, उपाध्यक्ष, हिमुडा
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249.49 हेक्टेयर निजी भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव, 17 से 25 सितंबर तक चला घर-घर सर्वे, 29 दिसंबर को हुई जनसुनवाई
292 परिवार होंगे प्रभावित,
रिपोर्ट में मंदिर, स्कूल, दुकानें और अन्य सामुदायिक परिसंपत्तियों पर भी असर की आशंका
रोजगार और बेहतर सुविधाओं की संभावना, पारदर्शी अधिग्रहण, उचित मुआवजा और पुनर्वास पर जोर
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जाठिया देवी में प्रस्तावित माउंटेन टाउनशिप परियोजना के लिए तैयार सामाजिक प्रभाव आकलन (एसआईए) रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार प्रभावित क्षेत्र के करीब 100 फीसदी भू-स्वामियों ने प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण का विरोध किया है। सर्वेक्षण के दौरान किसी भी प्रभावित व्यक्ति ने अपनी जमीन देने पर सहमति नहीं दी। लोगों ने मांग की कि कृषि योग्य और आवासीय भूमि को परियोजना के दायरे से बाहर रखा जाए।
हिमाचल प्रदेश आवास विभाग जाठिया देवी में माउंटेन टाउनशिप विकसित करने के लिए शिमला ग्रामीण के आठ और सोलन जिले के एक गांव की 249.49 हेक्टेयर (2959.12 बीघा) निजी भूमि का अधिग्रहण करना चाहता है। परियोजना से 292 परिवार प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होंगे। इनमें से 158 परिवारों का विस्तृत सामाजिक सर्वेक्षण किया गया।
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एसआईए रिपोर्ट के अनुसार सामाजिक प्रभाव आकलन का काम हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (एमएसएचआईपीए) की सामाजिक प्रभाव आकलन इकाई ने सिबार्ट एंड अग्रिमा संस्थान, नई दिल्ली को सौंपा था। अध्ययन के लिए सामाजिक वैज्ञानिकों, क्षेत्रीय सर्वेक्षकों और विषय विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम गठित की गई। टीम ने सरकारी अभिलेखों, जनगणना आंकड़ों, घर-घर सर्वेक्षण, हितधारकों से बातचीत, फोकस ग्रुप चर्चा और क्षेत्रीय निरीक्षण के आधार पर रिपोर्ट तैयार की।
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रिपोर्ट के मुताबिक अधिसूचित क्षेत्र में 17 से 25 सितंबर 2025 तक लगातार नौ दिनों तक घर-घर सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान प्रभावित परिवारों से सामाजिक, आर्थिक और आजीविका से जुड़े पहलुओं पर जानकारी जुटाई गई। इसके बाद 29 दिसंबर 2025 को शिमला ग्रामीण की बागी पंचायत भवन और सोलन जिले के ममलीग स्थित हिमुडा कार्यालय में जनसुनवाई हुई। दोनों स्थानों पर संबंधित एसडीएम की अध्यक्षता में सुनवाई हुई। इसमें प्रभावित लोगों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। जनसुनवाई से पहले स्थानीय समाचार पत्रों और सार्वजनिक स्थानों पर सूचना भी प्रकाशित की गई थी।
रिपोर्ट में कहा है कि प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण की जद में कई सार्वजनिक और सामुदायिक परिसंपत्तियां भी आएंगी। इनमें विभिन्न गांवों के मंदिर, स्कूल, 18 दुकानें, सूक्ष्म सिंचाई नहरें, पंचायत भवन, डाकघर, बैंक, आंगनबाड़ी, खेल मैदान, श्मशानघाट, आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र, ट्रांसफार्मर, पेयजल संरचनाएं और अन्य सामुदायिक सुविधाएं शामिल हैं। रिपोर्ट में माना है कि इससे विस्थापन और स्थानीय संसाधनों पर असर पड़ सकता है।
सामाजिक प्रभाव आकलन में ये भी सामने आया कि प्रभावित लोगों की सबसे बड़ी चिंता आजीविका, भूमि स्वामित्व और विस्थापन को लेकर है। अधिकांश प्रभावित किसान और पेंशनभोगी हैं। उनकी आय और जीवनयापन का प्रमुख आधार भूमि है। इसलिए लोगों ने उचित मुआवजे के साथ-साथ कृषि और आवासीय भूमि को अधिग्रहण से बाहर रखने की मांग की है।
रिपोर्ट में ये भी कहा है कि परियोजना से शिमला शहर पर बढ़ते दबाव को कम करने, नियोजित आवास, रोजगार के अवसर, बेहतर सड़क संपर्क और आधारभूत सुविधाओं के विकास में मदद मिल सकती है। लेकिन इसके लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो, प्रभावितों को समय पर उचित मुआवजा और पुनर्वास मिले तथा स्थानीय लोगों के साथ लगातार संवाद बनाए रखा जाए।
जाठिया देवी में टाउनशिप के लिए हिमुडा किसी भी ग्रामीण की जबरन जमीन नहीं लेगा। जो व्यक्ति स्वेच्छा से जमीन बेचना चाहेगा उसकी ही जमीन ली जाएगी।
-यशवंत छाजटा, उपाध्यक्ष, हिमुडा