HP News: हिमाचल में साइबर ठगों का जाल; तीन माह में 5400 से ज्यादा शिकायतें; साइबर हेल्पलाइन 1930 पर बढ़ा दबाव
हिमाचल प्रदेश में साइबर अपराध के मामले लागातार बढ़ते जा रहे हैं। इस साल के शुरुआती तीन महीनों में ही प्रदेशभर में 5,400 से अधिक शिकायतें दर्ज होना साइबर अपराधों के तेजी से बढ़ते खतरे को दर्शाता है। पढ़ें पूरी खबर...
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हिमाचल प्रदेश में डिजिटल सेवाओं और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों का दायरा भी तेजी से बढ़ रहा है। क्रिमिनल इंटेलिजेंस गैजेट (सीआईजी) और साइबर क्राइम विभाग के आंकड़ों ने प्रदेश में सक्रिय ऑनलाइन ठगी नेटवर्क की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। पुलिस के साइबर क्राइम सेल और राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर अब प्रतिदिन औसतन 200 से 250 शिकायतें दर्ज हो रही हैं, जबकि पहले यह संख्या 80 से 100 कॉल प्रतिदिन तक सीमित थी।
इस साल के शुरुआती तीन महीनों में ही प्रदेशभर में 5,400 से अधिक शिकायतें दर्ज होना साइबर अपराधों के तेजी से बढ़ते खतरे को दर्शाता है। सबसे अधिक मामले यूपीआई और क्यूआर कोड आधारित ठगी के सामने आए हैं। साइबर अपराधी फर्जी लिंक, नकली भुगतान अनुरोध और गलत क्यूआर कोड स्कैन करवाकर लोगों के खातों से रकम निकाल रहे हैं। इसके अलावा वर्क फ्रॉम होम और पार्ट-टाइम जॉब स्कैम तेजी से बढ़े हैं। आंकड़ों के अनुसार लगभग 30 प्रतिशत शिकायतें ऐसे मामलों से जुड़ी हैं, जिनमें लोगों को यूट्यूब वीडियो लाइक करने, ऑनलाइन रिव्यू देने या छोटे निवेश पर मुनाफे का लालच देकर बाद में लाखों रुपये की ठगी की गई। निवेश और क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी भी बढ़ रही है। अपराधी नकली ट्रेडिंग ऐप और वेबसाइटों के जरिये शेयर बाजार, फॉरेक्स और क्रिप्टो निवेश पर भारी रिटर्न का झांसा देकर लोगों से रकम जमा करवा रहे हैं।
वहीं डिजिटल अरेस्ट स्कैम पुलिस के लिए नई चुनौती बनकर उभरा है। ठग खुद को सीबीआई, एनसीबी, कस्टम या पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं कि उनके नाम पर अवैध पार्सल, मनी लॉन्ड्रिंग या अन्य गंभीर मामला दर्ज है। इसके बाद वीडियो कॉल पर कथित पूछताछ के नाम पर पीड़ितों से पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं। गैजेट में अवैध लोन एप और कस्टडी स्कैम का भी उल्लेख किया गया है। इन मामलों में त्वरित लोन देने का झांसा देकर लोगों के मोबाइल का डाटा हासिल किया जाता है। बाद में रिश्तेदारों व परिचितों को अश्लील या आपत्तिजनक संदेश भेजने की धमकी देकर ब्लैकमेल किया जाता है। हालांकि बढ़ते मामलों के बीच राहत की बात यह है कि 1930 हेल्पलाइन और पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली कई मामलों में प्रभावी साबित हुई है।
गोल्डन आवर में शिकायत की तो फ्रीज करवा सकेंगे पैसा
बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने के लिए राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एससीआरबी) और सीआईडी ने कई रणनीतिक निर्देश जारी किए हैं। गैजट में कहा गया है कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे यानी गोल्डन आवर सबसे महत्वपूर्ण हैं। यदि पीड़ित तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या संबंधित पोर्टल पर शिकायत दर्ज करता है, तो बैंकों के माध्यम से रकम को फ्रीज या ब्लॉक करने की संभावना काफी बढ़ जाती है।