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Shimla News: फ्रासबीन के दामों में गिरावट से किसानों के चेहरे पर छायी मायूसी
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सोलन में 49 और ढली सब्जी मंडी में 40 से 60 रुपये किलो तक बिकी फ्रासबीन
संवाद न्यूज एजेंसी
जुन्गा (शिमला)। फ्रासबीन के दाम में गिरावट से जिले के किसानों के चेहरे पर मायूसी छा गई है। जुन्गा क्षेत्र से रोजाना फ्रासबीन की खेप ढली सब्जी मंडी और सोलन पहुंच रही है। कुछ दिन पहले तक फ्रासबीन के दाम 120 रुपये प्रति किलोग्राम थे।
फ्रासबीन की आवक बढ़ने से रविवार को सोलन में 49 रुपये, जबकि शिमला की ढली सब्जी मंडी में 40 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम दाम किसानों को मिले। अचानक दामों में भारी गिरावट आने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। इस बार अप्रैल और मई में अच्छी बारिश होने से फ्रासबीन की बंपर फसल हुई है। जुन्गा क्षेत्र के प्रगतिशील किसान दुर्गा सिंह ठाकुर, विजय शर्मा, चंचल वर्मा, जबर सिंह ठाकुर आदि ने बताया कि यदि रेट 50 रुपये तक भी स्थिर रहे तो किसानों को राहत मिलेगी। इससे ज्यादा गिरावट नुकसानदायक होगी। जुन्गा क्षेत्र में फ्रांसबीन, टमाटर, लहसुन, शिमला मिर्च आदि नकदी फसलों की भारी मात्रा में पैदावार होती है। आढ़ती विनोद शर्मा के अनुसार प्रदेश के अन्य क्षेत्रों से फ्रासबीन की भारी मात्रा में खेप आने से दामों में कुछ गिरावट आई है। फ्रासबीन का रेट उसकी क्वालिटी पर निर्भर कर रहा है। इसके बावजूद भी किसानों को औसतन अच्छे दाम मिल रहे हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
जुन्गा (शिमला)। फ्रासबीन के दाम में गिरावट से जिले के किसानों के चेहरे पर मायूसी छा गई है। जुन्गा क्षेत्र से रोजाना फ्रासबीन की खेप ढली सब्जी मंडी और सोलन पहुंच रही है। कुछ दिन पहले तक फ्रासबीन के दाम 120 रुपये प्रति किलोग्राम थे।
फ्रासबीन की आवक बढ़ने से रविवार को सोलन में 49 रुपये, जबकि शिमला की ढली सब्जी मंडी में 40 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम दाम किसानों को मिले। अचानक दामों में भारी गिरावट आने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। इस बार अप्रैल और मई में अच्छी बारिश होने से फ्रासबीन की बंपर फसल हुई है। जुन्गा क्षेत्र के प्रगतिशील किसान दुर्गा सिंह ठाकुर, विजय शर्मा, चंचल वर्मा, जबर सिंह ठाकुर आदि ने बताया कि यदि रेट 50 रुपये तक भी स्थिर रहे तो किसानों को राहत मिलेगी। इससे ज्यादा गिरावट नुकसानदायक होगी। जुन्गा क्षेत्र में फ्रांसबीन, टमाटर, लहसुन, शिमला मिर्च आदि नकदी फसलों की भारी मात्रा में पैदावार होती है। आढ़ती विनोद शर्मा के अनुसार प्रदेश के अन्य क्षेत्रों से फ्रासबीन की भारी मात्रा में खेप आने से दामों में कुछ गिरावट आई है। फ्रासबीन का रेट उसकी क्वालिटी पर निर्भर कर रहा है। इसके बावजूद भी किसानों को औसतन अच्छे दाम मिल रहे हैं।
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