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Simhastha 2028: जमीन अधिग्रहण का विरोध, सड़कों पर उतरे किसान, दूध-सब्जी बंद करने की दी चेतावनी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Tue, 16 Sep 2025 04:19 PM IST
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सार

किसानों का कहना है कि सरकार सिंहस्थ के नाम पर स्थायी निर्माण करना चाहती है, जबकि अस्थायी व्यवस्थाएं भी पर्याप्त हैं। 

Simhastha 2028: Farmers protest against land acquisition in Ujjain
विरोध में प्रदर्शन करतीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सिंहस्थ के लिए लैंड पुलिंग योजना का विरोध करते हुए हजारों किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं। ये प्रदर्शन भारतीय किसान संघ के बैनर तले 16 सूत्रीय मांगों को लेकर हो रहा है। 

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भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने कहा कि लैंड पुलिंग योजना को लेकर हमारा विरोध है। सिंहस्थ के लिए किसानों से जमीन लेकर स्थायी निर्माण किया जा रहा है, जबकि इसके लिए अस्थायी व्यवस्थाएं की जा सकती हैं। किसानों की मांग है कि वे अपनी जमीन का 11 साल तक उपयोग करें और केवल सिंहस्थ के लिए एक साल के लिए जमीन उपलब्ध करा दें। किसान संघ के राष्ट्रीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने कहा कि सिंहस्थ के लिए सुविधाएं बनाई जाएं, लेकिन वे स्थाई ना हों। हम लैंड पुलिंग सहित 16 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। 
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इस आंदोलन को देखते हुए पुलिस ने प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की है। किसान उज्जैन की तरफ आ रहे हैं।  उधर, किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो गांवों से दूध, सब्जी की सप्लाई बंद कर दी जाएगी। 

यह है किसानों की मांगें

  • उज्जैन सिंहस्थ क्षेत्र से लैंड पुलिंग पूरी तरह समाप्त किया जाए।
  • गरोठ रोड पर दोनों तरह सर्विस रोड बनाए जाएं।
  • सेवरखेड़ी, सिलारखेड़ी के किसानों की गाइड लाइन बढ़ाई जाए।
  • सोयाबीन फसल का उचित मूल्य दिया जाए। पिछले तीन वर्षों से मंडियो में MSP से कम में खरीदी हो रही है। लागत के आधार पर MSP 5328 रुपए में 672 रुपये बोनस जोड़कर 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल पर सरकारी खरीदी हो।
  • नर्मदा पाइप लाइन से वंचित क्षेत्र में लाइन बिछाई जाए एवं इसी प्रकार अन्य नदियों से सूखाग्रस्त क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था बढ़ाई जाए।
  • मुख्यमंत्री ट्रांसफार्मर अनुदान योजना फिर शुरू की जाए।
  • राजस्व रिकार्ड सुधार पखवाड़े में पटवारी के गांव में बैठने के दिन तय किए जाएं। जमीन के कई नक्शों में बंदोबस्त के बाद परिवर्तन हो गया था, जिनका सुधार किया जाए।
  • आवारा पशु रोजड़ा, सुअर, बंदर, हिरण आदि से किसानों की खड़ी फसल बर्बाद होती है। इस संबंध में कई बार अवगत कराया गया, लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस पर सख्त योजना बनाई जाए।
  • आगामी फसल के लिए खाद की उपलब्धता बढ़ाई जाए।
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा में सैटेलाइट सर्वे की बजाय क्रॉस कटिंग के आधार पर ही बीमा क्लेम किया जाए। पीला मोजक से खराब हुए सोयाबीन का मुआवजा दिया जाए।
  • मध्य प्रदेश में लैंड पुलिंग कानून समाप्त किया जाए।
  • विकास के नाम पर करोड़ों रुपये के बाजार भाव की जमीनें 4-6 लाख रुपये बीघा में न छीनी जाएं। विक्रम नॉलेज सीटी योजना में चार गुना मुआवजा दिया जाए।
  • जावरा-उज्जैन रोड के कम ऊंचाई वाला नार्मल फोरलेन बनाया जाए। दोनों साइड सर्विस रोड दिए जाएं जैसे देवास-बड़नगर रोड बना है।
  • इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड की ऊंचाई कम रखी जाए एवं बड़ी-बड़ी रोटरी के नाम पर अनावश्यक जमीनें न छीनी जाएं।    
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