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वसंत पंचमी पर घर लाएं ये 6 चीजें ,मां सरस्वती की कृपा से पढ़ाई और करियर में बुलंद होगी उड़ान
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 21 Jan 2026 06:37 PM IST
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सार
वसंत पंचमी पर ज्ञान और विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा करने का विधान होता है। वसंत पंचमी पर मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए कई तरह के उपाय अपनाए जाते हैं।
वसंत पंचमी 2026 उपाय
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
वसंत पंचमी, सरस्वती पूजा के नाम से प्रसिद्ध, ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती की आराधना का प्रमुख पर्व है। यह माघ मास की शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन वसंत ऋतु का आगमन होता है, जो जीवन में नई ऊर्जा, समृद्धि और सकारात्मकता लाता है। वास्तु शास्त्र में भी इस दिन घर में विशेष चीजें लाना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह सकारात्मक ऊर्जा प्रवाह को मजबूत करता है। उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) को ज्ञान का केंद्र मानकर इन चीजों को सही जगह रखने से शिक्षा, करियर और सुख-शांति में वृद्धि होती है।
मां सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर
धार्मिक रूप से यह ज्ञान और बुद्धि की प्रतीक है। पुराणों में कहा गया है कि मां की पूजा से अज्ञान दूर होता है। वास्तु में सफेद मूर्ति या तस्वीर को उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करें। ऐसा करने से पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ती है, करियर बाधाएं दूर होती हैं, घर में शांति रहती है। वसंत पंचमी पर लाकर पूजा स्थल में रखें और घी का दीपक जलाएं।
मोर पंख
मोरपंख श्रीकृष्ण की प्रिय वस्तु होने से धार्मिक महत्व रखता है। यह नकारात्मक ऊर्जा भगाता है और धन आकर्षित करता है। वास्तु में मुख्य द्वार या पूर्व दिशा में लगाएं। ऐसा करने से आर्थिक स्थिति सुधरती है, परिवार में कलह कम होती है, बच्चों को सरस्वती का आशीर्वाद मिलता है।
इसके पत्ते मोर पंख जैसे होने से विद्या का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता में सरस्वती मां का आशीर्वाद वाला पौधा माना जाता है। वास्तु में पूर्व दिशा या मुख्य द्वार के पास लगाएं। इससे बच्चों की बुद्धि तेज होती है, शिक्षा में सफलता मिलती है, घर में हरियाली से सुख बढ़ता है।
यह देवी की ऊर्जा का शक्तिशाली स्रोत है। धार्मिक रूप से मंत्र जाप के साथ स्थापित करें। वास्तु में अध्ययन कक्ष या पूजा स्थल में पूर्व/उत्तर दिशा में रखें। एकाग्रता बढ़ती है, करियर में प्रगति होती है, नकारात्मकता से रक्षा मिलती है। 108 बार सरस्वती मंत्र जपें।
पीला रंग देवी का प्रिय है, जो समृद्धि का प्रतीक है। पुराणों के अनुसार पीले फलों का भोग लगाने से माँ को प्रसन्नता मिलती है। वास्तु के अनुसार इन्हें उत्तर-पूर्व कोण में रखें या पूजा में अर्पित करें। ऐसा करने से धन वृद्धि, सुख-शांति और स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
वीणा या वाद्य यंत्र
वीणा सरस्वती मां की प्रमुख वस्तु है, जो संगीत-कला की देवी का प्रतीक है। धार्मिक रूप से घर में रखने से सौभाग्य मिलता है। वास्तु में पूजा स्थल में रखें। ऐसा करने से कलात्मक प्रतिभा विकसित होती है, परिवार में सामंजस्य बढ़ता है।
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मां सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर
धार्मिक रूप से यह ज्ञान और बुद्धि की प्रतीक है। पुराणों में कहा गया है कि मां की पूजा से अज्ञान दूर होता है। वास्तु में सफेद मूर्ति या तस्वीर को उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करें। ऐसा करने से पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ती है, करियर बाधाएं दूर होती हैं, घर में शांति रहती है। वसंत पंचमी पर लाकर पूजा स्थल में रखें और घी का दीपक जलाएं।
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मोर पंख
मोरपंख श्रीकृष्ण की प्रिय वस्तु होने से धार्मिक महत्व रखता है। यह नकारात्मक ऊर्जा भगाता है और धन आकर्षित करता है। वास्तु में मुख्य द्वार या पूर्व दिशा में लगाएं। ऐसा करने से आर्थिक स्थिति सुधरती है, परिवार में कलह कम होती है, बच्चों को सरस्वती का आशीर्वाद मिलता है।
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मोरपंखी का पौधाइसके पत्ते मोर पंख जैसे होने से विद्या का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता में सरस्वती मां का आशीर्वाद वाला पौधा माना जाता है। वास्तु में पूर्व दिशा या मुख्य द्वार के पास लगाएं। इससे बच्चों की बुद्धि तेज होती है, शिक्षा में सफलता मिलती है, घर में हरियाली से सुख बढ़ता है।
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सरस्वती यंत्रयह देवी की ऊर्जा का शक्तिशाली स्रोत है। धार्मिक रूप से मंत्र जाप के साथ स्थापित करें। वास्तु में अध्ययन कक्ष या पूजा स्थल में पूर्व/उत्तर दिशा में रखें। एकाग्रता बढ़ती है, करियर में प्रगति होती है, नकारात्मकता से रक्षा मिलती है। 108 बार सरस्वती मंत्र जपें।
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पीले फल या हल्दी-चावलपीला रंग देवी का प्रिय है, जो समृद्धि का प्रतीक है। पुराणों के अनुसार पीले फलों का भोग लगाने से माँ को प्रसन्नता मिलती है। वास्तु के अनुसार इन्हें उत्तर-पूर्व कोण में रखें या पूजा में अर्पित करें। ऐसा करने से धन वृद्धि, सुख-शांति और स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
वीणा या वाद्य यंत्र
वीणा सरस्वती मां की प्रमुख वस्तु है, जो संगीत-कला की देवी का प्रतीक है। धार्मिक रूप से घर में रखने से सौभाग्य मिलता है। वास्तु में पूजा स्थल में रखें। ऐसा करने से कलात्मक प्रतिभा विकसित होती है, परिवार में सामंजस्य बढ़ता है।
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