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Saraswati Puja Mantra: वसंत पंचमी कल, देवी सरस्वती को प्रसन्न करने की पूजाविधि और मंत्र
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 22 Jan 2026 02:42 PM IST
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सार
Saraswati Puja Mantra: हिंदू धर्म में वसंत पंचमी के त्योहार पर सरस्वती पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन विशेष रूप से छात्र विद्या और धन की देवी मां सरस्वती की पूजा-आराधना होती है। इस दिन मुख्य पर विद्यारंभ और गृहप्रवेश करना बहुत ही शुभ होता है।
सरस्वती पूजा विधि और मंत्र
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Saraswati Puja Mantra: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा करने का विधान होता है। इस दिन वसंत पंचमी का पर्व बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वसंत पंचमी के दिन ही ज्ञान, विद्या, बुद्धि, कला और संस्कृति की देवी मां सरस्वती की प्राकट्य हुआ था। इस कारण से हर वर्ष माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन देवी सरस्वती की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। क्योंकि इस दिन मां सरस्वती की पूजा-आराधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। वसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। अबूझ मुहूर्त में बिना मुहूर्त के किसी भी तरह का शुभ कार्य किया जा सकता है।
इस वर्ष यह त्योहार 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। वसंत पंचमी पर सभी तरह शुभ कार्य करना बहुत ही अच्छा और फलदायी होता है। वसंत पंचमी पर देवी सरस्वती की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करने का खास महत्व होता है। वसंत पंचमी के दिन जहां देवी सरस्वती की पूजा होती है, वहीं इस दिन मुख्य पर विद्यारंभ और गृहप्रवेश करना बहुत ही शुभ होता है। आइए जानते हैं वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा कैसे करें और किस-किस मंत्रों का उच्चारण करना शुभ रहेगा।
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मां सरस्वती की पूजा-आराधना के लिए मंत्र
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः॥
ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः॥
या कुंदेंदु-तुषार-हार-धवला, या शुभ्रा - वस्त्रावृता,
या वीणा - वार - दण्ड - मंडित - करा, या श्वेत - पद्मासना।
या ब्रह्माच्युत - शङ्कर - प्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दित,
सा मां पातु सरस्वती भगवती नि: शेष - जाड्यापहा।।
शारदा शारदाभौम्वदना। वदनाम्बुजे।
सर्वदा सर्वदास्माकमं सन्निधिमं सन्निधिमं क्रिया तू॥
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सरस्वती पूजा विधि
- शास्त्रों में देवी सरस्वती को विद्या और ज्ञान की देवी माना जाता है।
- देवी सरस्वती की उत्पत्ति सत्वगुण से हुई है इस कारण से इनकी पूजा में अधिकांश सामग्री में सफेद चीजों का इस्तेमाल किया जाता है।
- देवी सरस्वती की पूजा में सफेद चन्दन , सफेद वस्त्र , सफेद फूल, दही-मक्खन, सफ़ेद तिल का लड्डू, अक्षत , घृत , नारियल और इसका जल , श्रीफल और बेल अर्पित करें।
- सफेद चीजों के अलावा देवी सरस्वती की आराधना में पीले रंग के फूल और दूसरी पूजा सामग्रियों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
- वसंत पंचमी के दिन सुबह जल्दी स्नान करने के बाद सफेद या पीले रंग के कपड़े पहनें।
- विधि विधान के साथ कलश की स्थापना करें और इसके साथ देवी सरस्वती की मूर्ति को स्थापित करें।
- चौकी पर श्वेत कपड़ा बिछाकर मां सरस्वती की मूर्ति या फोटो स्थापित करें और गंगाजल से स्नान कराएं।
- श्वेत फूल-माला के साथ माता को सिन्दूर और दूसरी श्रृंगार की वस्तुएं भी अर्पित करें।
- माता को भोग में सफेद और पीले रंग की मिठाई को अर्पित करें।
- इसके बाद देवी सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए मंत्रों का जाप और आरती करें।
Saraswati Puja 2026: वसंत पंचमी पर ही क्यों होती है सरस्वती पूजा? शास्त्रों में छिपा है गूढ़ रहस्य
मां सरस्वती की पूजा-आराधना के लिए मंत्र
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः॥
ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः॥
या कुंदेंदु-तुषार-हार-धवला, या शुभ्रा - वस्त्रावृता,
या वीणा - वार - दण्ड - मंडित - करा, या श्वेत - पद्मासना।
या ब्रह्माच्युत - शङ्कर - प्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दित,
सा मां पातु सरस्वती भगवती नि: शेष - जाड्यापहा।।
शारदा शारदाभौम्वदना। वदनाम्बुजे।
सर्वदा सर्वदास्माकमं सन्निधिमं सन्निधिमं क्रिया तू॥