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Bhaum Pradosh Vrat 2026 : भौम प्रदोष व्रत का क्या है महत्व, जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा-विधि

ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: Vinod Shukla Updated Tue, 28 Apr 2026 10:34 AM IST
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सार

भौम प्रदोष व्रत पर पूजा और आराधना का विशेष महत्व होता है। इस दिन विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के खास विधान होता है। 

Bhaum Pradosh Vrat 2026 Kab Hai Puja Vidhi Shubh Muhurat In Hindi
भौम प्रदोष व्रत - फोटो : amar ujala
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विस्तार

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। मंगलवार के दिन प्रदोष पड़ने के कारण इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। भौम प्रदोष व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा, व्रत और आराधना के लिए बहुत ही शुभ और फलदायी माना जाता है। इसके अलावा भौम प्रदोष पर भगवान हनुमान की पूजा का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों और ज्योतिष शास्त्र में भोम प्रदोष उन लोगों के लिए बहुत ही शुभ और लाभकारी माना जाता है जिनक लोगों की कुंडली में मंगलदोष होता है। ऐसे में मंगल ग्रह को शांत करने के लिए भौम प्रदोष का व्रत और पूजा रखना अच्छा माना जाता है। इस बार भौम प्रदोष व्रत 28 अप्रैल को है। इस दिन अभिजीत मुहुर्त और त्रिपुष्कर योग बन रहा है। आइए जानते है पूजा का शुभ मुहूर्त।
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भौम प्रदोष व्रत 2026 तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 28 अप्रैल 2026 को शाम 6 बजकर 51 मिनट से होगी और त्रयोदशी तिथि की समाप्त 29 अप्रैल 2026 को शाम 7 बजकर 51 मिनट पर होगी। प्रदोष व्रत के लिए पूजा प्रदोष काल में करना बहुत ही शुभ और लाभकारी होता है। पंचांग गणना के अनुसार प्रदोष काल 28 अप्रैल को मिल रहा है इस तरह भौम प्रदोष काल आज यानी 28 अप्रैल को रखा जा रहा है।
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भौम प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रदोष काल का मुहूर्त आज शाम 6 बजकर 54 मिनट से रात 9 बजकर 04 मिनट तक है। ऐसे में पूजा के लिए सबसे अच्छा समय शाम 7 बजे ले लेकर रात 08 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। 

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महत्व 
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। जब प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ता है तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। इसमें भगवान हनुमान की विशेष कृपा पाने का अवसर मिलता है। भौम प्रदोष व्रत रखने से जीवन में  चली आ रही बाधाएं और रोग दूर होते हैं। भौम प्रदोष व्रत करने और पूजा करने से शिव-पार्वती की पूजा करने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 

भौम प्रदोष व्रत पूजा-विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें और सूर्यदेव को जल अर्पित करें। फिर इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का संकल्प लें। पूरे दिन ऊं नमा शिवाय मंत्र का जाप करें फिर शाम को प्रदोष काल में पूजा स्थल पर भगवान शिव की प्रतिमा को स्थापित करें और पूजा सामग्रियों में जल, दुध,शहद, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, चंदन, अक्षत और पुष्य अर्पित करें। इसके बाद घी और धूप जलाकर शिवजी की आरती करें। इसके बाद शिव महीमा का कथा सुने। 

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