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Sheetla Ashtami 2026: शीतला अष्टमी आज, जानिए क्या है इसका महत्व और क्या करें और क्या नहीं

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Vinod Shukla Updated Wed, 11 Mar 2026 06:16 AM IST
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सार

Sheetla Ashtami 2026: चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी-अष्टमी तिथि पर शीतला माता की पूजा करने का विशेष विधान होता है। शीतला मां को शीतलता देनी वाली माता कहा जाता है, इसी कारण से इनको भोग में ठंडा खाना अर्पित किया जाता है। इस व्रत को कई जगहों पर बसोड़ा भी कहा जाता है। 

Sheetla Ashtami 2026 Puja Vidhi Significance Importance And What To Do Or Not
Sheetla Ashtami 2026 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

Sheetla Ashtami 2026: हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी का पर्व विशेष आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। होली के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला माता की पूजा का विधान बताया गया है। धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शीतला माता को रोगों की देवी माना जाता है, जो अपने भक्तों को विभिन्न रोगों और कष्टों से रक्षा प्रदान करती हैं। देवी शीतला मां पार्वती का ही स्वरूप हैं। मान्यता है कि इस दिन माता की विधि-विधान से पूजा करने और कुछ विशेष नियमों का पालन करने से घर में सुख, शांति और आरोग्य बना रहता है। कई स्थानों पर इस दिन माता को बासी या ठंडे भोजन का भोग लगाया जाता है, जिसे “बसौड़ा” कहा जाता है। 

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शीतला माता की पूजा का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शीतला माता अपने हाथों में झाड़ू, सूप और कलश धारण करती हैं और उनकी सवारी गधा मानी गई है। इन प्रतीकों का संबंध घर की अशुद्धियों, रोगों और कष्टों को दूर करने से जोड़ा जाता है। इसलिए इस दिन माता की पूजा करने से घर की नकारात्मकता दूर होती है और परिवार के सदस्यों को स्वास्थ्य तथा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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शीतला अष्टमी के दिन क्या करें

  • प्रातःकाल स्नान कर पूजा करें- इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ वस्त्र पहनकर शीतला माता की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए।
  • जल से माता का अभिषेक करें-पूजा के समय माता को हल्दी मिला हुआ शीतल जल अर्पित किया जाता है, जिससे घर में मंगल और शांति बनी रहती है। शुद्ध मिट्टी के कोरे पात्र में भरे हुए जल से अभिषेक करना शुभ माना जाता है। 
  • बासी भोजन का भोग लगाएं- एक दिन पहले बनाए गए ठंडे भोजन का भोग माता को लगाकर परिवार के साथ प्रसाद के रूप में ग्रहण करना शुभ माना जाता है।कहीं कहीं मिट्टी की सकोरियों में माता को प्रसाद चढ़ाया जाता है।  
  • घर के दरवाजों पर हल्दी के छाप लगाएं-कई स्थानों पर इस दिन घर के मुख्य द्वार पर हल्दी के छाप लगाने की परंपरा है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होने की मान्यता है। घर में सुख-समृद्धि आती है।

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शीतला माता के रोग निवारक मंत्र का जप करें

  • इस दिन माता के इस मंत्र का श्रद्धा से जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है, मान्यता है कि इस मंत्र का नियमित जप करने से रोगों से मुक्ति मिलती है।

“शीतले त्वं जगत् माता, शीतले त्वं जगत् पिता। शीतले त्वं जगद्धात्री, शीतलायै नमो नमः॥”

शीतला अष्टमी के दिन क्या न करें

  • घर में चूल्हा या गैस न जलाएं- इस दिन नया भोजन बनाना वर्जित माना जाता है, इसलिए एक दिन पहले तैयार भोजन ही ग्रहण किया जाता है।
  • गरम या ताजा भोजन न खाएं- धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन ठंडा या बासी भोजन ही खाना चाहिए।
  • घर में झगड़ा या कटु वचन न बोलें-इस दिन शांत और सकारात्मक वातावरण बनाए रखना शुभ माना जाता है।
  • अनावश्यक क्रोध से बचें-क्रोध और नकारात्मक भावनाओं से दूर रहना चाहिए, ताकि माता की कृपा बनी रहे।
  • पूजा के नियमों की अवहेलना न करें-शीतला माता की पूजा श्रद्धा और नियमों के साथ करनी चाहिए, लापरवाही से पूजा करने से बचना चाहिए। 
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