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Yogini Ekadashi 2026 : दुर्लभ संयोग में योगिनी एकादशी आज, जानिए पूजा विधि, धार्मिक महत्व और व्रत कथा

Fri, 10 Jul 2026 05:44 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Fri, 10 Jul 2026 05:44 AM IST
सार

योगिनी एकादशी का व्रत रखने से 88 हजार ब्राह्राणों को भोजन कराने का फल मिलता है। इस एकादशी पर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप, विष्णु सहस्रनाम या एकादशी व्रत कथा का पाठ करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

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Yogini Ekadashi 2026 Date Know Significance Ekadashi Kab Hai Vrat Katha in Hindi
योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आज 10 जुलाई, शुक्रवार को योगिनी एकादशी है। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इसमें भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष रूप से पूजा होती है। हिंदू धर्म के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के पापों और रोगों का नाश होता है। इस एकादशी पर व्रत रखने और भगवान विष्णु के मंत्रों क जाप करने से जीवन में सुख, समृद्धि, संपन्नता, वैभव, धन और आरोग्य की प्राप्ति होती है। योगिनी एकादशी का व्रत रखने से 88 हजार ब्राह्राणों को भोजन कराने का फल मिलता है। आइए विस्तार से जानते है योगिनी एकादशी का महत्व और कथा। 

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योगिनी एकादशी पूजा विधि
योगिनी एकादशी व्रत रखने और पूजा करने से पहले इसकी शुरुआत दशमी तिथि से हो जाती है। एकादशी से एक दिन पहले यानी दशमी तिथि पर सात्विक भोजन करें। दशमी तिथि की रात से ही नमक का त्याग करके व्रत के नियमों का पालन करना शुरू करना चाहिए। एकादशी के दिन व्रती को बिना नमक का भोजन या फलाहर ग्रहण करना चाहिए।  एकादशी पर सुबह सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सूर्यदेव को जल अर्पित करते हुए व्रत का संकल्प लें फिर इसके बाद पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें और भगवान विष्णु की फोटो को रखते हुए विधिवत पूजन आरंभ करें। भगवान विष्णु की पूजा में पीला फल, पीली मिठाई, पीले फूल, धूप, तुलसी दल जरूर अर्पित करें। पूजा के दौरान और दिनभर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप, विष्णु सहस्रनाम या एकादशी व्रत कथा का पाठ करें। फिर एकादशी के अगले दिन द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक पूजा के बाद दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करें।
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योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी को बहुत ही शुभ, लाभकारी और पुण्यदायी एकादशियों में गिना गया है। मान्यता है कि आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की इस एकादशी का व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत करने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। 
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योगिनी एकादशी व्रत कथा
एकादशी पर व्रत करने के साथ-साथ व्रत कथा का पाठ करना भी काफी शुभ होता है।  पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में अलकापुरी में धन के देवता कुबेर के यहां हेम नाम का एक माली रहता था। वह रोज अपने कार्य के दौरान मानसरोवर से पुष्प लाकर भगवान शिव की पूजा के लिए जमा करता था। एक दिन हेम माली पत्नी संग इतना व्यस्त हो गया कि समय पर फूल लेकर राजदरबार नहीं पहुंच सका। जब समय पर हेम माली अलकापुरी के दरबार में नहीं पहुंच सका तो कुबेर देव बहुत ही क्रोधित हो गए और उसको कोढ़ से ग्रस्त होने का श्राप दे दिया। श्राप के प्रभाव से वह लंबे से परेशान रहने लगा। एक दिन लंबे समय तक भटकने के बाद वह महर्षि मार्कण्डेय के आश्रम पहुंचा। ऋषि ने अपने तपोबल से उसका कष्ट जान गए और उसे योगिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। तब हेम माली ने पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत किया। भगवान विष्णु की कृपा से उसका कोढ़ समाप्त हो गया, श्राप से मुक्ति मिली और उसे सुखद जीवन तथा मोक्ष की प्राप्ति हुई। तभी से योगिनी एकादशी के व्रत को पापों और कष्टों का नाश करने वाला अत्यंत प्रभावशाली व्रत माना जाता है।

योगिनी एकादशी शुभ योग 
इस वर्ष योगिनी एकादशी पर दुर्लभ योग बन रहा है। 10 जुलाई को आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की इस एकादशी पर सुकर्मा, धृति और त्रिपुष्कर जैसे शुभ और मंगलकारी योग बन रहे हैं। शास्त्रों के अनुसार इन योगों में भगवान विष्णु की पूजा करना बहुत ही शुभ और मंगलकारी माना जाता है। 


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।


 

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