सनातन परंपरा में प्रत्यक्ष देवता सूर्य, प्रथम पूज्य भगवान गणेश, देवी दुर्गा, देवाधिदेव भगवान शिव और भगवान विष्णु, पंचदेव कहलाते हैं। सनातन परंपरा में आस्था रखने वाले व्यक्ति को इन सभी की पूजा अनिवार्य रूप से करनी चाहिए। मान्यता है कि प्रतिदिन पूजा के दौरान पंचदेव का ध्यान एवं मंत्र जप करने वाले पर इन सभी की कृपा बरसती है और उसके घर में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है। यदि आप समय के अभाव में इन पंचदेवों की पूजा विधि-विधान से नहीं कर पाते हैं तो आप इनके मंत्रों के जरिए इन्हें प्रसन्न कर कृपा पा सकते हैं।
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Panch Dev Puja : सिर्फ पांच मिनट में करें पंचदेवों की पूजा और पाएं सुख-समृद्धि का अशीर्वाद
Sun, 21 Apr 2019 10:19 AM IST
Madhukar Mishra
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Madhukar Mishra
Updated Sun, 21 Apr 2019 10:19 AM IST
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Panch Dev Puja
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पंचदेवता पंचभूतों के स्वामी है। इनमें गणपति जलतत्व के अधिपति हैं, इसलिए उनकी सबसे पहले पूजा करने का विधान हैं।
श्री गणेश जी का ध्यान मंत्र
प्रात: स्मरामि गणनाथमनाथबन्धुं सिन्दूरपूरपरिशोभितगण्डयुग्मम्।
उद्दण्डविघ्नपरिखण्डनचण्डदण्ड - माखण्डलादिसुरनायकवृन्दवन्द्यम्।।
07 मई 2019, मंगलवार को अक्षय तृतीया पर अपार धन-संपदा की प्राप्ति हेतु करवाए जा रहे सामूहिक श्री लक्ष्मी कुबेर यज्ञ से जुड़ें
श्री गणेश जी का ध्यान मंत्र
प्रात: स्मरामि गणनाथमनाथबन्धुं सिन्दूरपूरपरिशोभितगण्डयुग्मम्।
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lord vishnu
भगवान विष्णु आकाश तत्त्व के स्वामी हैं, इसलिए उनकी साधना शब्दों अर्थात् मंत्रादि के माध्यम से करने का विधान है।
श्री विष्णु जी का ध्यान मंत्र
प्रात: स्मरामि भवभीतिमहार्तिनाशं नारायणं गरुडवाहनमब्जनाभम्। महाभिभृतवरवारणमुक्तिहेतुं चक्रायुधं तरुणवारिजपत्रनेत्रम्॥
श्री विष्णु जी का ध्यान मंत्र
प्रात: स्मरामि भवभीतिमहार्तिनाशं नारायणं गरुडवाहनमब्जनाभम्। महाभिभृतवरवारणमुक्तिहेतुं चक्रायुधं तरुणवारिजपत्रनेत्रम्॥
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Shiva
भगवान शिव पृथ्वी तत्त्व के स्वामी है, ऐसे में पंचदेवों में उनकी शिवलिंग के रुप में पूजा करने का विधान है।
श्री शिव जी का ध्यान मंत्र
प्रातः स्मरामि भवभीतिहरं सुरेशं गङ्गाधरं वृषभवाहनमम्बिकेशम् ।
खट्वाङ्गशूलवरदाभयहस्तमीशं संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम् ॥
श्री शिव जी का ध्यान मंत्र
प्रातः स्मरामि भवभीतिहरं सुरेशं गङ्गाधरं वृषभवाहनमम्बिकेशम् ।
खट्वाङ्गशूलवरदाभयहस्तमीशं संसाररोगहरमौषधमद्वितीयम् ॥
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Devi Durga
चूंकि अग्नि तत्त्व की की स्वामिनी देवी दुर्गा हैं, इसलिए शक्ति की साधना अग्निकुंड के हवन आदि के माध्यम से करने का विधान है।
श्री देवी जी का ध्यान मंत्र
प्रात: स्मरामि शरदिन्दुकरोज्ज्वलाभां सद्रत्नवन्मकरकुण्डलहारभूषाम् ।
दिव्यायुधोर्जितसुनीलसहस्त्रहस्तां रक्तोत्पलाभचरणां भवतीं परेशाम् ।।
श्री देवी जी का ध्यान मंत्र
प्रात: स्मरामि शरदिन्दुकरोज्ज्वलाभां सद्रत्नवन्मकरकुण्डलहारभूषाम् ।
दिव्यायुधोर्जितसुनीलसहस्त्रहस्तां रक्तोत्पलाभचरणां भवतीं परेशाम् ।।