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Hariyali Amavasya 2026: 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या, जानिए पूजा विधि और दान-स्नान का महत्व
Mon, 10 Aug 2026 06:05 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 10 Aug 2026 06:05 PM IST
सार
सावन माह में हरियाली अमावस्या का विशेष महत्व होता है। सावन अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 12 अगस्त को 01 बजकर 53 मिनट से शुरू होगी, जिसका समापन 12 अगस्त को रात 11 बजकर 7 मिनट तक रहेगी।
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हरियाली अमावस्या
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है। सावन माह में पड़ने वाली अमावस्या को सावन अमावस्या और हरियाली अमावस्या के नाम जाना जाता है। हरियाली अमावस्या को बहुत ही खास और पवित्र मानी जाती है। इस तिथि पर भगवान शिव की आराधना, पूजा-पाठ, पितरों को तर्पण, दान-पुण्य और नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व होता है। सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होती है और इस माह आने वाले व्रत-त्योहारों का महत्व काफी बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान के साथ भगवान शिव की पूजा आराधना और पितरों को तर्पण करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कब है हरियाली अमावस्या और पूजा-पाठ, दान-स्नान का महत्व।
सावन अमावस्या 2026 तिथि
सावन अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 12 अगस्त को 01 बजकर 53 मिनट से शुरू होगी, जिसका समापन 12 अगस्त को रात 11 बजकर 7 मिनट तक मान्य रहेगी। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर हरियाली अमावस्या 12 अगस्त को मनाई जाएगी।
हरियाली अमावस्या पर दान-स्नान का शुभ मुहूर्त
हरियाली अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान, पूजा -पाठ और दान करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन स्नान के लिए ब्रह्रा मुहूर्त का समय सबसे अच्छा और उत्तम रहता है। इस दिन ब्रह्रा मुहूर्त सुबह 4 बजकर 23 मिनट से लेकर 5 बजकर 6 मिनट तक रहेगा।
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हरियाली अमावस्या का महत्व
हरियाली अमावस्या पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान होता है। इसके अलावा इस तिथि पर वृक्षारोपण और प्रकृति संरक्षण को प्रोत्साहित करता है। शास्त्रों के अनुसार हरियाली अमावस्या पर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का श्रेष्ठ समय माना जाता है। इस दिन शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्रियां अर्पित करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है।
हरियाली अमावस्या पूजा विधि
हरियाली अमावस्या के दिन पूजा स्थल पर शिवलिंग या भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें। फिर इसके बाद व्रत और पूजा का संकल्प करें। इसके बाद शिव मंत्रों का उच्चारण करते हुए शुद्ध जल और गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करें। इसके बाद शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद, और शक्कर से अभिषेक करवाएं। अभिषेक के बाद दोबारा से शुद्ध जल से शिवलिंग पर जल अर्पित करें। फिर शिवलिंग पर चंदन, अक्षत, और पुष्प अर्पित करें। भगवान शिव को बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें। धूप और दीप जलाकर भगवान शिव की आरती करें और ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें।Shiv Parivar Puja: शिव परिवार की महिमा पूरे भारत में, जानिए किस क्षेत्र में किसकी होती है सबसे अधिक पूजा
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सावन अमावस्या 2026 तिथि
सावन अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 12 अगस्त को 01 बजकर 53 मिनट से शुरू होगी, जिसका समापन 12 अगस्त को रात 11 बजकर 7 मिनट तक मान्य रहेगी। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर हरियाली अमावस्या 12 अगस्त को मनाई जाएगी।
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हरियाली अमावस्या पर दान-स्नान का शुभ मुहूर्त
हरियाली अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान, पूजा -पाठ और दान करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन स्नान के लिए ब्रह्रा मुहूर्त का समय सबसे अच्छा और उत्तम रहता है। इस दिन ब्रह्रा मुहूर्त सुबह 4 बजकर 23 मिनट से लेकर 5 बजकर 6 मिनट तक रहेगा।
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हरियाली अमावस्या का महत्व
हरियाली अमावस्या पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान होता है। इसके अलावा इस तिथि पर वृक्षारोपण और प्रकृति संरक्षण को प्रोत्साहित करता है। शास्त्रों के अनुसार हरियाली अमावस्या पर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का श्रेष्ठ समय माना जाता है। इस दिन शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्रियां अर्पित करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है।
हरियाली अमावस्या पूजा विधि
हरियाली अमावस्या के दिन पूजा स्थल पर शिवलिंग या भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें। फिर इसके बाद व्रत और पूजा का संकल्प करें। इसके बाद शिव मंत्रों का उच्चारण करते हुए शुद्ध जल और गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करें। इसके बाद शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद, और शक्कर से अभिषेक करवाएं। अभिषेक के बाद दोबारा से शुद्ध जल से शिवलिंग पर जल अर्पित करें। फिर शिवलिंग पर चंदन, अक्षत, और पुष्प अर्पित करें। भगवान शिव को बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें। धूप और दीप जलाकर भगवान शिव की आरती करें और ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें।