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Holika Dahan 2026: होलिका दहन में गोबर की गुलरियों और कंडे क्यों अर्पित किए जाते हैं, जानिए इस परंपरा का महत्व
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Vinod Shukla
Updated Mon, 02 Mar 2026 11:37 AM IST
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सार
Holika Dahan 2026: होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है, जिसका विशेष महत्व होता है। होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक का पर्व है। लेकिन क्या आप जानते हैं होलिका दहन पूजा और उपलों का क्या है महत्व ?
होलिका दहन
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
Holika Dahan 2026: फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला होलिका दहन भारतीय संस्कृति में आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक शुद्धि का अद्भुत संगम है। इस दिन अग्नि प्रज्वलित कर बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होली की अग्नि में गोबर से बनी गुलरियां (बड़कुल्ले) और कंडे अर्पित करने की परंपरा विशेष महत्व रखती है। इसे केवल एक लोकाचार नहीं, बल्कि शुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के आह्वान का प्रतीक माना जाता है।
पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार
हिंदू धर्म में गाय को अत्यंत पवित्र माना गया है। गाय के गोबर को भी शास्त्रों में शुद्ध और पवित्र बताया गया है। यही कारण है कि होलिका दहन में गोबर से बने 4 कंडे और बड़कुल्ले अग्नि में समर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि इससे वातावरण की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और घर-परिवार में सुख-शांति का संचार होता है। अग्नि में जब ये पवित्र पदार्थ समर्पित होते हैं, तो उसे आध्यात्मिक शुद्धि का माध्यम माना जाता है।
बुराइयों और कष्टों का दहन
पौराणिक कथा के अनुसार होलिका दहन अहंकार और अधर्म के अंत का प्रतीक है। गोबर से बनी गुलरियां होलिका माता को अर्पित की जाती हैं। लोकविश्वास है कि इन बड़कुल्लों के साथ व्यक्ति अपनी परेशानियों, दुखों और नकारात्मक शक्तियों को भी अग्नि को समर्पित करता है। अग्नि उन सभी बाधाओं को जलाकर राख कर देती है और जीवन में नई आशा का संचार करती है।
होलिका दहन का समय ऋतु परिवर्तन का भी होता है, जब सर्दी से गर्मी की ओर मौसम बदलता है। धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ लोकपरंपराओं में यह विश्वास भी प्रचलित है कि गोबर के कंडे जलने से वातावरण शुद्ध होता है। गोबर में प्राकृतिक गुण होते हैं, जिनके कारण उससे उत्पन्न धुआं वातावरण को शुद्ध करने वाला माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे मौसमी बीमारियों से बचाव का पारंपरिक उपाय भी समझा जाता है।
परंपरा और पारिवारिक आस्था
होलिका दहन से पूर्व घर की महिलाएं गोबर से बड़कुल्ले तैयार करती हैं।और उन्हें सूखा कर होली की अग्नि में अर्पित किया जाता है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और पारिवारिक एकता का प्रतीक मानी जाती है। इसे परिवार की रक्षा और समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है।
गोबर के कंडे और गुलरियां जलाना केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की विजय का सजीव प्रतीक है। अग्नि देव को साक्षी मानकर व्यक्ति अपने भीतर की नकारात्मक भावनाओं—ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध और अहंकार—को त्यागने का संकल्प लेता है। इस प्रकार होलिका दहन आत्मशुद्धि, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा का पर्व बन जाता है।
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पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार
हिंदू धर्म में गाय को अत्यंत पवित्र माना गया है। गाय के गोबर को भी शास्त्रों में शुद्ध और पवित्र बताया गया है। यही कारण है कि होलिका दहन में गोबर से बने 4 कंडे और बड़कुल्ले अग्नि में समर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि इससे वातावरण की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और घर-परिवार में सुख-शांति का संचार होता है। अग्नि में जब ये पवित्र पदार्थ समर्पित होते हैं, तो उसे आध्यात्मिक शुद्धि का माध्यम माना जाता है।
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बुराइयों और कष्टों का दहन
पौराणिक कथा के अनुसार होलिका दहन अहंकार और अधर्म के अंत का प्रतीक है। गोबर से बनी गुलरियां होलिका माता को अर्पित की जाती हैं। लोकविश्वास है कि इन बड़कुल्लों के साथ व्यक्ति अपनी परेशानियों, दुखों और नकारात्मक शक्तियों को भी अग्नि को समर्पित करता है। अग्नि उन सभी बाधाओं को जलाकर राख कर देती है और जीवन में नई आशा का संचार करती है।
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स्वास्थ्य और ऋतु परिवर्तन से जुड़ी मान्यताहोलिका दहन का समय ऋतु परिवर्तन का भी होता है, जब सर्दी से गर्मी की ओर मौसम बदलता है। धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ लोकपरंपराओं में यह विश्वास भी प्रचलित है कि गोबर के कंडे जलने से वातावरण शुद्ध होता है। गोबर में प्राकृतिक गुण होते हैं, जिनके कारण उससे उत्पन्न धुआं वातावरण को शुद्ध करने वाला माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे मौसमी बीमारियों से बचाव का पारंपरिक उपाय भी समझा जाता है।
परंपरा और पारिवारिक आस्था
होलिका दहन से पूर्व घर की महिलाएं गोबर से बड़कुल्ले तैयार करती हैं।और उन्हें सूखा कर होली की अग्नि में अर्पित किया जाता है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और पारिवारिक एकता का प्रतीक मानी जाती है। इसे परिवार की रक्षा और समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है।
Holika Dahan 2026: होलिका दहन कब करें आज या कल ? जानिए होली और ग्रहण से जुड़ी हर एक खबर
धार्मिक प्रतीक और सांस्कृतिक संदेशगोबर के कंडे और गुलरियां जलाना केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की विजय का सजीव प्रतीक है। अग्नि देव को साक्षी मानकर व्यक्ति अपने भीतर की नकारात्मक भावनाओं—ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध और अहंकार—को त्यागने का संकल्प लेता है। इस प्रकार होलिका दहन आत्मशुद्धि, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा का पर्व बन जाता है।
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