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Vaishakh Purnima 2026: वैशाख पूर्णिमा आज, जानिए भगवान बुद्ध के उपदेश और पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Vinod Shukla
Updated Fri, 01 May 2026 12:42 AM IST
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सार
वैशाख पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व होता है। वैशाख शुक्ल पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा या पीपल पूर्णिमा कहा जाता है ।
वैशाख पूर्णिमा
- फोटो : AI
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विस्तार
सनातन धर्म में वैशाख मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। इस महीने में किए गए स्नान, दान और जप-तप का विशेष महत्व होता है। विशेष रूप से वैशाख पूर्णिमा का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होने के साथ-साथ भगवान बुद्ध की जयंती और निर्वाण दिवस के रूप में भी मनाया जाता है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। वैशाख शुक्ल पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा या पीपल पूर्णिमा कहा जाता है ।
वैशाख मास का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख मास को सभी महीनों में श्रेष्ठ माना गया है। स्कन्द पुराण में उल्लेख मिलता है कि स्वयं ब्रह्मा जी ने इस मास को उत्तम घोषित किया है। इस दौरान किए गए पुण्य कार्य मनुष्य को विशेष फल प्रदान करते हैं और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
पूर्णिमा स्नान और दान का महत्व
वैशाख पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन श्रद्धालु तीर्थ स्थलों पर जाकर स्नान और दान करते हैं। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान गोदान के समान फलदायी होता है और जीवन के पापों का नाश करता है।
‘पुष्करणी’ तिथियों का विशेष फल
वैशाख शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से लेकर पूर्णिमा तक की तिथियों को ‘पुष्करणी’ कहा गया है। इन तीन दिनों में स्नान और दान करने से पूरे महीने के पुण्य के बराबर फल प्राप्त होता है। यह समय आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, वैशाख मास की एकादशी को अमृत प्रकट हुआ, द्वादशी को भगवान विष्णु ने उसकी रक्षा की, त्रयोदशी को देवताओं को अमृत पान कराया और चतुर्दशी को दैत्यों का संहार किया। पूर्णिमा के दिन देवताओं को उनका खोया हुआ साम्राज्य पुनः प्राप्त हुआ। प्रसन्न होकर देवताओं ने इन तिथियों को पाप नाशक और सुखदायक होने का वरदान दिया।
धर्मराज की कृपा पाने का दिन
वैशाख पूर्णिमा के दिन धर्मराज (यमराज) के निमित्त व्रत और दान करने का विशेष विधान है। इस दिन जल से भरा कलश, छाता, जूते, पंखा, सत्तू और अन्य वस्त्र आदि का दान करना चाहिए। मान्यता है कि इससे धर्मराज प्रसन्न होते हैं और मनुष्य को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।
वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है। इसी दिन भगवान गौतम बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था। इस कारण यह तिथि बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भगवान बुद्ध ने मानव जीवन के दुःखों को समझाने के लिए ‘चार आर्य सत्य’ बताए- दुःख, दुःख का कारण, दुःख का निवारण और दुःख से मुक्ति का मार्ग। उन्होंने अष्टांगिक मार्ग का उपदेश दिया, जिसमें सम्यक दृष्टि, संकल्प, वचन, कर्म, आजीविका, प्रयास, स्मृति और समाधि शामिल हैं। बुद्ध पूर्णिमा के दिन श्रद्धालु बोधगया में बोधि वृक्ष की पूजा करते हैं और उनकी शिक्षाओं का पालन करने का संकल्प लेते हैं।
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वैशाख मास का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख मास को सभी महीनों में श्रेष्ठ माना गया है। स्कन्द पुराण में उल्लेख मिलता है कि स्वयं ब्रह्मा जी ने इस मास को उत्तम घोषित किया है। इस दौरान किए गए पुण्य कार्य मनुष्य को विशेष फल प्रदान करते हैं और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
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पूर्णिमा स्नान और दान का महत्व
वैशाख पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन श्रद्धालु तीर्थ स्थलों पर जाकर स्नान और दान करते हैं। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान गोदान के समान फलदायी होता है और जीवन के पापों का नाश करता है।
‘पुष्करणी’ तिथियों का विशेष फल
वैशाख शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी से लेकर पूर्णिमा तक की तिथियों को ‘पुष्करणी’ कहा गया है। इन तीन दिनों में स्नान और दान करने से पूरे महीने के पुण्य के बराबर फल प्राप्त होता है। यह समय आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
Vaishakh Purnima 2026: वैशाख पूर्णिमा कल, सुख-समृद्धि और लाभ के लिए करें ये 5 सरल उपाय
देवताओं की विजय से जुड़ी मान्यतापौराणिक कथा के अनुसार, वैशाख मास की एकादशी को अमृत प्रकट हुआ, द्वादशी को भगवान विष्णु ने उसकी रक्षा की, त्रयोदशी को देवताओं को अमृत पान कराया और चतुर्दशी को दैत्यों का संहार किया। पूर्णिमा के दिन देवताओं को उनका खोया हुआ साम्राज्य पुनः प्राप्त हुआ। प्रसन्न होकर देवताओं ने इन तिथियों को पाप नाशक और सुखदायक होने का वरदान दिया।
धर्मराज की कृपा पाने का दिन
वैशाख पूर्णिमा के दिन धर्मराज (यमराज) के निमित्त व्रत और दान करने का विशेष विधान है। इस दिन जल से भरा कलश, छाता, जूते, पंखा, सत्तू और अन्य वस्त्र आदि का दान करना चाहिए। मान्यता है कि इससे धर्मराज प्रसन्न होते हैं और मनुष्य को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।
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भगवान बुद्ध से जुड़ी विशेषतावैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है। इसी दिन भगवान गौतम बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था। इस कारण यह तिथि बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भगवान बुद्ध ने मानव जीवन के दुःखों को समझाने के लिए ‘चार आर्य सत्य’ बताए- दुःख, दुःख का कारण, दुःख का निवारण और दुःख से मुक्ति का मार्ग। उन्होंने अष्टांगिक मार्ग का उपदेश दिया, जिसमें सम्यक दृष्टि, संकल्प, वचन, कर्म, आजीविका, प्रयास, स्मृति और समाधि शामिल हैं। बुद्ध पूर्णिमा के दिन श्रद्धालु बोधगया में बोधि वृक्ष की पूजा करते हैं और उनकी शिक्षाओं का पालन करने का संकल्प लेते हैं।
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