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Taipei Open: 17 साल की तन्वी शर्मा ने रचा इतिहास, 18 साल बाद भारत को दिलाया महिला एकल खिताब
Sun, 02 Aug 2026 12:53 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ताइपे
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ताइपे
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Sun, 02 Aug 2026 12:53 PM IST
सार
भारत की 17 वर्षीय बैडमिंटन खिलाड़ी तन्वी शर्मा ने ताइपे ओपन सुपर-300 का महिला एकल खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने फाइनल में वियतनाम की थ्यू लिन्ह गुयेन को सीधे गेम में हराया। तन्वी 2008 में सायना नेहवाल के बाद यह खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
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तन्वी
- फोटो : IANS
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विस्तार
भारत की युवा बैडमिंटन स्टार तन्वी शर्मा ने ताइपे ओपन सुपर-300 टूर्नामेंट का महिला एकल खिताब जीतकर नया इतिहास रच दिया। पंजाब की 17 वर्षीय खिलाड़ी ने रविवार को खेले गए फाइनल में वियतनाम की छठी वरीय थ्यू लिन्ह गुयेन को 21-16, 21-16 से हराकर अपने करियर का पहला बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब जीता। मुकाबला महज 36 मिनट तक चला।
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18 साल बाद भारत को मिला महिला एकल खिताब
तन्वी ताइपे ओपन महिला एकल का खिताब जीतने वाली 2008 की चैंपियन सायना नेहवाल के बाद पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। यही नहीं, यह उनके करियर का पहला बीडब्ल्यूएफ सुपर-300 खिताब भी है। पिछले साल वह यूएस ओपन सुपर-300 के फाइनल तक पहुंची थीं, लेकिन उपविजेता रह गई थीं।
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तन्वी ने बनाया रिकॉर्ड
इस जीत के साथ तन्वी ताइपे ओपन के इतिहास में किसी भी वर्ग की सबसे युवा चैंपियन बन गईं। 17 वर्ष और 222 दिन की उम्र में तन्वी ताइपे ओपन के इतिहास की सबसे युवा चैंपियन बनने के साथ-साथ टूर्नामेंट की सबसे कम उम्र की फाइनलिस्ट भी रहीं। उन्होंने दक्षिण कोरिया के दिग्गज ली योंग डे का रिकॉर्ड तोड़ा।
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तन्वी
- फोटो : IANS
फाइनल में शुरुआत से बनाया दबाव
पीवी सिंधू के पूर्व कोच पार्क ताए-सांग की शिष्या तन्वी ने मैच की शुरुआत शानदार अंदाज में की। बेहतरीन ड्रॉप शॉट, क्रॉस-कोर्ट स्मैश और शानदार नेट प्ले के दम पर उन्होंने शुरुआती गेम में 10-2 की बढ़त बना ली। बीच में कुछ गलतियां जरूर हुईं, लेकिन उन्होंने तेजी से वापसी करते हुए पहला गेम 21-16 से अपने नाम किया।
दूसरे गेम में वियतनामी खिलाड़ी ने 3-0 की बढ़त बना ली, लेकिन तन्वी ने संयम बनाए रखा। शानदार डिफेंस और भ्रामक शॉट्स की बदौलत उन्होंने लगातार अंक जुटाए और बढ़त हासिल कर ली। आखिर में सात मैच प्वाइंट मिलने के बाद उन्होंने चौथे अवसर पर मुकाबला समाप्त कर दिया।
पीवी सिंधू के पूर्व कोच पार्क ताए-सांग की शिष्या तन्वी ने मैच की शुरुआत शानदार अंदाज में की। बेहतरीन ड्रॉप शॉट, क्रॉस-कोर्ट स्मैश और शानदार नेट प्ले के दम पर उन्होंने शुरुआती गेम में 10-2 की बढ़त बना ली। बीच में कुछ गलतियां जरूर हुईं, लेकिन उन्होंने तेजी से वापसी करते हुए पहला गेम 21-16 से अपने नाम किया।
दूसरे गेम में वियतनामी खिलाड़ी ने 3-0 की बढ़त बना ली, लेकिन तन्वी ने संयम बनाए रखा। शानदार डिफेंस और भ्रामक शॉट्स की बदौलत उन्होंने लगातार अंक जुटाए और बढ़त हासिल कर ली। आखिर में सात मैच प्वाइंट मिलने के बाद उन्होंने चौथे अवसर पर मुकाबला समाप्त कर दिया।
तन्वी शर्मा
- फोटो : PTI
कोच को पहनाया स्वर्ण पदक
खिताब जीतने के बाद भावुक पल भी देखने को मिला। तन्वी ने पदक समारोह के दौरान अपना स्वर्ण पदक उतारकर अपने कोच पार्क ताए-सांग के गले में पहनाया। इसके बाद दोनों ने साथ में तस्वीरें खिंचवाईं। यह दृश्य दर्शकों के लिए खास आकर्षण बना।
रिकॉर्ड भी किया अपने नाम
17 वर्ष और 222 दिन की उम्र में तन्वी ताइपे ओपन के इतिहास की सबसे युवा फाइनलिस्ट भी बन गईं। उन्होंने 2006 में पुरुष युगल फाइनल खेलने वाले दक्षिण कोरिया के दिग्गज ली योंग डे का रिकॉर्ड तोड़ दिया। पूर्व विश्व जूनियर नंबर-1 तन्वी पहले ही विश्व जूनियर चैंपियनशिप के एक संस्करण में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन चुकी हैं। वह एशियाई टीम चैंपियनशिप में भारत को पहला स्वर्ण दिलाने वाली टीम का भी हिस्सा रही हैं। अब ताइपे ओपन का खिताब जीतकर उन्होंने भारतीय बैडमिंटन के भविष्य की नई उम्मीद के रूप में अपनी पहचान और मजबूत कर ली।
खिताब जीतने के बाद भावुक पल भी देखने को मिला। तन्वी ने पदक समारोह के दौरान अपना स्वर्ण पदक उतारकर अपने कोच पार्क ताए-सांग के गले में पहनाया। इसके बाद दोनों ने साथ में तस्वीरें खिंचवाईं। यह दृश्य दर्शकों के लिए खास आकर्षण बना।
रिकॉर्ड भी किया अपने नाम
17 वर्ष और 222 दिन की उम्र में तन्वी ताइपे ओपन के इतिहास की सबसे युवा फाइनलिस्ट भी बन गईं। उन्होंने 2006 में पुरुष युगल फाइनल खेलने वाले दक्षिण कोरिया के दिग्गज ली योंग डे का रिकॉर्ड तोड़ दिया। पूर्व विश्व जूनियर नंबर-1 तन्वी पहले ही विश्व जूनियर चैंपियनशिप के एक संस्करण में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन चुकी हैं। वह एशियाई टीम चैंपियनशिप में भारत को पहला स्वर्ण दिलाने वाली टीम का भी हिस्सा रही हैं। अब ताइपे ओपन का खिताब जीतकर उन्होंने भारतीय बैडमिंटन के भविष्य की नई उम्मीद के रूप में अपनी पहचान और मजबूत कर ली।