{"_id":"6a6ed90248d6c1eae10771b8","slug":"cwg-2026-army-veteran-soman-rana-s-inspiring-journey-from-losing-a-leg-to-winning-commonwealth-gold-2026-08-02","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"CWG 2026: देश के लिए लड़ते हुए गंवाया एक पैर, अब कॉमनवेल्थ में जीता स्वर्ण; सोमन राणा बोले- आसान नहीं थी राह","category":{"title":"Sports","title_hn":"खेल","slug":"sports"}}
CWG 2026: देश के लिए लड़ते हुए गंवाया एक पैर, अब कॉमनवेल्थ में जीता स्वर्ण; सोमन राणा बोले- आसान नहीं थी राह
Sun, 02 Aug 2026 11:13 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लास्गो
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लास्गो
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Sun, 02 Aug 2026 11:13 AM IST
सार
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पैरा एथलीट सोमन राणा ने पुरुष एफ57 शॉटपुट में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। भारतीय सेना में ड्यूटी के दौरान एक पैर गंवाने वाले सोमन ने बताया कि चुनौतियों से भरे सफर, परिवार और सेना के सहयोग ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।
विज्ञापन
सोमन राणा
- फोटो : IANS
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने वाले पैरा एथलीट सोमन राणा की सफलता संघर्ष, साहस और जज्बे की मिसाल है। पुरुष एफ57 शॉटपुट स्पर्धा में 13.40 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर स्वर्ण जीतने वाले सोमन ने बताया कि भारतीय सेना में ड्यूटी के दौरान उन्होंने अपना दाहिना पैर गंवा दिया था। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आज देश के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स का स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया।
विज्ञापन
'एक पैर गंवाने के बाद सब कुछ बदल गया'
2022 एशियाई पैरा खेलों के रजत पदक विजेता सोमन ने कहा कि उनका सफर बिल्कुल आसान नहीं था। उन्होंने बताया, 'मैं भारतीय सेना में हूं। 2006 में ड्यूटी के दौरान मेरा दाहिना पैर चला गया। उसके बाद भी मैं सेवा करता रहा, लेकिन जब पैरालंपिक खेलों के बारे में पता चला तो 2017 से इसकी तैयारी शुरू कर दी।'
उन्होंने आगे कहा, 'एक पैर गंवाने के बाद बहुत मुश्किलें आईं। आम इंसान छोटी चोट के बाद भी चलने में परेशानी महसूस करता है, जबकि मुझे कृत्रिम पैर के साथ चलना सीखना था और फिर उसी के साथ खेलों में उतरना था। धीरे-धीरे हर चुनौती को पार करते हुए मैं यहां तक पहुंचा।'
2022 एशियाई पैरा खेलों के रजत पदक विजेता सोमन ने कहा कि उनका सफर बिल्कुल आसान नहीं था। उन्होंने बताया, 'मैं भारतीय सेना में हूं। 2006 में ड्यूटी के दौरान मेरा दाहिना पैर चला गया। उसके बाद भी मैं सेवा करता रहा, लेकिन जब पैरालंपिक खेलों के बारे में पता चला तो 2017 से इसकी तैयारी शुरू कर दी।'
उन्होंने आगे कहा, 'एक पैर गंवाने के बाद बहुत मुश्किलें आईं। आम इंसान छोटी चोट के बाद भी चलने में परेशानी महसूस करता है, जबकि मुझे कृत्रिम पैर के साथ चलना सीखना था और फिर उसी के साथ खेलों में उतरना था। धीरे-धीरे हर चुनौती को पार करते हुए मैं यहां तक पहुंचा।'
विज्ञापन
विज्ञापन
दूसरे पैरा खिलाड़ियों से मिली प्रेरणा
सोमन ने बताया कि शुरुआती दिनों में उन्हें लगता था कि कृत्रिम पैर के सहारे खेलना संभव नहीं होगा। लेकिन दूसरे पैरा एथलीटों को देखकर उनका आत्मविश्वास बढ़ा। उन्होंने कहा, 'शुरुआत में समझ नहीं आता था कि कृत्रिम पैर के साथ कैसे चलूंगा और कैसे खेलूंगा। फिर मैंने ऐसे पैरा एथलीटों को देखा, जिनका पूरा पैर ही नहीं था। तब मुझे लगा कि अगर वे इतना कर सकते हैं तो मैं भी कर सकता हूं। वहीं से मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली।'
सोमन ने बताया कि शुरुआती दिनों में उन्हें लगता था कि कृत्रिम पैर के सहारे खेलना संभव नहीं होगा। लेकिन दूसरे पैरा एथलीटों को देखकर उनका आत्मविश्वास बढ़ा। उन्होंने कहा, 'शुरुआत में समझ नहीं आता था कि कृत्रिम पैर के साथ कैसे चलूंगा और कैसे खेलूंगा। फिर मैंने ऐसे पैरा एथलीटों को देखा, जिनका पूरा पैर ही नहीं था। तब मुझे लगा कि अगर वे इतना कर सकते हैं तो मैं भी कर सकता हूं। वहीं से मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली।'
परिवार, सेना और साई को दिया सफलता का श्रेय
सोमन ने अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय परिवार, भारतीय सेना, भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया (पीसीआई) को दिया। उन्होंने कहा, 'परिवार, सेना, साई और पीसीआई ने हर कदम पर मेरा साथ दिया। उनके सहयोग की वजह से ही मैं इस मुकाम तक पहुंच पाया और देश के लिए स्वर्ण पदक जीत सका। मैं अपना यह मेडल उन सभी लोगों को समर्पित करता हूं, जिन्होंने मुश्किल समय में मेरा हौसला बढ़ाया।'
सोमन राणा की यह कहानी बताती है कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। देश की सेवा करते हुए एक पैर गंवाने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बन गए।
सोमन ने अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय परिवार, भारतीय सेना, भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया (पीसीआई) को दिया। उन्होंने कहा, 'परिवार, सेना, साई और पीसीआई ने हर कदम पर मेरा साथ दिया। उनके सहयोग की वजह से ही मैं इस मुकाम तक पहुंच पाया और देश के लिए स्वर्ण पदक जीत सका। मैं अपना यह मेडल उन सभी लोगों को समर्पित करता हूं, जिन्होंने मुश्किल समय में मेरा हौसला बढ़ाया।'
सोमन राणा की यह कहानी बताती है कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। देश की सेवा करते हुए एक पैर गंवाने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अब कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बन गए।