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Explainer: पानी पीने के ब्रेक से यलो-रेड कार्ड और VAR तक पर बवाल, कैसे विवादों से घिरता जा रहा फुटबॉल विश्व कप

Fri, 10 Jul 2026 06:06 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Fri, 10 Jul 2026 06:06 AM IST
सार

अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में साझा तौर पर आयोजित कराए जा रहे फुटबॉल विश्व कप में कुछ घटनाओं ने न सिर्फ फुटबॉल में खेल भावना पर असर डाला है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका आयोजन कराने वाली संस्था- फीफा की भूमिका और अखंडता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। आइये जानते हैं इस विश्व कप में ऐसी ही कुछ घटनाओं के बारे में जिन्हें लेकर विवाद की स्थिति पैदा हो गई है...

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FIFA Football World Cup 2026 Controversies Explained from VAR to Referee Decision Foul Play Infantino Trump US
2026 फीफा विश्वकप में विवाद की कई घटनाओं ने बटोरीं सुर्खियां - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में खेले जा रहे फुटबॉल विश्व कप 2026 का रोमांच अपने चरम पर है। क्वार्टर फाइनल के मुकाबले शुरू हो चुके हैं और इसमें सभी बड़ी टीमें एक-दूसरे की परीक्षा लेती नजर आएंगी। हालांकि, अब तक विश्व कप में कई ऐसे घटनाक्रम हुए हैं, जिसके चलते वैश्विक स्तर पर फुटबॉल को प्रमोट करने वाली संस्था फेडरेशन इंटरनेशनल फुटबॉल एसोसिएशन (फीफा) पर ही सवाल उठने लगे हैं। आलम यह है कि आम दर्शकों से लेकर खुद कई टीमों और खिलाड़ियों ने ही फीफा और इसके अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। कभी यह विवाद हालिया समय में बनाए गए हाइड्रेशन ब्रेक के नियम को लेकर उभरे तो कभी मैच के दौरान रेफरी की तरफ से दिए गए किसी फैसले पर। 
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इन नियमों और फैसलों से भी ऊपर खुद फीफा की ओर से लिए गए कुछ निर्णयों पर भी विवाद हुआ है, जिसकी चौतरफा आलोचना हुई है। इन घटनाओं ने न सिर्फ फुटबॉल में खेल भावना पर असर डाला है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका आयोजन कराने वाली संस्था- फीफा की भूमिका और अखंडता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। आइये जानते हैं ऐसे ही कुछ घटनाक्रमों के बारे में जिनकी वजह से इस बार का फुटबॉल विश्व कप विवादों में घिर गया है...
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विवाद-1: फुटबॉल मैच के दौरान हाइड्रेशन ब्रेक पर

2026 फीफा विश्व कप के दौरान हाइड्रेशन ब्रेक का मुद्दा सबसे बड़े विवादों में से एक बन गया है। मूल रूप से फीफा ने खिलाड़ियों को अमेरिकी महाद्वीप पर 40 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा की गर्मी से बचाने के लिए हर हाफ में अनिवार्य तीन मिनट के ब्रेक की शुरुआत की थी। हालांकि, इसके लागू होने के तरीके ने कई बड़े विवादों को जन्म दिया है।

खेल का व्यवसायीकरण: सबसे बड़ा विवाद यह है कि प्रसारकों, जैसे अमेरिका में फॉक्स नेटवर्क ने इस ब्रेक का इस्तेमाल विज्ञापन दिखाने के लिए किया है। आलोचकों और प्रशंसकों का मानना है कि यह फीफा और प्रसारकों की तरफ से अतिरिक्त पैसा कमाने का एक छिपा हुआ तरीका था। एक अनुमान के मुताबिक, इन हाइड्रेशन ब्रेक ने अकेले अमेरिका में प्रसारकों को 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त राजस्व कमा कर दिया है।

फुटबॉल का 'चार-क्वार्टर' वाले खेल में बदलना: विज्ञापनों वाले इस अनिवार्य ब्रेक ने फुटबॉल के पारंपरिक दो हाफ वाले स्वरूप को अमेरिकी शैली के चार क्वार्टर वाले खेल में बदल दिया है। पत्रकार बार्नी रोने ने तो इसे फुटबॉल के मूल ताने-बाने का अपमान तक कह दिया।

खेल की लय और गति का टूटना: प्रशंसकों का तर्क है कि ये ब्रेक खेल की प्राकृतिक लय को बाधित करते हैं। कई बार तो विज्ञापनों के कारण प्रसारक खेल के दोबारा शुरू होने के बाद के कुछ शुरुआती सेकंड का प्रसारण भी चूक गए, जिससे दर्शक और ज्यादा नाराज हुए। 

रणनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल: यूं तो यह ब्रेक खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए था, लेकिन कोच इसका इस्तेमाल रणनीतिक चर्चाओं और खिलाड़ियों को निर्देश देने के लिए करने लगे। इसका असर मैच पर साफ दिखा। उदाहरण के तौर पर, मैच के पहले दिन जहां ब्रेक से पहले 115 शॉट्स गोल पर लगाए गए तो ब्रेक के बाद इनकी संख्या बढ़कर 170 तक पहुंच गई। यही स्थिति कई और मैचों में हुई है। 

हर स्थिति में अनावश्यक रूप से लागू करना: फीफा ने स्थिति के आधार पर ब्रेक देने के बजाय इसे पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया। जब एयर-कंडीशन्ड स्टेडियमों में और घाना बनाम पनामा मैच के दौरान भारी बारिश के बीच भी हाइड्रेशन ब्रेक दिया गया, तो दर्शकों ने गुस्से में इसकी हूटिंग की। इतना ही नहीं मेक्सिको में तापमान कम होने और गर्मी की शिकायत न होने के बावजूद हाइड्रेशन ब्रेक पर सवाल खड़े हो गए हैं। 
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फुटबॉल विश्व कप में हाइड्रेशन ब्रेक के नए नियमों पर विवाद। - फोटो : अमर उजाला

विवाद-2: रेफरी और वीएआर के फैसलों पर

2026 फीफा विश्व कप में वीडियो असिस्टेंट रेफरी (वीएआर) और सेमी-ऑटोमेटेड तकनीक मानवीय गलतियों को कम करने के लिए लाई गई थी। हालांकि, इसने फैसलों में असंगतता और खेल की लय बिगड़ने के कारण कई बड़े विवाद पैदा हुए हैं। इनमें सबसे बड़ा विवाद मिस्र और अर्जेंटीना के मैच में उभरा। वहीं, कुछ और मामलों में भी यही देखा गया।

मिस्र बनाम अर्जेंटीना मैच का विवाद

यह वीएआर के इस्तेमाल की वजह से से सबसे विवादित मैचों में से एक बन गया। वीएआर ने मिस्र के खिलाड़ी मुस्तफा जिको के गोल को बिल्ड-अप में एक हल्के फाउल का हवाला देते हुए अमान्य कर दिया। दूसरी ओर जब अर्जेंटीना के खिलाड़ी ने पेनल्टी बॉक्स में मोहम्मद सालाह को गिराया, तो वीएआर का इस्तेमाल नहीं हुआ और मिस्र की पेनल्टी की मांग ठुकरा दी गई। इसके अलावा, मिस्र का आरोप था कि अर्जेंटीना के विजयी गोल से पहले भी एक फाउल हुआ था जिसे वीएआर ने नजरअंदाज कर दिया। इससे नाराज होकर मिस्र ने रेफरी पर बेईमानी का आरोप लगाया और फीफा में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई ।

ये भी पढ़ें: Explainer: क्या फीफा विश्वकप में अर्जेंटीना और मेसी पर इनफैनटिनो मेहरबान? आरोप-विवाद और आंकड़ों की पूरी पड़ताल

 

जर्मनी का अमान्य विजयी गोल 

जर्मनी और पराग्वे के मैच में अतिरिक्त समय के दौरान जर्मनी के जोनाथन ताह ने हेडर से एक गोल दागा, जिसे वीएआर ने पराग्वे के गोलकीपर पर फाउल बताकर अमान्य कर दिया। इसके बाद जर्मनी पेनल्टी शूटआउट में हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गया। जर्मन कोच यूलियन नागेल्समैन ने इस फैसले को एक मजाक और स्कैंडल करार दिया।


बालोगुन-मेसी के मामले में विवाद

अमेरिका के फोलारिन बालोगुन को बोस्निया के खिलाफ मैच में एक अनजाने टैकल (दूसरे खिलाड़ी को धक्का देकर गिराने या शरीर के अंगों से टकराने) के लिए वीएआर रिव्यू के बाद सीधा रेड कार्ड दिखा दिया गया। यह भारी विवाद का कारण बना, क्योंकि अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी ने अल्जीरिया के खिलाफ बिल्कुल वैसा ही टैकल किया था, लेकिन उन्हें कोई कार्ड नहीं दिया गया। आलोचकों ने इसे वीएआर के फैसलों में स्पष्ट पक्षपात और दोहरे मापदंड का उदाहरण बताया।


क्रोएशिया का विरोध और रद्द हुआ गोल

क्रोएशिया के खिलाफ मैच में वीएआर ने पुर्तगाल को एक बेहद विवादास्पद पेनल्टी दी। इसके बाद मैच के अंतिम पलों में क्रोएशिया के जोस्को ग्वार्डिओल के बराबरी वाले गोल को बॉल के भीतर लगे सेंसर (कनेक्टेड बॉल टेक्नोलॉजी) और वीएआर की मदद से ऑफसाइड घोषित कर दिया गया। इस फैसले के बाद क्रोएशियाई फुटबॉल महासंघ (एचएनएस) ने वीएआर के अनुचित इस्तेमाल को लेकर फीफा से आधिकारिक शिकायत की।

ईरान का आखिरी क्षणों में किया गया गोल हुआ ऑफसाइड

मिस्र के खिलाफ मैच में ईरान के एक इंजरी-टाइम विजयी गोल को सेमी-ऑटोमेटेड ऑफसाइड टेक्नोलॉजी (एसएओटी) और वीएआर रिव्यू में यह कहकर खारिज कर दिया कि खिलाड़ी अपने जूते की नोक से ऑफसाइड था। इससे खेल में इतने बारीक मार्जिन को लेकर बहस फिर से छिड़ गई।

तकनीकी खराबी और दर्शकों में भ्रम

कतर के खिलाफ मैच में स्विट्जरलैंड को वीएआर रिव्यू के बाद पेनल्टी दी गई, लेकिन एक तकनीकी खराबी के कारण टीवी और स्टेडियम के दर्शकों को ऑफसाइड जांचने वाला ग्राफिक नहीं दिखाया जा सका। इससे लोगों में काफी भ्रम पैदा हुआ और फैसले की पारदर्शिता पर सवाल उठे।

सेनेगल बनाम बेल्जियम की पेनल्टी

इस मैच के अतिरिक्त समय में वीएआर ने बेल्जियम को देरी से पेनल्टी दी, जिससे सेनेगल हारकर बाहर हो गया। आलोचकों ने आरोप लगाया कि बेल्जियम के खिलाड़ी ने खुद ही जानबूझकर संपर्क किया था, और वीएआर का यह फैसला गलत था।

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फीफा विश्व कप में वीएआर तकनीक का इस्तेमाल भी विवादों के घेरे में। - फोटो : अमर उजाला

विवाद-3: फाउल, यलो कार्ड और रेड कार्ड पर 


मुंह छिपाकर बात करने पर रेड कार्ड विवाद

फीफा ने खिलाड़ियों को अधिकारियों या कैमरों से अपशब्द छिपाने से रोकने के लिए एक नया नियम (विनिशियस लॉ) लागू किया था। इसके तहत पराग्वे के मिगुएल अल्मिरोन और इक्वाडोर के पिएरो हिनकापी को विरोधी खिलाड़ियों के साथ बहस के दौरान अपना मुंह छिपाने के लिए सीधे रेड कार्ड दिए गए। हालांकि, इंग्लैंड के जूड बेलिंगहम ने घाना के खिलाफ मैच में बिल्कुल यही किया, लेकिन उन्हें कोई कार्ड नहीं दिया गया, जिसे लेकर फुटबॉल जगत में दोहरे मापदंड के आरोप लगे।

ट्रंप का हस्तक्षेप और रेड कार्ड बैन हटाना

अमेरिका के फोलारिन बालोगुन को बोस्निया के खिलाफ एक टैकल के लिए सीधा रेड कार्ड दे दिया गया। रेड कार्ड मिलने के बाद बालोगुन पर एक मैच का अनिवार्य प्रतिबंध लगना था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगातार दबाव और दखल के बाद, फीफा ने अप्रत्याशित रूप से इस बैन को निलंबित कर दिया। ट्रंप ने खुद कबूला था कि इसके लिए उन्होंने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से फोन पर बात की।  

इससे पहले पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो को भी क्वालिफायर में मिले रेड कार्ड के बाद उनके बैन को फीफा ने सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ उनकी व्हाइट हाउस यात्रा के बाद हटा दिया था। इन राजनीतिक हस्तक्षेपों और फैसलों ने यूएफा और अमेरिका के अगले प्रतिद्वंद्वी बेल्जियम को काफी नाराज किया।


पराग्वे बनाम फ्रांस का मुकाबला

फ्रांस के खिलाफ मैच में पराग्वे के खिलाड़ियों ने बेहद आक्रामक खेल दिखाया और 13 फाउल किए, लेकिन रेफरी ने उन्हें एक भी यलो कार्ड नहीं दिया। इसके विपरीत, फ्रांस को 11 फाउल के लिए 3 यलो कार्ड दे दिए गए। किलियन एमबापे और फ्रांस के कोच डिडियर डेसौं ने पराग्वे के इस गंदे खेल और कार्ड न दिखाने के लिए रेफरी के पक्षपातपूर्ण रवैये की तीखी आलोचना की ।


बिल्ड-अप में फाउल और गोलों पर विवाद

अर्जेंटीना बनाम मिस्र: मिस्र के मुस्तफा जिको के एक गोल को बिल्ड-अप में पैर पर कदम रखने वाले एक बेहद मामूली फाउल के कारण अमान्य कर दिया गया। वहीं दूसरी ओर, अर्जेंटीना के विजयी गोल से पहले हुए शर्ट-पुल फाउल को नजरअंदाज कर दिया गया। इन फाउल्स पर तीखा विरोध जताने पर मिस्र के कोच होसाम हसन को यलो कार्ड दिया गया।



ये भी पढ़ें: Explainer: अर्जेंटीना-मिस्र मुकाबले में क्या VAR के फैसले सही थे या उठते सवाल जायज हैं? दो फैसलों से पलटा मैच 

अमेरिका बनाम बोस्निया हर्जेगोविना: बोस्निया और हर्जेगोविना के कोच सर्गेज बारबारेज ने जब अमेरिका के खिलाफ एक फाउल न दिए जाने पर विरोध किया और मैच रुकने पर गेंद हाथ में उठा ली, तो रेफरी ने उन्हें खेल भावना के विपरीत व्यवहार के लिए यलो कार्ड दिखा दिया।

ऑस्ट्रिया बनाम अर्जेंटीना: मेसी के गोल से ठीक पहले ऑस्ट्रियाई खिलाड़ी जेवर श्लेगर पर एक स्पष्ट फाउल हुआ था, लेकिन रेफरी और वीएआर दोनों ने उसे नजरअंदाज कर दिया।
 
इंग्लैंड बनाम घाना: घाना के प्रिंस अडू को पेनल्टी बॉक्स में एजरी कोन्सा ने फाउल किया, लेकिन रेफरी ने कोई पेनल्टी नहीं दी और गोलकीपर जॉर्डन पिकफोर्ड की अडू से टक्कर होने पर कोई भी कार्ड नहीं दिखाया गया।

विवाद-4: सोमालिया के रेफरी पर प्रतिबंध

सोमालिया के रेफरी उमर अब्दुलकादिर अरतान फुटबॉल विश्व कप में रेफरी की भूमिका निभाने वाले पहले सोमाली ऑफिशियल बनने वाले थे, लेकिन उन्हें अमेरिका में प्रवेश करने से ही रोक दिया गया। 6 जून को मयामी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने पर अरतान को अमेरिका में प्रवेश देने से मना कर दिया गया। यह तब हुआ जब उनके पास एक वैध अमेरिकी वीजा और नैरोबी स्थित सोमाली दूतावास की मदद से जारी किया गया एक राजनयिक पासपोर्ट मौजूद था। प्रवेश से इनकार करने के बाद उन्हें इस्तांबुल भेज दिया गया।



अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले कस्टम और बॉर्डर प्रोटेक्शन विभाग ने उन्हें प्रवेश न देने की वजह जांच संबंधी चिंताओं और संदिग्ध आतंकी संगठनों के सदस्यों के साथ कथित संबंधों को बताया। अरतान ने आतंकी गुटों से किसी भी तरह के संबंधों के आरोपों का कड़ाई से खंडन किया। चौंकाने वाली बात यह रही कि कूटनीतिक स्तर पर इस मुद्दे को सुलझाने के प्रयासों के बावजूद, फीफा ने आखिरकार अरतान को टूर्नामेंट के रोस्टर से हटा दिया। फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने इस मामले में यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि वह मेजबान देश के फैसले को पलटने में असमर्थ हैं। उन्होंने उल्टा अपने आलोचकों से इस मुद्दे पर शांत होने को कहा, जिससे विवाद और भड़क गया। 

इस घटना ने वैश्विक खेल आयोजनों में वीजा नियमों को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी। हालांकि अरतान टूर्नामेंट में अंपायरिंग नहीं कर पाए, लेकिन यह घोषणा की गई कि उन्हें उनकी पूरी विश्व कप की सैलरी दी जाएगी। जब अरतान सोमालिया लौटे, तो उनका एक हीरो की तरह जबरदस्त स्वागत किया गया। इसके अलावा, यूएफा ने उनका समर्थन करते हुए उन्हें अगले महीने होने वाले सुपर कप मैच- पेरिस सेंट-जर्मेन बनाम एस्टन विला में रेफरी की जिम्मेदारी सौंपी।


विवाद-5: ईरान की टीम के भेदभाव के आरोप

2026 फीफा विश्व कप में ईरान की भागीदारी राजनीतिक, कूटनीतिक और खेल से जुड़े कई बड़े विवादों से घिरी रही। मुख्य रूप से अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण ये विवाद पैदा हुए।

वीजा और यात्रा प्रतिबंध: अमेरिकी सरकार के कड़े ट्रैवल बैन की वजह से आम ईरानी प्रशंसकों को विश्व कप के मैच देखने के लिए अमेरिका का वीजा नहीं मिल सका। इसके अलावा, ईरानी फुटबॉल महासंघ (एफएफआईआरआई) के अध्यक्ष मेहदी ताज और टीम के कई कोचिंग व प्रशासनिक स्टाफ को भी अमेरिका ने आतंकी संगठनों (आईआरजीसी) से संबंध का आरोप लगाकर वीजा देने से इनकार कर दिया।

मेक्सिको में ट्रेनिंग और सख्त पाबंदियां: अमेरिका में प्रवेश और सुरक्षा को लेकर कड़े नियमों के कारण, ईरान को अपना ट्रेनिंग बेस अमेरिका के टक्सन से हटाकर मेक्सिको के तिजुआना में शिफ्ट करना पड़ा। टीम को केवल मैच वाले दिन अमेरिका में प्रवेश की इजाजत थी और मैच खत्म होते ही उन्हें तुरंत मेक्सिको लौटना पड़ता था। ईरानी कप्तान मेहदी तारेमी और कोच अमीर घलेनोई ने इन अमानवीय पाबंदियों की कड़ी आलोचना की।

युद्ध और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं: फरवरी 2026 में अमेरिका और इस्राइल की तरफ से ईरान पर हमले किए गए थे। इसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इस घटनाक्रम के बाद विश्व कप पर संकट के बादल छा गए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरानी टीम का स्वागत है, लेकिन उनकी जान और सुरक्षा के खतरे को देखते हुए वहां आना ठीक नहीं होगा। इसके जवाब में ईरान ने टूर्नामेंट के बहिष्कार की धमकी दी और फीफा से मांग की कि उनके मैच मेक्सिको में शिफ्ट कराए जाएं, जिसे फीफा ने ठुकरा दिया।
 

प्रशंसकों का विरोध और 'झंडे' वाला प्रदर्शन: ईरानी प्रवासियों ने टीम का यह कहते हुए विरोध किया कि यह टीम देश की नहीं बल्कि वहां के विशेष दस्ते- ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) का प्रतिनिधित्व करती है। फीफा ने स्टेडियमों में ईरान की इस्लामिक क्रांति से पहले वाले 'शेर और सूरज' वाले झंडे पर प्रतिबंध लगा दिए, लेकिन इसके बावजूद कई प्रशंसक इसे लेकर स्टेडियम पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। इसके साथ ही, न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच में गोल के बाद ईरानी खिलाड़ी मोहम्मद मोहेबी ने बंदूक चलाने का इशारा किया, जिसे राजनीतिक संदेश माना गया और बड़ा विवाद खड़ा हुआ।

प्राइड मैच पर विवाद: सिएटल में स्थानीय आयोजकों ने ईरान बनाम मिस्र के मैच को एलजीबीटीक्यू+ अधिकारों के समर्थन में प्राइड मैच घोषित कर दिया। ईरान और मिस्र दोनों ने इसका कड़ा विरोध किया, क्योंकि दोनों देशों में समलैंगिकता गैर-कानूनी है। ईरान ने स्टेडियम में प्राइड झंडों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की, जिसे खारिज कर दिया गया।

ईरान के बाहर होने पर विवादित बयान: मिस्र के खिलाफ ईरान के इंजरी-टाइम में हुए एक विवादास्पद विजयी गोल से ईरान की टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई। ईरान के बाहर होने के बाद, अमेरिकी गृह मंत्री- मार्कवेन मुलिन ने खुशी जताई और सार्वजनिक तौर पर कहा कि वह उनके बाहर होने और उनके वीजा रद्द किए जाने से बहुत खुश हैं।

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अमेरिकी गृह मंत्री मार्कवेन मुलिन के बयान पर विवाद। - फोटो : अमर उजाला

विवाद-6: विश्व कप के टिकटों को लेकर विवाद

डायनेमिक प्राइसिंग और जबरदस्त कीमतें: फीफा ने इस विश्व कप में पहली बार डायनेमिक प्राइसिंग (मांग के मुताबिक कीमत तय करने) की प्रणाली लागू की। इसके कारण टिकटों के दाम आसमान छू गए और मेटलाइफ स्टेडियम में होने वाले फाइनल मैच के टिकट की शुरुआती उच्च कीमत 8,680 डॉलर से बढ़ते-बढ़ते 11,000 अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई। 

रीसेल प्लेटफॉर्म्स पर भारी मुनाफाखोरी: फीफा ने प्रशंसकों को अपने खरीदे गए टिकट मूल कीमत से अधिक दाम पर बेचने की अनुमति दी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, फाइनल का एक टिकट आधिकारिक रीसेल प्लेटफॉर्म पर 1.15 करोड़ डॉलर (लगभग 1.97 करोड़ रुपये) तक में लिस्ट किया गया था। फीफा की कड़ी आलोचना इसलिए हुई क्योंकि वह इन रीसेल ट्रांजेक्शन पर बेचने और खरीदने वाले, दोनों से 15% का भारी कमीशन वसूलता है।

स्टेडियम में खाली सीटें: टिकट इतने महंगे थे कि टूर्नामेंट के कई शुरुआती मैचों, जैसे कनाडा के ओपनिंग मैच में हजारों सीटें खाली देखी गईं। नीदरलैंड बनाम जापान मैच में तो फीफा को खाली पड़ी लग्जरी सीटों को भरने के लिए मैच शुरू होने के 10 मिनट बाद वहां वॉलंटियर्स को बैठाना पड़ा।

कानूनी जांच और राजनीतिक विरोध: टिकटों के दाम कृत्रिम रूप से बढ़ाने और प्रशंसकों को गुमराह करने के आरोपों पर न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, टेक्सास और कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल ने फीफा के खिलाफ आधिकारिक जांच शुरू कर दी है। न्यूयॉर्क के मेयर और अमेरिकी हाउस डेमोक्रेट्स ने भी फीफा से दाम कम करने की मांग की। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी फीस पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह ओपनिंग मैच देखने के लिए एक हजार डॉलर कभी नहीं देंगे।

खिलाड़ियों की नाराजगी और फीफा का बचाव: अमेरिकी मिडफील्डर टिमोथी वीह ने टिकटों को बहुत महंगा बताया। हालांकि, अमेरिकी कोच मॉरिसियो पोचेटिनो ने कीमतों का बचाव किया, जिससे प्रशंसक भड़क गए। भारी विरोध के बावजूद, फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने टिकट की कीमतों का यह कहकर बचाव किया कि उन्हें बाजार की दरों के हिसाब से चलना पड़ा। 

टिकटिंग कंपनियों को लेकर विवाद: रीसेल कंपनी स्टब-हब ने मैच से ठीक पहले कई प्रशंसकों के हफ्तों पहले खरीदे गए टिकट रद्द कर दिए। प्रशंसकों को वैकल्पिक टिकट या पैसे वापस करने के बजाय 'स्टोर क्रेडिट' दे दिया गया, जिसके चलते कंपनी पर एक क्लास-एक्शन मुकदमा दायर किया गया है। इसके अलावा, 'टिकटमैट्रिक्स एलएलसी नामक कंपनी ने वर्ल्ड कप के आधिकारिक हॉस्पिटैलिटी पैकेज प्रदाता 'ऑन लोकेशन इवेंट्स' पर उनके टिकटिंग सॉफ्टवेयर के पेटेंट का उल्लंघन करने का संघीय मुकदमा भी दर्ज कराया है।

विवाद-7: मेक्सिको में मेहमान टीमों को परेशान करना

लातिन अमेरिकी फुटबॉल में होटल सेरेनेड एक विवादित परंपरा है, जिसका मकसद रात के समय विपक्षी टीम के होटल के बाहर भारी शोर मचाकर खिलाड़ियों की नींद और मैच की तैयारी में खलल डालना होता है। 2026 फीफा विश्व कप के दौरान मेक्सिको में यह विवाद मुख्य रूप से दो मैचों से पहले सामने आया।

मेक्सिको बनाम इक्वाडोर: राउंड ऑफ 32 मैच से पहले मैक्सिकन प्रशंसकों ने मेक्सिको सिटी में इक्वाडोर की टीम के होटल के बाहर रात में डेरा डाल लिया। उन्होंने खिलाड़ियों की नींद खराब करने के लिए हॉर्न, लाउडस्पीकर और मोटरसाइकिलों का भारी इस्तेमाल किया। इसके जवाब में, इक्वाडोरियन फुटबॉल महासंघ ने विश्व कप आयोजकों के पास एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें कहा गया कि यह व्यवहार खेल भावना के सिद्धांतों के खिलाफ है और इससे खिलाड़ियों की रिकवरी प्रभावित होती है।

मेक्सिको बनाम इंग्लैंड: इंग्लैंड के खिलाफ राउंड ऑफ 16 मैच से पहले भी इसी तरह की घटना हुई। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद, मेक्सिकन प्रशंसकों ने इंग्लैंड टीम के होटल के बाहर पूरी रात हॉर्न, लाउडस्पीकर और आतिशबाजी का इस्तेमाल करके सेरेनेड किया। इन हरकतों से बचने और अपनी नींद पूरी करने के लिए इंग्लैंड की टीम को अपने होटल की लोकेशन गुप्त रखनी पड़ी और खिलाड़ियों को ईयरप्लग, नींद की दवाओं और व्हाइट नॉइज मशीनों का सहारा लेना पड़ा।

विवाद-8: पराग्वे की सांसद की एमबापे पर आपत्तिजनक टिप्पणी

2026 फीफा विश्व कप में फ्रांस और पराग्वे के मैच के बाद फ्रांसीसी स्टार खिलाड़ी किलियन एमबापे और पराग्वे की सांसद (सीनेटर) सेलेस्टे अमरीला के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जिसने नस्लवाद का रूप ले लिया। 

विवाद की शुरुआत: यह विवाद तब शुरू हुआ जब सीनेटर सेलेस्टे अमरीला ने आरोप लगाया कि फ्रांस की 1-0 की जीत के बाद एमबापे ने पराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया और उनके सामने चिल्लाए। इस घटना को पराग्वे का अपमान बताते हुए अमरीला ने सोशल मीडिया पर एमबापे की पृष्ठभूमि और शिक्षा का मजाक उड़ाते हुए नस्लवादी टिप्पणियां कीं। उन्होंने पराग्वे की सीनेट (संसद के उच्च सदन) में सरेआम एमबापे के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया।

अमरीला ने अपना एक पोस्ट हटा लिया, लेकिन उन्होंने एम्बाप्पे से माफी की मांग की। उन्होंने एमबापे को चेतावनी देते हुए 2020 में ब्राजीलियाई स्टार 'रोनाल्डिन्हो' के पराग्वे में जेल जाने का उदाहरण दिया और कहा, "पराग्वेवासियों से पंगा मत लो, एमबापे... मुझे कम मत आंकना, मैं तुम पर मुकदमा कर सकती हूं।"

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पराग्वे की सांसद की आपत्तिजनक टिप्पणी पर फ्रांस के किलियन एमबापे का पलटवार। - फोटो : अमर उजाला
फ्रांस की कानूनी कार्रवाई की तैयारी: फ्रेंच फुटबॉल फेडरेशन (एफएफएफ) ने अमरीला की टिप्पणियों को नस्लवादी करार दिया और फ्रांसीसी अभियोजकों के पास आपराधिक शिकायत दर्ज कराई। फ्रांसीसी अधिकारियों ने इसकी जांच शुरू कर दी है, जिसमें दोषी पाए जाने पर एक साल तक की जेल और 45,000 यूरो के जुर्माने का प्रावधान है।
 
वैश्विक और कूटनीतिक निंदा: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय और एमबापे के क्लब रियाल मैड्रि  ने इन नस्लवादी बयानों की कड़ी निंदा की । वहीं, पराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेना और उनकी सरकार ने अमरीला के बयानों की निंदा करते हुए स्पष्ट किया कि ये उनकी व्यक्तिगत टिप्पणियां हैं और पराग्वे देश या सरकार के मूल्यों का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं।
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