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FIFA: अर्जेंटीना के इस पूर्व कप्तान का हुआ निधन, दो बार फीफा विश्व कप में लिया था हिस्सा; फुटबॉल जगत में शोक

Sun, 12 Jul 2026 12:09 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ब्यूनस आयर्स
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ब्यूनस आयर्स Published by: शोभित चतुर्वेदी Updated Sun, 12 Jul 2026 12:09 PM IST
सार

फीफा विश्व कप 2026 के खुमार के बीच फुटबॉल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। अर्जेंटीना के पूर्व कप्तान एंटोनियो उबाल्डो रैटीन का 89 साल की उम्र में निधन हो गया है। रैटीन ने दो बार फीफा विश्व कप में हिस्सा लिया था। 

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Argentina great and former captain Antonio Rattin dies know football carrer and stats
एंटोनियो उबाल्डो रैटीन - फोटो : IANS

विस्तार

अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर और पूर्व कप्तान एंटोनियो उबाल्डो रैटीन का 89 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन से अर्जेंटीना और विश्व फुटबॉल जगत में शोक की लहर है। रैटीन की गिनती देश के सबसे बेहतरीन मिडफील्डरों और कप्तानों में की जाती थी। उन्होंने 1959 से 1969 तक अर्जेंटीना की राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व किया और 1962 तथा 1966 के फीफा विश्व कप में भी हिस्सा लिया।  
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अर्जेंटीना फुटबॉल संघ ने जताया शोक
अर्जेंटीना फुटबॉल संघ (एएफए) ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया है। एएफए ने एक बयान में कहा, अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन अपने अध्यक्ष क्लाउडियो तापिया के जरिए एंटोनियो उबाल्डो रैटीन के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करता है। वे अर्जेंटीना की राष्ट्रीय टीम के इतिहास के सबसे बड़े प्रतीकों में से एक और अर्जेंटीना फुटबॉल के आइकन थे, जिनका 89 साल की उम्र में निधन हो गया।
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जब गुस्से में मरोड़ दिया था ब्रिटेन का झंडा
रैटीन 1966 में इंग्लैंड में हुए विश्व कप में अर्जेंटीना के कप्तान थे और एक ऐसी घटना के मुख्य पात्र थे जो हमेशा के लिए विश्व फुटबॉल की यादों में बस गई। मेजबान देश के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मैच में उन्हें जर्मन रेफरी रुडोल्फ क्रेटलिन ने मैदान से बाहर भेज दिया था, जबकि उस समय येलो और रेड कार्ड का सिस्टम नहीं था। उन्हें लगा कि उनके साथ अन्याय हुआ है और वे रेफरी का फैसला समझ नहीं पा रहे थे, इसलिए मैदान छोड़ने से पहले रैटीन ने एक अनुवादक की मांग की। उनके मैदान से न हटने के कारण एक ऐतिहासिक दृश्य बना: वे महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के लिए आरक्षित रेड कार्पेट पर बैठ गए और स्टेडियम से निकलने से पहले उन्होंने ब्रिटिश झंडे को मरोड़ दिया। उस घटना का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतना असर हुआ कि कुछ साल बाद 1970 के विश्व कप में फीफा ने रेफरी की पेनल्टी या सजा को पहचानने के लिए आधिकारिक तौर पर कार्ड सिस्टम लागू किया।

रैटीन सिर्फ एक यादगार घटना से कहीं ज्यादा थे। वे फुटबॉलरों की उस पीढ़ी के प्रतीक थे जो राष्ट्रीय टीम की जर्सी को पूरी प्रतिबद्धता मानती थी, जहां नेतृत्व मिसाल कायम करके, त्याग करके और देश का प्रतिनिधित्व करने के गर्व के साथ किया जाता था। बयान में आगे कहा, रैटीन के निधन के साथ अर्जेंटीना की राष्ट्रीय टीम के इतिहास के सबसे महान कप्तानों में से एक हमारे बीच नहीं रहे। एक ऐसा फुटबॉलर जिसने अपने स्वभाव को अपनी पहचान बनाया और विश्व फुटबॉल की यादों पर एक अमिट छाप छोड़ी। अर्जेंटीना फुटबॉल संघ के इतिहास में और उन सभी लोगों की यादों में उनकी विरासत हमेशा बनी रहेगी जो यह समझते हैं कि अर्जेंटीना की जर्सी पहनने का मतलब सिर्फ मैच खेलना नहीं बल्कि पूरे देश का प्रतिनिधित्व करना है। एंटोनियो रैटीन इन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल रहे।
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रैटीन का करियर
रैटीन ने अपना पूरा करियर ब्यूनस आयर्स के क्लब बोका जूनियर्स के साथ बिताया और 1956 से 1970 के बीच 382 मैच खेले, जिसमें उन्होंने 28 गोल किए। इस दौरान चार लीग खिताब जीते और 1963 में कोपा लिबर्टाडोरेस के फाइनल तक पहुंचे। खिलाड़ी के तौर पर रिटायर होने के बाद रैटीन ने राजनीति में आने से पहले कुछ समय के लिए बोका के कोच के तौर पर भी काम किया।
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