Norway vs England: क्या स्पाइडरकैम की वजह से हारा नॉर्वे? इंग्लैंड की जीत के बाद क्यों मच रहा बवाल? पूरा मामला
इंग्लैंड ने अतिरिक्त समय में नॉर्वे को 2-1 से हराकर फीफा विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में जगह बना ली, लेकिन मैच के बाद सबसे ज्यादा चर्चा स्पाइडरकैम विवाद की रही। नॉर्वे का आरोप है कि इंग्लैंड के बराबरी वाले गोल से पहले गेंद स्पाइडरकैम से टकराई थी, जबकि फीफा और VAR ने इसे खारिज कर दिया।
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विस्तार
फीफा विश्व कप 2026 के क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड ने अतिरिक्त समय में नॉर्वे को 2-1 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली। हालांकि मैच खत्म होने के बाद चर्चा इंग्लैंड की जीत से ज्यादा एक विवादित घटना की रही। नॉर्वे के खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ ने आरोप लगाया कि इंग्लैंड के बराबरी के गोल से पहले गेंद स्टेडियम में लगी स्पाइडरकैम से टकराई थी। उनका कहना था कि नियमों के अनुसार खेल रोक दिया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और इंग्लैंड ने उसी मूव पर गोल दाग दिया।
पहले हाफ के इंजरी टाइम में नॉर्वे 1-0 से आगे था। गोलकीपर ऑरजान नायलैंड ने लंबा क्लीयरेंस किया। इसी दौरान ऐसा लगा कि गेंद मैदान के ऊपर लगी फीफा की स्पाइडरकैम प्रणाली से टकराई और अपनी दिशा बदलते हुए इंग्लैंड के इलियट एंडरसन के पास पहुंच गई।
एंडरसन ने तुरंत आक्रमण शुरू किया। उन्होंने गेंद एंथनी गॉर्डन को दी, जिन्होंने शानदार पास जूड बेलिंगहम के लिए छोड़ा। बेलिंगहम ने बेहतरीन नियंत्रण दिखाते हुए डिफेंडर टॉरब्योर्न हेगम को छकाया और शांत अंदाज में गोल कर स्कोर 1-1 कर दिया।
गोल होते ही नॉर्वे के खिलाड़ी और कोचिंग स्टाफ रेफरी क्लेमेंट टर्पिन के पास पहुंच गए। वे लगातार दावा करते रहे कि गेंद स्पाइडरकैम से टकराई थी, इसलिए खेल तुरंत रोक दिया जाना चाहिए था। हाफ टाइम के दौरान नॉर्वे के मुख्य कोच स्टाले सोलबाक्केन भी काफी नाराज दिखाई दिए। टीवी कैमरों में वह मैदान छोड़ते समय गुस्से में नजर आए, जबकि टीम के अन्य सदस्य भी स्पाइडरकैम की ओर इशारा करते हुए विरोध जताते रहे।
फुटबॉल के नियमों के अनुसार यदि खेल के दौरान गेंद किसी बाहरी वस्तु, जैसे स्पाइडरकैम, से टकराती है तो रेफरी को तुरंत खेल रोकना चाहिए। इसके बाद ड्रॉप बॉल के जरिए खेल दोबारा शुरू कराया जाता है। यही नियम नॉर्वे की आपत्ति का आधार बना।
फीफा और VAR ने क्या कहा?
हालांकि फीफा से जुड़े सूत्रों का कहना था कि VAR टीम को ऐसा कोई स्पष्ट सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि गेंद वास्तव में स्पाइडरकैम से टकराई थी। टूर्नामेंट में इस्तेमाल किए जा रहे सेंसरों ने भी किसी तरह का संपर्क दर्ज नहीं किया। इसी वजह से VAR ने गोल को वैध माना और रेफरी के फैसले में कोई बदलाव नहीं किया।
विवादित बराबरी के गोल के बाद मैच का रुख पूरी तरह बदल गया। अतिरिक्त समय शुरू होने के सिर्फ तीन मिनट बाद मॉर्गन रोजर्स के शक्तिशाली शॉट को गोलकीपर ऑरजान नायलैंड पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सके। रीबाउंड पर सबसे पहले जूड बेलिंगहम पहुंचे और गेंद को गोल में भेजते हुए इंग्लैंड को 2-1 की बढ़त दिला दी।
एक और VAR विवाद भी हुआ
अतिरिक्त समय में इंग्लैंड को एक और विवादित क्षण का सामना करना पड़ा। डेजेड स्पेंस के गिरने पर रेफरी ने पहले पेनाल्टी दे दी थी। हालांकि VAR की सलाह पर क्लेमेंट टर्पिन ने मॉनिटर पर घटना दोबारा देखी और अपना फैसला बदल दिया। उन्होंने माना कि स्पेंस ने ही पहले संपर्क शुरू किया था, इसलिए पेनाल्टी रद्द कर दी गई।
इन सभी विवादों के बावजूद इंग्लैंड ने अंतिम सीटी तक अपनी बढ़त बरकरार रखी और 2-1 से मुकाबला जीतकर सेमीफाइनल में जगह बना ली। अब थ्री लायंस का सामना अर्जेंटीना से होगा, जबकि नॉर्वे का ऐतिहासिक अभियान अंतिम आठ में समाप्त हो गया।