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फीफा में घमासान: इनफैनटिनो की कुर्सी पर क्यों मंडराया खतरा? UEFA समेत तीन महासंघों ने की स्वतंत्र जांच की मांग

Mon, 10 Aug 2026 05:29 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लंदन
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: स्वप्निल शशांक Updated Mon, 10 Aug 2026 05:29 PM IST
सार

वर्ल्ड कप की व्यावसायिक हिस्सेदारी से जुड़ी फीफा की विवादित योजना ने जियानी इनफैनटिनो के नेतृत्व के खिलाफ बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। UEFA, AFC और Concacaf ने संयुक्त रूप से फीफा पर भरोसा तोड़ने का आरोप लगाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है। तीनों महासंघों ने विवाद को सिर्फ संचार की गलती मानने से इनकार किया है। हालांकि, इनफैनटिनोको CONMEBOL और अफ्रीकी फुटबॉल परिसंघ समेत कई शक्तिशाली महासंघों का समर्थन हासिल है। मार्च 2027 के फीफा अध्यक्ष चुनाव से पहले यह टकराव विश्व फुटबॉल की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है।

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FIFA Crisis Deepens as UEFA, AFC and Concacaf Demand Independent Review of Infantino's Leadership
गियानी इनफैनटिनो - फोटो : Twitter

विस्तार

विश्व फुटबॉल में फीफा अध्यक्ष जियानी इनफैनटिनो की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। फीफा के वर्ल्ड कप से जुड़ी व्यावसायिक हिस्सेदारी बेचने के विवाद ने अब बड़े संकट का रूप ले लिया है। यूरोपीय फुटबॉल संघ (UEFA), एशियाई फुटबॉल संघ (AFC) और कॉनकाकाफ (Concacaf) ने संयुक्त रूप से फीफा नेतृत्व पर फुटबॉल समुदाय का भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया है। तीनों महासंघों ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
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सोमवार को जारी एक ओपन लेटर में तीनों महासंघों ने इनफैनटिनो और उनके प्रशासन के फैसले लेने के तरीके पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने फीफा की उस सफाई को भी खारिज कर दिया, जिसमें पूरे विवाद को संचार की विफलता बताया गया था।
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'यह सिर्फ संवाद की समस्या नहीं, खेल की ईमानदारी का सवाल'
यूएफा, एएफसी और कॉनकाकाफ ने कहा कि विवाद को केवल संचार की गलती बताना मामले की गंभीरता को कम करके आंकना है। तीनों महासंघों ने अपने पत्र में कहा, 'यह कुछ और बुनियादी चीजों के बारे में है: खेल की ईमानदारी और उन लोगों की ईमानदारी के बारे में, जिन्हें इसका नेतृत्व करने के लिए चुना गया है।' महासंघों ने फीफा की ओर से प्रस्ताव की आंतरिक समीक्षा किए जाने पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि जांच पूरी तरह स्वतंत्र किसी तीसरे पक्ष से कराई जानी चाहिए और फीफा प्रशासन को इसकी प्रक्रिया से दूर रखा जाना चाहिए।

किस प्रस्ताव ने मचाया इतना बवाल?
 
  • विवाद की शुरुआत फीफा के एक नए व्यावसायिक संस्थान फीफा फॉरवर्ड एंटरप्राइज बनाने के प्रस्ताव से हुई। इसके जरिए बाहरी निवेशकों को संस्था में छोटी हिस्सेदारी बेचने की योजना थी। यह हिस्सेदारी वर्ल्ड कप की व्यावसायिक कीमत से जुड़ी हुई थी।
  • तीनों महासंघों का आरोप है कि प्रस्ताव को बेहद कम समय में आगे बढ़ाया गया और फीफा की सदस्य संस्थाओं को इसके विवरण पर विचार करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उन्होंने फीफा की उस दलील पर भी निशाना साधा, जिसमें इसे संवाद की कमी बताया गया था।
  • पत्र में कहा गया, 'फीफा के हालिया पत्र में माना गया है कि प्रक्रिया में गलतियां हुईं। इसमें इसे संवाद की विफलता बताया गया है, जबकि फुटबॉल ने जो देखा, वह निर्णय क्षमता की विफलता थी।' महासंघों ने साफ किया कि उनकी आपत्ति पैसे या फुटबॉल में संसाधनों के वितरण को लेकर नहीं है।
  • उन्होंने कहा, 'यह पैसे के बारे में नहीं है।' साथ ही बताया कि वे पहले ही फीफा से मौजूदा रिजर्व का इस्तेमाल कर फुटबॉल विकास में निवेश बढ़ाने की मांग कर चुके हैं।
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‘भरोसे का मूलभूत उल्लंघन’
फीफा ने आखिरकार विवादित प्रस्ताव वापस ले लिया, लेकिन यूएफा, एएफसी और कॉनकाकाफ का मानना है कि सिर्फ प्रस्ताव वापस लेना पर्याप्त नहीं है। तीनों महासंघों ने मोरक्को में हुई एक बैठक का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, उस बैठक में सिर्फ एक निर्वाचित फीफा अधिकारी मौजूद था। फीफा परिषद के सदस्यों या सदस्य संघों को आमंत्रित नहीं किया गया था और प्रबंधन समिति के चुनिंदा लोग ही बैठक में शामिल हुए थे।

महासंघों ने इस प्रक्रिया को 'निर्णय क्षमता की गहरी विफलता' और 'भरोसे का मूलभूत उल्लंघन' बताया। उन्होंने कहा, 'जहां जवाबदेही होनी चाहिए, वहां खामोशी है; जहां खुलेपन की जरूरत है, वहां दूरी है।' महासंघों ने सभी संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने तथा स्वतंत्र जांच की मांग की है।

फीफा ने भी इनफैनटिनो का किया बचाव
 
  • दूसरी ओर, फीफा ने इनफैनटिनो के खिलाफ बढ़ते दबाव को एक सोची-समझी मुहिम बताया है। फीफा ने कहा कि 211 सदस्य संघों का समर्थन अब भी इनफैनटिनो के पास है और राष्ट्रपति के खिलाफ किसी भी चुनौती को फीफा के नियमों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ना होगा।
  • इनफैनटिनो के कार्यकाल को लेकर यूएफा में उनके पिछले कार्यकाल से जुड़े कुछ मामलों पर भी सवाल उठ रहे हैं। इनमें एक पूर्व महिला कर्मचारी को दिए गए सेवरेंस भुगतान की रिपोर्ट भी शामिल है। यूएफा ने पुष्टि की कि भुगतान किया गया था और उस समय लागू नियमों के अनुसार वह सही था। हालांकि, बाद में उन नियमों को और सख्त किया गया। इनफैनटिनो ने रिश्ते की प्रकृति को लेकर लगाए गए आरोपों को जोरदार तरीके से खारिज किया है।

मार्च 2027 चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक चुनौती
इनफैनटिनो के लिए राहत की बात यह है कि उन्हें अब भी कई शक्तिशाली फुटबॉल महासंघों का समर्थन हासिल है। कॉनमेबोल (CONMEBOL) और अफ्रीकी फुटबॉल परिसंघ ने उनका समर्थन किया है। अफ्रीकी परिसंघ ने सर्वसम्मति से इनफैनटिनो के समर्थन का एलान किया है। मैक्सिको भी कॉनकाकाफ के रुख से अलग होकर इनफैनटिनो के समर्थन में खड़ा है। अर्जेंटीना भी उनके समर्थक देशों में शामिल है।

ऐसे में मार्च 2027 में होने वाले फीफा अध्यक्ष चुनाव से पहले फुटबॉल की राजनीति दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। यूएफा, एएफसी और कॉनकाकाफ ने अपना विरोध सार्वजनिक कर दिया है, जबकि इनफैनटिनो के समर्थक महासंघ उनके साथ खड़े हैं। अब देखना होगा कि यह विवाद केवल शासन व्यवस्था की समीक्षा तक सीमित रहता है या फीफा अध्यक्ष के भविष्य पर भी इसका असर पड़ता है।
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