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Argentina Road To Final: अर्जेंटीना का विश्वकप फाइनल तक का सफर; 4 नॉकआउट मैचों में आखिरी मिनटों में पलटी बाजी
Fri, 17 Jul 2026 04:12 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Fri, 17 Jul 2026 04:12 PM IST
सार
ग्रुप चरण में तीनों मैच जीतकर नॉकआउट में पहुंची अर्जेंटीना का विश्व कप 2026 का सफर आसान नहीं रहा। राउंड ऑफ-32 से लेकर सेमीफाइनल तक टीम ने कई मुकाबलों में पिछड़ने के बाद वापसी की। खास बात यह रही कि चार नॉकआउट मैचों में से तीन में जीत का फैसला आखिरी 20 मिनट या अतिरिक्त समय में हुआ। कप्तान लियोनल मेसी के रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन और टीम की दबाव झेलने की क्षमता ने मौजूदा चैंपियन को लगातार दूसरे विश्व कप फाइनल तक पहुंचा दिया, जहां अब उसका सामना यूरोपीय चैंपियन स्पेन से होगा।
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अर्जेंटीना टीम
- फोटो : FIFA.Com
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विस्तार
फीफा विश्व कप 2026 में अर्जेंटीना ने सिर्फ मैच नहीं जीते, बल्कि कई ऐसे मुकाबले अपने नाम किए जिनमें हार लगभग तय नजर आ रही थी। लियोनल स्कालोनी की टीम ने ग्रुप चरण में तो दबदबे के साथ प्रदर्शन किया, लेकिन असली परीक्षा नॉकआउट में हुई। वहां अर्जेंटीना ने बार-बार साबित किया कि यह टीम आखिरी मिनट तक हार नहीं मानती।
अब मौजूदा विश्व चैंपियन लगातार दूसरे खिताब की तलाश में फाइनल में पहुंच चुका है, जहां उसका मुकाबला यूरोपीय चैंपियन स्पेन से होगा। दिलचस्प बात यह है कि अर्जेंटीना टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा गोल करने वाली टीम बनकर फाइनल में पहुंची है, जबकि स्पेन ने अब तक सबसे मजबूत डिफेंस का प्रदर्शन किया है। अर्जेंटीना अगर विश्वकप जीतती है तो 64 साल में लगातार दो विश्वकप जीतने वाली पहली टीम बनेगी। इससे पहले ऐसा 1934 और 1938 में इटली ने और 1958 और 1962 में ब्राजील ने किया था।
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अब मौजूदा विश्व चैंपियन लगातार दूसरे खिताब की तलाश में फाइनल में पहुंच चुका है, जहां उसका मुकाबला यूरोपीय चैंपियन स्पेन से होगा। दिलचस्प बात यह है कि अर्जेंटीना टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा गोल करने वाली टीम बनकर फाइनल में पहुंची है, जबकि स्पेन ने अब तक सबसे मजबूत डिफेंस का प्रदर्शन किया है। अर्जेंटीना अगर विश्वकप जीतती है तो 64 साल में लगातार दो विश्वकप जीतने वाली पहली टीम बनेगी। इससे पहले ऐसा 1934 और 1938 में इटली ने और 1958 और 1962 में ब्राजील ने किया था।
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ग्रुप चरण में मेसी का रिकॉर्ड और अर्जेंटीना का दबदबा
- अर्जेंटीना ने अपने अभियान की शुरुआत अल्जीरिया पर 3-0 की जीत से की। यह मुकाबला लियोनल मेसी का 200वां अंतरराष्ट्रीय मैच था और उन्होंने हैट्रिक लगाकर विश्वकप में मिरोस्लाव क्लोज के 16 गोल के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली।
- दूसरे मैच में ऑस्ट्रिया के खिलाफ मेसी ने शुरुआती पेनल्टी गंवाई, लेकिन उसके बाद दो शानदार गोल कर टीम को 2-0 से जीत दिलाई। इसी मुकाबले में वह विश्व कप फाइनल्स के इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी भी बन गए।
- जॉर्डन के खिलाफ तीसरे मुकाबले में स्कालोनी ने मेसी को बेंच पर रखा। जियोवानी लो सेल्सो और लॉटारो मार्टिनेज ने बढ़त दिलाई, जबकि मेसी ने मैदान पर उतरने के बाद शानदार फ्री-किक गोल कर 3-1 की जीत सुनिश्चित की। अर्जेंटीना ने ग्रुप-जे में तीनों मैच जीतकर नॉकआउट में प्रवेश किया।
नॉकआउट में शुरू हुई असली परीक्षा
- राउंड ऑफ-32 में विश्व कप की पहली बार खेल रही केप वर्डे ने अर्जेंटीना को कड़ी चुनौती दी। मेसी और लिसांद्रो मार्टिनेज के गोल के बावजूद केप वर्डे ने दो बार बराबरी की। मुकाबला अतिरिक्त समय तक पहुंचा, जहां 111वें मिनट में मेसी के कॉर्नर पर डिने बोर्गेस के आत्मघाती गोल ने अर्जेंटीना को 3-2 से जीत दिलाई।
- राउंड ऑफ-16 में मिस्र के खिलाफ मुकाबला और भी नाटकीय रहा। 67वें मिनट तक अर्जेंटीना 0-2 से पीछे था। इसके बाद क्रिस्टियनो रोमेरो ने पहला गोल किया और मेसी ने बराबरी दिला दी। अतिरिक्त समय में एंजो फर्नांडीज के हेडर ने 3-2 की अविश्वसनीय जीत दिलाकर टीम को क्वार्टर फाइनल में पहुंचा दिया।
स्विट्जरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ भी दिखाई मानसिक मजबूती
- क्वार्टर फाइनल में स्विट्जरलैंड ने अर्जेंटीना को कड़ी टक्कर दी। एलेक्सिस मैक एलिस्टर ने बढ़त दिलाई, लेकिन डैन एनडोए ने बराबरी कर दी। इसके बाद स्विट्जरलैंड के ब्रेल एम्बोलो को रेड कार्ड मिला और अतिरिक्त समय में जूलियन अल्वारेज और लौटारो मार्टिनेज के गोल से अर्जेंटीना ने 3-1 से जीत दर्ज कर ली।
- सेमीफाइनल में इंग्लैंड ने एंथनी गॉर्डन के गोल से बढ़त बनाई और लंबे समय तक उसे बनाए रखा। लेकिन 85वें मिनट में एंजो फर्नांडीज ने बराबरी कर दी। अर्जेंटीना ने दबाव बनाए रखा और 90+2वें मिनट में लौटारो मार्टिनेज ने विजयी हेडर लगाकर टीम को लगातार दूसरे विश्व कप फाइनल में पहुंचा दिया।
आंकड़े बताते हैं कि अर्जेंटीना क्यों सबसे खतरनाक टीम है
अगर अर्जेंटीना के पूरे अभियान का विश्लेषण करें तो उसकी सबसे बड़ी ताकत सिर्फ मेसी नहीं, बल्कि आखिरी मिनट तक लड़ने का जज्बा रहा है।
यानी अर्जेंटीना की सबसे बड़ी पहचान अब सिर्फ आक्रामक फुटबॉल नहीं, बल्कि दबाव में धैर्य बनाए रखना और आखिरी सीटी तक मुकाबला जीवित रखना बन चुकी है।
अगर अर्जेंटीना के पूरे अभियान का विश्लेषण करें तो उसकी सबसे बड़ी ताकत सिर्फ मेसी नहीं, बल्कि आखिरी मिनट तक लड़ने का जज्बा रहा है।
- सात में से चार मुकाबलों में टीम ने 70वें मिनट के बाद या अतिरिक्त समय में निर्णायक गोल किए।
- नॉकआउट चरण के चारों मैचों में अर्जेंटीना को संघर्ष करना पड़ा।
- इनमें से तीन मुकाबलों (केप वर्डे, मिस्र और इंग्लैंड) में टीम या तो बराबरी की स्थिति में नहीं थी या हार के बेहद करीब पहुंच चुकी थी, लेकिन फिर भी जीत दर्ज की।
- दो मुकाबले (केप वर्डे और स्विट्जरलैंड) अतिरिक्त समय तक गए और दोनों में अर्जेंटीना विजेता बनी।
- मिस्र और इंग्लैंड के खिलाफ जीत पूरी तरह आखिरी 20 मिनट और इंजरी टाइम में तय हुई।
यानी अर्जेंटीना की सबसे बड़ी पहचान अब सिर्फ आक्रामक फुटबॉल नहीं, बल्कि दबाव में धैर्य बनाए रखना और आखिरी सीटी तक मुकाबला जीवित रखना बन चुकी है।
अब सबसे बड़ी चुनौती स्पेन
फाइनल में अर्जेंटीना के सामने स्पेन की मजबूत दीवार होगी। जहां अर्जेंटीना टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा गोल करने वाली टीम रही है, वहीं स्पेन ने पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ एक गोल खाया है। एक ओर मेसी, लौटारो मार्टिनेज, जूलियन अल्वारेज और एंजो फर्नांडीज जैसे मैच विनर हैं, तो दूसरी तरफ स्पेन का अनुशासित डिफेंस और पजेशन आधारित खेल।
अगर अर्जेंटीना को लगातार दूसरा विश्व कप जीतना है तो उसे एक बार फिर वही करना होगा, जो उसने पूरे टूर्नामेंट में किया है। दबाव झेलना, सही समय का इंतजार करना और आखिरी मिनटों में मैच अपने पक्ष में मोड़ देना, ये अर्जेंटीना के मजबूत पक्ष रहे हैं। यही वजह है कि स्पेन के सामने सिर्फ मेसी ही नहीं, बल्कि एक ऐसी टीम होगी जिसने पूरे विश्व कप में साबित किया है कि उसके लिए मुकाबला अंतिम सीटी बजने तक खत्म नहीं होता।
फाइनल में अर्जेंटीना के सामने स्पेन की मजबूत दीवार होगी। जहां अर्जेंटीना टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा गोल करने वाली टीम रही है, वहीं स्पेन ने पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ एक गोल खाया है। एक ओर मेसी, लौटारो मार्टिनेज, जूलियन अल्वारेज और एंजो फर्नांडीज जैसे मैच विनर हैं, तो दूसरी तरफ स्पेन का अनुशासित डिफेंस और पजेशन आधारित खेल।
अगर अर्जेंटीना को लगातार दूसरा विश्व कप जीतना है तो उसे एक बार फिर वही करना होगा, जो उसने पूरे टूर्नामेंट में किया है। दबाव झेलना, सही समय का इंतजार करना और आखिरी मिनटों में मैच अपने पक्ष में मोड़ देना, ये अर्जेंटीना के मजबूत पक्ष रहे हैं। यही वजह है कि स्पेन के सामने सिर्फ मेसी ही नहीं, बल्कि एक ऐसी टीम होगी जिसने पूरे विश्व कप में साबित किया है कि उसके लिए मुकाबला अंतिम सीटी बजने तक खत्म नहीं होता।