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FIFA WC: क्या भारत में फैंस नहीं देख पाएंगे फुटबॉल विश्व कप? प्रसारण अधिकार अब तक नहीं बिके, वजह चौंकाने वाली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Swapnil Shashank
Updated Wed, 22 Apr 2026 03:38 PM IST
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सार
फुटबॉल विश्व कप 2026 के भारत में ब्रॉडकास्ट राइट्स अभी तक नहीं बिके हैं, जिसकी वजह ऊंची कीमत, कम विज्ञापन रिटर्न और मैचों की असुविधाजनक टाइमिंग है। जियोस्टार और सोनी जैसे बड़े ब्रॉडकास्टर्स फिलहाल इंतजार की रणनीति अपना रहे हैं, लेकिन उम्मीद है कि टूर्नामेंट से पहले कोई न कोई डील जरूर हो जाएगी।
फीफा विश्वकप 2026
- फोटो : ANI
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विस्तार
फीफा विश्व कप 2026 को शुरू होने में अब 50 दिन का समय बचा है। इस बड़े टूर्नामेंट के करीब आते ही दुनिया भर के फुटबॉल फैंस की उत्सुकता बढ़ती जा रही है, लेकिन भारत में एक बड़ा सवाल अब भी अनसुलझा है। दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मेगा इवेंट के ब्रॉडकास्ट राइट्स यानी प्रसारण अधिकार आखिर अब तक क्यों नहीं बिक पाए हैं?
आमतौर पर इतने बड़े टूर्नामेंट के लिए टीवी और डिजिटल अधिकारों को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है, लेकिन इस बार हालात थोड़े अलग नजर आ रहे हैं। फीफा विश्व कप का आगाज 11 जून से होने जा रहा है। टूर्नामेंट के इतिहास में इस बार सबसे ज्यादा 48 टीमें हिस्सा लेंगी और यह अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की मेजबानी में खेला जाएगा। इस टूर्नामेंट का फाइनल 19 जुलाई को खेला जाएगा।
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आमतौर पर इतने बड़े टूर्नामेंट के लिए टीवी और डिजिटल अधिकारों को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है, लेकिन इस बार हालात थोड़े अलग नजर आ रहे हैं। फीफा विश्व कप का आगाज 11 जून से होने जा रहा है। टूर्नामेंट के इतिहास में इस बार सबसे ज्यादा 48 टीमें हिस्सा लेंगी और यह अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की मेजबानी में खेला जाएगा। इस टूर्नामेंट का फाइनल 19 जुलाई को खेला जाएगा।
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भारतीय फैंस के लिए चिंता की वजह
भारत में फुटबॉल की लोकप्रियता पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। यूरोपीय लीग्स से लेकर वर्ल्ड कप तक, दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ी है। ऐसे में जब फीफा वर्ल्ड कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के प्रसारण को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, तो यह भारतीय फुटबॉल समुदाय के लिए चिंता का विषय बन गया है। इस स्थिति ने उस दौर की याद भी दिला दी है जब इंडियन सुपर लीग के आयोजन को लेकर भी असमंजस पैदा हो गया था, जिससे देश में फुटबॉल कल्चर को झटका लगा था। अगर इस बार भी ब्रॉडकास्ट डील समय पर नहीं होती, तो यह खेल के प्रचार-प्रसार पर असर डाल सकता है।
भारत में फुटबॉल की लोकप्रियता पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। यूरोपीय लीग्स से लेकर वर्ल्ड कप तक, दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ी है। ऐसे में जब फीफा वर्ल्ड कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के प्रसारण को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, तो यह भारतीय फुटबॉल समुदाय के लिए चिंता का विषय बन गया है। इस स्थिति ने उस दौर की याद भी दिला दी है जब इंडियन सुपर लीग के आयोजन को लेकर भी असमंजस पैदा हो गया था, जिससे देश में फुटबॉल कल्चर को झटका लगा था। अगर इस बार भी ब्रॉडकास्ट डील समय पर नहीं होती, तो यह खेल के प्रचार-प्रसार पर असर डाल सकता है।
आखिर क्यों अटकी हुई है डील?
इस पूरे मामले की जड़ में सबसे बड़ा कारण है ब्रॉडकास्टिंग राइट्स की ऊंची कीमत। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फीफा ने भारत के लिए जो कीमत तय की है, वह स्थानीय ब्रॉडकास्टर्स की अपेक्षाओं से काफी ज्यादा है। फीफा ने ब्रॉडकास्टिंग राइट्स की कीमत में भारी कटौती करते हुए लगभग 100 मिलियन डॉलर से घटाकर करीब 35-40 मिलियन डॉलर कर दिया है, फिर भी कोई भी ब्रॉडकास्टर डील के लिए आगे नहीं आया है। सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क और जियोस्टार जैसे बड़े खिलाड़ी इस रेस में जरूर हैं, लेकिन वे फिलहाल पीछे हटे हुए हैं। इससे साफ है कि कम रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI), क्रिकेट पर भारी निवेश, जैसी समस्याएं बड़ी बाधा बनी हुई हैं।
इस पूरे मामले की जड़ में सबसे बड़ा कारण है ब्रॉडकास्टिंग राइट्स की ऊंची कीमत। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फीफा ने भारत के लिए जो कीमत तय की है, वह स्थानीय ब्रॉडकास्टर्स की अपेक्षाओं से काफी ज्यादा है। फीफा ने ब्रॉडकास्टिंग राइट्स की कीमत में भारी कटौती करते हुए लगभग 100 मिलियन डॉलर से घटाकर करीब 35-40 मिलियन डॉलर कर दिया है, फिर भी कोई भी ब्रॉडकास्टर डील के लिए आगे नहीं आया है। सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क और जियोस्टार जैसे बड़े खिलाड़ी इस रेस में जरूर हैं, लेकिन वे फिलहाल पीछे हटे हुए हैं। इससे साफ है कि कम रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI), क्रिकेट पर भारी निवेश, जैसी समस्याएं बड़ी बाधा बनी हुई हैं।
विज्ञापन भी क्रिकेट की तुलना में कम
फुटबॉल में विज्ञापन के मौके क्रिकेट की तुलना में सीमित होते हैं क्योंकि यह एक लगातार चलने वाला खेल है, जिसमें ब्रेक कम होते हैं। इसके अलावा, भारतीय टीम की अनुपस्थिति भी विज्ञापन देने वालों को ज्यादा पैसा लगाने से रोकती है। ऐसे में ब्रॉडकास्टर्स को यह सौदा उतना फायदे का नहीं लग रहा।
फुटबॉल में विज्ञापन के मौके क्रिकेट की तुलना में सीमित होते हैं क्योंकि यह एक लगातार चलने वाला खेल है, जिसमें ब्रेक कम होते हैं। इसके अलावा, भारतीय टीम की अनुपस्थिति भी विज्ञापन देने वालों को ज्यादा पैसा लगाने से रोकती है। ऐसे में ब्रॉडकास्टर्स को यह सौदा उतना फायदे का नहीं लग रहा।
टाइमिंग भी बनी बड़ी समस्या
2026 वर्ल्ड कप अमेरिका महाद्वीप में खेला जाएगा, जिससे मैचों का समय भारतीय दर्शकों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। मुकाबले भारतीय समयानुसार आधी रात से सुबह तक खेले जाएंगे। भले ही कट्टर फुटबॉल फैंस किसी भी समय मैच देखने को तैयार रहते हों, लेकिन नौकरीपेशा लोगों और आम दर्शकों के लिए यह समय सुविधाजनक नहीं है। इसका सीधा असर व्यूअरशिप पर पड़ सकता है, और कम दर्शकों का मतलब है विज्ञापन से कम कमाई। यही कारण है कि ब्रॉडकास्टर्स महंगे राइट्स खरीदने में हिचकिचा रहे हैं।
2026 वर्ल्ड कप अमेरिका महाद्वीप में खेला जाएगा, जिससे मैचों का समय भारतीय दर्शकों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। मुकाबले भारतीय समयानुसार आधी रात से सुबह तक खेले जाएंगे। भले ही कट्टर फुटबॉल फैंस किसी भी समय मैच देखने को तैयार रहते हों, लेकिन नौकरीपेशा लोगों और आम दर्शकों के लिए यह समय सुविधाजनक नहीं है। इसका सीधा असर व्यूअरशिप पर पड़ सकता है, और कम दर्शकों का मतलब है विज्ञापन से कम कमाई। यही कारण है कि ब्रॉडकास्टर्स महंगे राइट्स खरीदने में हिचकिचा रहे हैं।
क्या अपनाई जाएगी 'लेट एंट्री' रणनीति?
इस पूरे मामले में एक दिलचस्प संभावना यह भी है कि ब्रॉडकास्टर्स आखिरी समय तक इंतजार करें। 2022 वर्ल्ड कप के दौरान भी ऐसा ही हुआ था, जब जियोस्टार ने देर से राइट्स खरीदे और मैचों को मुफ्त में स्ट्रीम किया। इस रणनीति से उन्हें कम कीमत पर अधिकार मिल गए और उनके प्लेटफॉर्म पर यूजर्स की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। इस बार भी वैसी ही रणनीति अपनाई जा सकती है, जहां अंतिम समय में डील फाइनल हो।
इस पूरे मामले में एक दिलचस्प संभावना यह भी है कि ब्रॉडकास्टर्स आखिरी समय तक इंतजार करें। 2022 वर्ल्ड कप के दौरान भी ऐसा ही हुआ था, जब जियोस्टार ने देर से राइट्स खरीदे और मैचों को मुफ्त में स्ट्रीम किया। इस रणनीति से उन्हें कम कीमत पर अधिकार मिल गए और उनके प्लेटफॉर्म पर यूजर्स की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। इस बार भी वैसी ही रणनीति अपनाई जा सकती है, जहां अंतिम समय में डील फाइनल हो।
क्या सरकार कर सकती है दखल?
भारत में स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग सिग्नल्स एक्ट के तहत राष्ट्रीय महत्व के खेल आयोजनों को सार्वजनिक प्रसारक के साथ साझा करना जरूरी होता है। हालांकि यह नियम आमतौर पर भारत से जुड़े मैचों पर लागू होता है, लेकिन अगर कोई निजी ब्रॉडकास्टर राइट्स नहीं खरीदता, तो सरकार दूरदर्शन के जरिए प्रसारण सुनिश्चित करने की कोशिश कर सकती है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में भी यह कहा गया है कि, प्रसार भारती इन राइट्स को हासिल करने के विकल्प के रूप में उभरकर सामने आया है।
भारत में स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग सिग्नल्स एक्ट के तहत राष्ट्रीय महत्व के खेल आयोजनों को सार्वजनिक प्रसारक के साथ साझा करना जरूरी होता है। हालांकि यह नियम आमतौर पर भारत से जुड़े मैचों पर लागू होता है, लेकिन अगर कोई निजी ब्रॉडकास्टर राइट्स नहीं खरीदता, तो सरकार दूरदर्शन के जरिए प्रसारण सुनिश्चित करने की कोशिश कर सकती है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में भी यह कहा गया है कि, प्रसार भारती इन राइट्स को हासिल करने के विकल्प के रूप में उभरकर सामने आया है।
क्या फैंस को मिलेगा समाधान?
फिलहाल स्थिति यह है कि भारत में 2026 वर्ल्ड कप देखने के लिए कोई आधिकारिक टीवी चैनल या स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म तय नहीं हुआ है, जिससे फैंस के बीच चिंता बनी हुई है। हालांकि, इतने बड़े टूर्नामेंट के बिना ब्रॉडकास्ट डील के रहने की संभावना बेहद कम है। आमतौर पर ऐसे मामलों में अंततः दोनों पक्ष, यानी फीफा और ब्रॉडकास्टर्स आपसी बातचीत से किसी समझौते पर पहुंच ही जाते हैं। भारतीय फैंस को उम्मीद है कि जल्द ही कोई ठोस फैसला सामने आएगा और उन्हें इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का पूरा आनंद लेने का मौका मिलेगा। फिलहाल, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर यह डील कब और किसके साथ फाइनल होती है।
फिलहाल स्थिति यह है कि भारत में 2026 वर्ल्ड कप देखने के लिए कोई आधिकारिक टीवी चैनल या स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म तय नहीं हुआ है, जिससे फैंस के बीच चिंता बनी हुई है। हालांकि, इतने बड़े टूर्नामेंट के बिना ब्रॉडकास्ट डील के रहने की संभावना बेहद कम है। आमतौर पर ऐसे मामलों में अंततः दोनों पक्ष, यानी फीफा और ब्रॉडकास्टर्स आपसी बातचीत से किसी समझौते पर पहुंच ही जाते हैं। भारतीय फैंस को उम्मीद है कि जल्द ही कोई ठोस फैसला सामने आएगा और उन्हें इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का पूरा आनंद लेने का मौका मिलेगा। फिलहाल, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर यह डील कब और किसके साथ फाइनल होती है।

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