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FIFA WC: क्या सिर्फ टैलेंट से नहीं जीता जा सकता विश्व कप? ओलिवर कान ने बताई जर्मनी की सबसे बड़ी कमी
Wed, 01 Jul 2026 03:02 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Wed, 01 Jul 2026 03:02 PM IST
सार
फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ-32 में पराग्वे से हारकर बाहर होने के बाद जर्मनी के महान गोलकीपर ओलिवर कान ने टीम के प्रदर्शन का आकलन किया। उन्होंने कहा कि प्रतिभा के साथ मजबूत टीम भावना, दबाव झेलने की क्षमता और अनुभव भी जरूरी है। कान ने जर्मनी की तारीफ की, लेकिन माना कि फ्रांस और स्पेन जैसी टीमों से अभी भी उनकी गुणवत्ता थोड़ी कम है।
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ओलिवर कान
- फोटो : IANS
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विस्तार
फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ-32 में पराग्वे के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट में हारकर जर्मनी का सफर खत्म हो गया। इस निराशाजनक प्रदर्शन के बाद जर्मनी के दिग्गज गोलकीपर और पूर्व कप्तान ओलिवर काह्न ने टीम की सबसे बड़ी कमजोरी पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में केवल प्रतिभाशाली खिलाड़ी होना काफी नहीं है।
फ्रांस और स्पेन से अभी भी पीछे है जर्मनी
कान ने माना कि जूलियन नागेल्समैन के नेतृत्व में जर्मनी ने अपनी अलग पहचान बनाई है और टीम में गुणवत्ता भी है, लेकिन दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों से तुलना करने पर अभी भी कमी नजर आती है। उन्होंने कहा, 'जर्मनी ने एक बार फिर दिखाया है कि वह दुनिया की शीर्ष टीमों में शामिल है। टीम के पास गुणवत्ता, रणनीतिक लचीलापन और जूलियन नागेल्समैन के नेतृत्व में स्पष्ट पहचान है। हालांकि, अगर फ्रांस और स्पेन जैसी टीमों से तुलना करें तो मुझे लगता है कि उनकी समग्र गुणवत्ता अभी भी थोड़ी कम है।'
'सिर्फ टैलेंट कभी पर्याप्त नहीं होता'
कान के अनुसार, नॉकआउट मुकाबलों में असली परीक्षा मानसिक मजबूती की होती है। उन्होंने कहा, 'फुटबॉल सिर्फ प्रतिभा का खेल नहीं है। पूरे टूर्नामेंट, खासकर नॉकआउट चरण में मजबूत टीम भावना बनाना सबसे जरूरी होता है। सिर्फ टैलेंट कभी भी पर्याप्त नहीं होता। अब सबसे बड़ी चुनौती दबाव को संभालने की है, क्योंकि इस स्तर पर छोटी-सी गलती की भी बड़ी सजा मिलती है।'
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मुसियाला-विर्ट्ज की तारीफ
कान ने किसी एक खिलाड़ी को नहीं, बल्कि पूरी टीम के संतुलन को जर्मनी की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा, 'मैं किसी एक खिलाड़ी से ज्यादा पूरी टीम के संतुलन से प्रभावित हूं। जमाल मुसियाला ने गंभीर चोट से वापसी के बाद भी शानदार रचनात्मकता दिखाई है। फ्लोरियन विर्ट्ज का लिवरपूल में सीजन आसान नहीं रहा, लेकिन वह पहले से अधिक परिपक्व खिलाड़ी बनकर उभरे हैं। वहीं अनुभवी खिलाड़ी टीम को नेतृत्व देते हैं। सफल टीमों के लिए यही संतुलन सबसे अहम होता है।'
आधुनिक गोलकीपर की बदलती भूमिका
पूर्व बायर्न म्यूनिख कप्तान ने कहा कि आज के दौर में गोलकीपर की जिम्मेदारी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। उन्होंने कहा, 'आज का गोलकीपर सिर्फ शॉट रोकने वाला खिलाड़ी नहीं है। वह पहला अटैकर और आखिरी डिफेंडर भी होता है। उसके पास बेहतरीन तकनीकी क्षमता, पलक झपकते सही फैसला लेने की योग्यता और दबाव में खेलने का साहस होना चाहिए। लेकिन एक चीज आज भी नहीं बदली है—जब निर्णायक बचाव की जरूरत हो, तब गोलकीपर को हर हाल में अपना काम करना ही होता है।'
40 साल के नॉयर की जमकर तारीफ
कान ने अनुभवी गोलकीपर मैनुअल नॉयर की भी खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा, 'अनुभव की कोई जगह नहीं ले सकता। मैनुअल के लिए यह टूर्नामेंट आसान नहीं था क्योंकि उन्हें अपनी क्षमता दिखाने के ज्यादा मौके नहीं मिले। लेकिन उन्होंने पूरी टीम को शांति, नेतृत्व और आत्मविश्वास दिया। उनकी मौजूदगी भर से डिफेंडरों को सुरक्षा का एहसास होता है। 40 साल की उम्र में भी उनका इस स्तर पर लगातार प्रदर्शन करना उनके अविश्वसनीय पेशेवर रवैये को दिखाता है।'
कान का मानना है कि अगर जर्मनी को फिर से विश्व फुटबॉल की सबसे मजबूत टीमों में शामिल होना है, तो उसे प्रतिभा के साथ मानसिक मजबूती, सामूहिक एकजुटता और बड़े मुकाबलों का दबाव झेलने की क्षमता भी विकसित करनी होगी।
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फ्रांस और स्पेन से अभी भी पीछे है जर्मनी
कान ने माना कि जूलियन नागेल्समैन के नेतृत्व में जर्मनी ने अपनी अलग पहचान बनाई है और टीम में गुणवत्ता भी है, लेकिन दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों से तुलना करने पर अभी भी कमी नजर आती है। उन्होंने कहा, 'जर्मनी ने एक बार फिर दिखाया है कि वह दुनिया की शीर्ष टीमों में शामिल है। टीम के पास गुणवत्ता, रणनीतिक लचीलापन और जूलियन नागेल्समैन के नेतृत्व में स्पष्ट पहचान है। हालांकि, अगर फ्रांस और स्पेन जैसी टीमों से तुलना करें तो मुझे लगता है कि उनकी समग्र गुणवत्ता अभी भी थोड़ी कम है।'
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'सिर्फ टैलेंट कभी पर्याप्त नहीं होता'
कान के अनुसार, नॉकआउट मुकाबलों में असली परीक्षा मानसिक मजबूती की होती है। उन्होंने कहा, 'फुटबॉल सिर्फ प्रतिभा का खेल नहीं है। पूरे टूर्नामेंट, खासकर नॉकआउट चरण में मजबूत टीम भावना बनाना सबसे जरूरी होता है। सिर्फ टैलेंट कभी भी पर्याप्त नहीं होता। अब सबसे बड़ी चुनौती दबाव को संभालने की है, क्योंकि इस स्तर पर छोटी-सी गलती की भी बड़ी सजा मिलती है।'
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मुसियाला-विर्ट्ज की तारीफ
कान ने किसी एक खिलाड़ी को नहीं, बल्कि पूरी टीम के संतुलन को जर्मनी की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा, 'मैं किसी एक खिलाड़ी से ज्यादा पूरी टीम के संतुलन से प्रभावित हूं। जमाल मुसियाला ने गंभीर चोट से वापसी के बाद भी शानदार रचनात्मकता दिखाई है। फ्लोरियन विर्ट्ज का लिवरपूल में सीजन आसान नहीं रहा, लेकिन वह पहले से अधिक परिपक्व खिलाड़ी बनकर उभरे हैं। वहीं अनुभवी खिलाड़ी टीम को नेतृत्व देते हैं। सफल टीमों के लिए यही संतुलन सबसे अहम होता है।'
आधुनिक गोलकीपर की बदलती भूमिका
पूर्व बायर्न म्यूनिख कप्तान ने कहा कि आज के दौर में गोलकीपर की जिम्मेदारी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। उन्होंने कहा, 'आज का गोलकीपर सिर्फ शॉट रोकने वाला खिलाड़ी नहीं है। वह पहला अटैकर और आखिरी डिफेंडर भी होता है। उसके पास बेहतरीन तकनीकी क्षमता, पलक झपकते सही फैसला लेने की योग्यता और दबाव में खेलने का साहस होना चाहिए। लेकिन एक चीज आज भी नहीं बदली है—जब निर्णायक बचाव की जरूरत हो, तब गोलकीपर को हर हाल में अपना काम करना ही होता है।'
40 साल के नॉयर की जमकर तारीफ
कान ने अनुभवी गोलकीपर मैनुअल नॉयर की भी खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा, 'अनुभव की कोई जगह नहीं ले सकता। मैनुअल के लिए यह टूर्नामेंट आसान नहीं था क्योंकि उन्हें अपनी क्षमता दिखाने के ज्यादा मौके नहीं मिले। लेकिन उन्होंने पूरी टीम को शांति, नेतृत्व और आत्मविश्वास दिया। उनकी मौजूदगी भर से डिफेंडरों को सुरक्षा का एहसास होता है। 40 साल की उम्र में भी उनका इस स्तर पर लगातार प्रदर्शन करना उनके अविश्वसनीय पेशेवर रवैये को दिखाता है।'
कान का मानना है कि अगर जर्मनी को फिर से विश्व फुटबॉल की सबसे मजबूत टीमों में शामिल होना है, तो उसे प्रतिभा के साथ मानसिक मजबूती, सामूहिक एकजुटता और बड़े मुकाबलों का दबाव झेलने की क्षमता भी विकसित करनी होगी।