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मैग्नस कार्लसन को दो बार हराने के बाद प्रज्ञानंद ने खोला राज, बताया- विश्व नंबर-1 के खिलाफ क्या रहती है रणनीति
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Wed, 03 Jun 2026 12:23 PM IST
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सार
भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानंद ने नॉर्वे चेस 2026 में मैग्नस कार्लसन को दूसरी बार हराने के बाद कहा कि वह कभी भी कार्लसन से भयभीत नहीं होते, बल्कि उनके खिलाफ खेलते समय ज्यादा उत्साहित महसूस करते हैं। प्रज्ञानंद ने कहा कि कार्लसन के खिलाफ मुकाबले हमेशा उनके खेल का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बाहर लेकर आते हैं। उन्होंने यह भी माना कि विश्व शतरंज में पीढ़ी परिवर्तन की चर्चा बढ़ा-चढ़ाकर की जा रही है और कार्लसन आज भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हैं।
कार्लसन और प्रज्ञानंद
- फोटो : Twitter
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विस्तार
भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानंद ने नॉर्वे चेस 2026 में दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को दूसरी बार क्लासिकल मुकाबले में हराकर खिताब की दौड़ को और रोमांचक बना दिया है। इस जीत के साथ 20 वर्षीय भारतीय खिलाड़ी 12 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। उनसे आगे अमेरिका के वेस्ली सो 14 अंकों और फ्रांस के अलीरेजा फिरूजा 13 अंकों के साथ मौजूद हैं। यह कार्लसन के खिलाफ प्रज्ञानंद की तीसरी क्लासिकल जीत भी थी, जो शीर्ष स्तर की शतरंज में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
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'कार्लसन से नहीं डरता, उनके खिलाफ खेलना पसंद है'
कार्लसन को दो बार हराने के बावजूद प्रज्ञानंद ने साफ कहा कि उनके मन में कभी भी विश्व नंबर-एक को लेकर डर नहीं रहा। उन्होंने कहा, 'मैं यह नहीं कहूंगा कि मैं कभी उनसे भयभीत हुआ। उनके खिलाफ खेलते समय मैं हमेशा ज्यादा उत्साहित महसूस करता हूं। इससे मेरा सर्वश्रेष्ठ खेल बाहर आता है। मुझे नहीं लगता कि उनकी मौजूदगी मेरे खेल को प्रभावित करती है। हमने कई संघर्षपूर्ण मुकाबले खेले हैं और मुझे उनके खिलाफ खेलना वास्तव में पसंद है।'
जीत से ज्यादा अहम थे तीन अंक
भारतीय ग्रैंडमास्टर ने कहा कि इस चरण में मिली जीत उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण थी क्योंकि क्लासिकल मुकाबले में जीतने पर तीन अंक मिलते हैं। उन्होंने कहा, 'किसी भी प्रारूप में उन्हें हराना अच्छा लगता है, लेकिन इस समय टूर्नामेंट में जीत हासिल करना ज्यादा महत्वपूर्ण था, खासकर क्लासिकल मुकाबले में जहां तीन अंक मिलते हैं।'
कार्लसन को दो बार हराने के बावजूद प्रज्ञानंद ने साफ कहा कि उनके मन में कभी भी विश्व नंबर-एक को लेकर डर नहीं रहा। उन्होंने कहा, 'मैं यह नहीं कहूंगा कि मैं कभी उनसे भयभीत हुआ। उनके खिलाफ खेलते समय मैं हमेशा ज्यादा उत्साहित महसूस करता हूं। इससे मेरा सर्वश्रेष्ठ खेल बाहर आता है। मुझे नहीं लगता कि उनकी मौजूदगी मेरे खेल को प्रभावित करती है। हमने कई संघर्षपूर्ण मुकाबले खेले हैं और मुझे उनके खिलाफ खेलना वास्तव में पसंद है।'
जीत से ज्यादा अहम थे तीन अंक
भारतीय ग्रैंडमास्टर ने कहा कि इस चरण में मिली जीत उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण थी क्योंकि क्लासिकल मुकाबले में जीतने पर तीन अंक मिलते हैं। उन्होंने कहा, 'किसी भी प्रारूप में उन्हें हराना अच्छा लगता है, लेकिन इस समय टूर्नामेंट में जीत हासिल करना ज्यादा महत्वपूर्ण था, खासकर क्लासिकल मुकाबले में जहां तीन अंक मिलते हैं।'
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जोखिम लेने से मिली सफलता
प्रज्ञानंद ने माना कि इस मुकाबले में उन्होंने ज्यादा जोखिम उठाया क्योंकि टूर्नामेंट की स्थिति इसकी मांग कर रही थी। उन्होंने कहा, 'आज ज्यादा जोखिम मैंने लिया। परिस्थिति ऐसी थी कि लड़ना जरूरी था। मैग्नस भी जीत के लिए पूरी कोशिश करते। हम दोनों एक-दूसरे को हराना चाहते हैं, इसलिए कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है जहां कुछ नहीं से भी कुछ निकल आता है।'
उन्होंने मुकाबले के उतार-चढ़ाव पर भी बात की। प्रज्ञानंद ने कहा, 'एक समय मैं काफी आशावादी था, लेकिन अंत की ओर मुझे लगा कि मुकाबला ड्रॉ हो सकता है। फिर एक गलती हुई। लंबे समय तक बचाव करने और समय के दबाव में ऐसी गलतियां हो जाती हैं।'
प्रज्ञानंद ने माना कि इस मुकाबले में उन्होंने ज्यादा जोखिम उठाया क्योंकि टूर्नामेंट की स्थिति इसकी मांग कर रही थी। उन्होंने कहा, 'आज ज्यादा जोखिम मैंने लिया। परिस्थिति ऐसी थी कि लड़ना जरूरी था। मैग्नस भी जीत के लिए पूरी कोशिश करते। हम दोनों एक-दूसरे को हराना चाहते हैं, इसलिए कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है जहां कुछ नहीं से भी कुछ निकल आता है।'
उन्होंने मुकाबले के उतार-चढ़ाव पर भी बात की। प्रज्ञानंद ने कहा, 'एक समय मैं काफी आशावादी था, लेकिन अंत की ओर मुझे लगा कि मुकाबला ड्रॉ हो सकता है। फिर एक गलती हुई। लंबे समय तक बचाव करने और समय के दबाव में ऐसी गलतियां हो जाती हैं।'
'गार्ड बदलने' की बात को किया खारिज
विश्व शतरंज में नई पीढ़ी के उभार को लेकर चल रही चर्चाओं पर प्रज्ञानंद ने कहा कि इसे जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'हम पहले से ही शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल हैं। मैं नहीं मानता कि कोई गार्ड बदल रहा है। इन बातों को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। हम भी बाकी खिलाड़ियों की तरह शीर्ष स्तर के खिलाड़ी हैं।' उन्होंने फेबियानो कारुआना और हिकारू नाकामुरा जैसे दिग्गजों का उदाहरण देते हुए कहा कि वे अब भी शीर्ष स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, जबकि उनकी पीढ़ी ने भी विश्व चैंपियनशिप, वर्ल्ड कप और कई बड़े खिताब अपने नाम किए हैं।
कार्लसन अब भी सर्वश्रेष्ठ
हाल के नतीजों के बावजूद प्रज्ञानंद ने कार्लसन की महानता पर सवाल उठाने से इनकार किया। उन्होंने कहा, 'यह कहना बहुत जल्दबाजी होगी। पिछले एक साल में उन्होंने लगभग हर टूर्नामेंट जीता है जिसमें उन्होंने हिस्सा लिया। एक टूर्नामेंट या कुछ पल किसी खिलाड़ी की महानता तय नहीं करते। वह अब भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हैं।' प्रज्ञानंद के इस बयान ने न केवल उनकी परिपक्वता दिखाई, बल्कि यह भी साबित किया कि भारतीय युवा ग्रैंडमास्टर सम्मान और आत्मविश्वास के साथ विश्व शतरंज के शिखर की ओर बढ़ रहे हैं।
विश्व शतरंज में नई पीढ़ी के उभार को लेकर चल रही चर्चाओं पर प्रज्ञानंद ने कहा कि इसे जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'हम पहले से ही शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल हैं। मैं नहीं मानता कि कोई गार्ड बदल रहा है। इन बातों को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। हम भी बाकी खिलाड़ियों की तरह शीर्ष स्तर के खिलाड़ी हैं।' उन्होंने फेबियानो कारुआना और हिकारू नाकामुरा जैसे दिग्गजों का उदाहरण देते हुए कहा कि वे अब भी शीर्ष स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, जबकि उनकी पीढ़ी ने भी विश्व चैंपियनशिप, वर्ल्ड कप और कई बड़े खिताब अपने नाम किए हैं।
कार्लसन अब भी सर्वश्रेष्ठ
हाल के नतीजों के बावजूद प्रज्ञानंद ने कार्लसन की महानता पर सवाल उठाने से इनकार किया। उन्होंने कहा, 'यह कहना बहुत जल्दबाजी होगी। पिछले एक साल में उन्होंने लगभग हर टूर्नामेंट जीता है जिसमें उन्होंने हिस्सा लिया। एक टूर्नामेंट या कुछ पल किसी खिलाड़ी की महानता तय नहीं करते। वह अब भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हैं।' प्रज्ञानंद के इस बयान ने न केवल उनकी परिपक्वता दिखाई, बल्कि यह भी साबित किया कि भारतीय युवा ग्रैंडमास्टर सम्मान और आत्मविश्वास के साथ विश्व शतरंज के शिखर की ओर बढ़ रहे हैं।