प्रज्ञानंद ने रचा इतिहास: नॉर्वे शतरंज में कार्लसन को दूसरी बार हराया; हारते वक्त मैग्नस की ऐसी थी प्रतिक्रिया
भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानंद ने नॉर्वे चेस 2026 में दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को दूसरी बार क्लासिकल मुकाबले में हराकर इतिहास रच दिया। वह एक ही टूर्नामेंट में कार्लसन को दो बार क्लासिकल शतरंज में मात देने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। इस जीत के साथ प्रज्ञानंद खिताब की दौड़ में मजबूती से बने हुए हैं, जबकि कार्लसन के लिए आठवां नॉर्वे चेस खिताब जीतने की राह बेहद कठिन हो गई है।
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मुकाबला समाप्त होने के बाद कार्लसन के चेहरे पर निराशा साफ झलक रही थी। उन्होंने प्रज्ञानंद से हाथ मिलाया, सिर हिलाते हुए अपनी हताशा जाहिर की और कुछ ही देर बाद खेल क्षेत्र से बाहर चले गए।
कार्लसन के लिए यह हार सिर्फ एक मैच गंवाने भर की नहीं थी, बल्कि उनके आठवें नॉर्वे चेस खिताब के सपने को भी बड़ा झटका देने वाली साबित हो सकती है।
Check out the incredible final moments of Praggnanandhaa taking down World no.1 Magnus Carlsen with the Black pieces in Round 8 of Norway Chess 2026!
— ChessBase India (@ChessbaseIndia) June 2, 2026
With this win, Pragg becomes the first Indian (and possibly in the world) player who defeated Magnus Carlsen in Classical Chess… pic.twitter.com/MFvJPdBHel
इस जीत के साथ 20 वर्षीय प्रज्ञानंद 12 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं और टूर्नामेंट जीतने की दौड़ में मजबूती से बने हुए हैं। दूसरी ओर, कार्लसन का अभियान इस बार उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उन्हें अब तक चार क्लासिकल मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा है, जिनमें दो हार प्रज्ञानंद के खिलाफ आई हैं।
टूर्नामेंट में अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो 14 अंकों के साथ शीर्ष पर बने हुए हैं। उन्होंने जर्मनी के विंसेंट कीमर को आर्मागेडन टाईब्रेक में हराकर अपनी बढ़त मजबूत की। वहीं फ्रांस के अलीरेजा फिरूजा ने मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश को क्लासिकल मुकाबले में हराकर 13 अंकों के साथ दूसरा स्थान हासिल कर लिया।
विश्व चैंपियन डी. गुकेश को इस टूर्नामेंट में तीसरी क्लासिकल हार झेलनी पड़ी। आठ अंकों पर मौजूद गुकेश के लिए अब खिताब जीतना लगभग असंभव हो गया है। यदि वह अपने बचे हुए दोनों क्लासिकल मुकाबले जीत भी लेते हैं, तब भी उनके अधिकतम 14 अंक ही हो पाएंगे।
अंतिम दौरों पर टिकी निगाहें
टूर्नामेंट में अब केवल दो दौर बाकी हैं और प्रज्ञानंद का सपना पूरी तरह जीवित है। कार्लसन को उनके घरेलू मैदान पर दो बार हराकर भारतीय युवा सितारे ने यह साबित कर दिया है कि वह विश्व शतरंज के सबसे बड़े मंच पर किसी भी खिलाड़ी को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। आने वाले मुकाबले न केवल खिताब का फैसला करेंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि क्या प्रज्ञानंद नॉर्वे चेस जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन सकते हैं।