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Hindi News ›   Sports ›   In Tears After Injury, Tejaswin Shankar Stayed Back to Guide Sarvesh Kushare to CWG Silver

तेजस्विन शंकर ने जीता दिल: चोटिल होकर नहीं खेल पाए तो रो पड़े! फिर भारत को रजत पदक दिलाने में इस तरह की मदद

Tue, 28 Jul 2026 02:33 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लास्गो
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्लास्गो Published by: स्वप्निल शशांक Updated Tue, 28 Jul 2026 02:33 PM IST
सार

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में घुटने की चोट के कारण हाई जंप से बाहर हुए तेजस्विन शंकर ने हार नहीं मानी। खुद पदक की दौड़ से बाहर होने के बावजूद वह मैदान पर रुके रहे और साथी खिलाड़ी सर्वेश कुशारे को तकनीकी सलाह देते रहे। तेजस्विन की सलाह का असर दिखा और सर्वेश ने पुरुष हाई जंप में ऐतिहासिक रजत पदक जीत लिया। अब तेजस्विन की निगाहें गुरुवार से शुरू होने वाली डेकाथलॉन स्पर्धा पर हैं।

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In Tears After Injury, Tejaswin Shankar Stayed Back to Guide Sarvesh Kushare to CWG Silver
तेजस्विन शंकर - फोटो : IANS

विस्तार

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलीट तेजस्विन शंकर के लिए सोमवार का दिन बेहद भावुक रहा। घुटने की पुरानी चोट उभर आने के कारण उन्हें पुरुष हाई जंप स्पर्धा से बीच में ही हटना पड़ा, लेकिन अपने पदक का सपना टूटने के बावजूद उन्होंने मैदान नहीं छोड़ा। वह पूरे मुकाबले के दौरान साथी खिलाड़ी सर्वेश कुशारे के साथ खड़े रहे और उन्हें तकनीकी सलाह देते रहे। तेजस्विन की यही सलाह सर्वेश के लिए निर्णायक साबित हुई और उन्होंने भारत को हाई जंप में ऐतिहासिक रजत पदक दिला दिया।
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चोट के बावजूद साथी का हौसला बढ़ाया
बर्मिंघम 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स के कांस्य पदक विजेता तेजस्विन ने वार्म-अप के दौरान घुटने में तेज दर्द महसूस किया। उन्होंने पहली ऊंचाई पार करने की कोशिश की, लेकिन दर्द बढ़ने पर मुकाबले से हटने का फैसला किया। इसके बावजूद वह स्टेडियम में मौजूद रहे और सर्वेश कुशारे के हर प्रयास पर नजर बनाए रखी।

सर्वेश ने बताया कि 2.25 मीटर की ऊंचाई पर उनकी लय बिगड़ गई थी और रन-अप छोटा पड़ने लगा था। ऐसे समय में तेजस्विन ने उन्हें रन-अप थोड़ा आगे से शुरू करने की सलाह दी, जिससे वह अपनी लय वापस हासिल कर सके और रजत पदक जीतने में सफल रहे।
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'बस एक दिन दर्द नहीं चाहिए था, लेकिन वही दिन आ गया'
मुकाबले के बाद भावुक नजर आए तेजस्विन ने कहा, 'वार्म-अप के दौरान मेरे घुटने में अचानक तेज दर्द हुआ। यह कोई नई समस्या नहीं है। मुझे लंबे समय से टेंडोनाइटिस की दिक्कत है। लगभग हर हाई जंपर इस परेशानी से जूझता है, लेकिन आज यह दर्द ऐसे दिन बढ़ गया, जब मुझे खुद पर पूरा भरोसा था। मुझे यकीन था कि मैं पदक जीत सकता हूं, लेकिन पहली ही ऊंचाई पार नहीं कर सका। यह बहुत तकलीफ देता है।' उन्होंने आगे कहा, 'यह पैटेलर टेंडन के ज्यादा इस्तेमाल की वजह से हुआ। कुछ असाधारण नहीं है, लेकिन आज यह अचानक बढ़ गया और मेरा पूरा मुकाबला खराब हो गया।'
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अब डेकाथलॉन पर टिकी हैं उम्मीदें
तेजस्विन ने बताया कि उन्होंने आगे जोखिम नहीं लिया क्योंकि दो दिन बाद डेकाथलॉन स्पर्धा शुरू होनी है। उन्होंने कहा, 'मेरे पास अभी दो दिन हैं। मैं इन दो दिनों में पूरी कोशिश करूंगा कि चोट से उबर सकूं। मैं यहां छुट्टियां मनाने नहीं आया हूं। मैं डेकाथलॉन में जरूर उतरूंगा। अगर किसी तरह हाई जंप और लंबी कूद में दर्द को संभाल लिया, तो बाकी स्पर्धाओं में अच्छा प्रदर्शन करने का भरोसा है।'

भारत को मिला ऐतिहासिक रजत पदक
तेजस्विन की सलाह का असर सर्वेश कुशारे के प्रदर्शन में साफ दिखाई दिया। उन्होंने 2.25 मीटर की छलांग लगाकर पुरुष हाई जंप में रजत पदक अपने नाम किया। वह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में इस स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट भी बने।

तेजस्विन शंकर डेकाथलॉन के राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी हैं। वह एशियाई खेलों में रजत पदक जीत चुके हैं और 8000 अंकों का आंकड़ा पार करने वाले पहले भारतीय डेकाथलीट भी हैं। अब भारतीय खेल प्रेमियों की नजरें इस बात पर होंगी कि क्या वह चोट से उबरकर डेकाथलॉन में भी देश के लिए एक और पदक जीत पाते हैं।
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