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एशियाड चयन पर सरकार सख्त: अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को मिलेगा मौका, मांडविया बोले- पदक है लक्ष्य
Thu, 02 Jul 2026 05:31 PM IST
मयंक त्रिपाठी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Thu, 02 Jul 2026 05:31 PM IST
सार
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि एशियन गेम्स 2026 कोई एक्सपोजर टूर नहीं है और केवल पदक जीतने की क्षमता रखने वाले खिलाड़ियों को ही भारतीय दल में जगह मिलेगी। वहीं, घुड़सवारी खिलाड़ी अनुष अग्रवाल के चयन पर विवाद के बीच खेल मंत्रालय उनके शामिल किए जाने के पक्ष में नजर आ रहा है।
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मनसुख मांडविया
- फोटो : PTI
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विस्तार
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि एशियन गेम्स 2026 किसी भी खिलाड़ी के लिए एक्सपोजर टूर नहीं है। उन्होंने कहा कि जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से चार अक्तूबर तक होने वाले एशियन गेम्स में भारत की ओर से केवल वही खिलाड़ी भेजे जाएंगे, जिनके पास पदक जीतने की वास्तविक संभावना होगी। मांडविया ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भारतीय दल का आकार करीब 600 खिलाड़ियों तक सीमित रखा जाएगा, ताकि केवल प्रदर्शन के आधार पर खिलाड़ियों का चयन हो।
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पदक की संभावना ही होगी चयन का आधार
खेल मंत्री ने कहा कि एशियन गेम्स का उद्देश्य देश का गौरव बढ़ाना है, न कि खिलाड़ियों को अनुभव दिलाना। उन्होंने कहा, 'मैं एक बात स्पष्ट करना चाहता हूं कि एशियन गेम्स कोई एक्सपोजर टूर नहीं है। यह ऐसा मंच है जहां खिलाड़ी अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से देश का नाम रोशन करते हैं। इसलिए केवल वही खिलाड़ी जाएंगे जो परिणाम देने की क्षमता रखते हैं।' मांडविया ने यह भी कहा कि अनुभव हासिल करने के लिए अन्य प्रतियोगिताएं उपलब्ध हैं। उन्होंने संकेत दिया कि केवल भागीदारी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पाने की सोच रखने वाले खिलाड़ियों को टीम में जगह नहीं मिलेगी।
खेल मंत्री ने कहा कि एशियन गेम्स का उद्देश्य देश का गौरव बढ़ाना है, न कि खिलाड़ियों को अनुभव दिलाना। उन्होंने कहा, 'मैं एक बात स्पष्ट करना चाहता हूं कि एशियन गेम्स कोई एक्सपोजर टूर नहीं है। यह ऐसा मंच है जहां खिलाड़ी अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से देश का नाम रोशन करते हैं। इसलिए केवल वही खिलाड़ी जाएंगे जो परिणाम देने की क्षमता रखते हैं।' मांडविया ने यह भी कहा कि अनुभव हासिल करने के लिए अन्य प्रतियोगिताएं उपलब्ध हैं। उन्होंने संकेत दिया कि केवल भागीदारी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पाने की सोच रखने वाले खिलाड़ियों को टीम में जगह नहीं मिलेगी।
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2025 की चयन नीति होगी लागू
खेल मंत्रालय ने 2025 में जारी चयन नीति का हवाला देते हुए कहा कि बहु-खेल प्रतियोगिताओं, विशेषकर एशियन गेम्स के लिए केवल उन्हीं खिलाड़ियों का चयन होगा जिनके पास पदक जीतने की वास्तविक संभावना होगी। इसके तहत चयन ट्रायल की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी और स्वतंत्र पर्यवेक्षक उसकी निगरानी करेंगे। साथ ही संबंधित खेल में एशिया की शीर्ष छह रैंकिंग में शामिल खिलाड़ी ही पात्र होंगे। इसी मानदंड के चलते भारतीय फुटबॉल टीम इस बार एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाएगी, क्योंकि उसकी महाद्वीपीय रैंकिंग निर्धारित स्तर से नीचे है।
खेल मंत्रालय ने 2025 में जारी चयन नीति का हवाला देते हुए कहा कि बहु-खेल प्रतियोगिताओं, विशेषकर एशियन गेम्स के लिए केवल उन्हीं खिलाड़ियों का चयन होगा जिनके पास पदक जीतने की वास्तविक संभावना होगी। इसके तहत चयन ट्रायल की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी और स्वतंत्र पर्यवेक्षक उसकी निगरानी करेंगे। साथ ही संबंधित खेल में एशिया की शीर्ष छह रैंकिंग में शामिल खिलाड़ी ही पात्र होंगे। इसी मानदंड के चलते भारतीय फुटबॉल टीम इस बार एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाएगी, क्योंकि उसकी महाद्वीपीय रैंकिंग निर्धारित स्तर से नीचे है।
एनएसएफ की सिफारिश के बाद होगी अंतिम मंजूरी
मांडविया ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय महासंघ से मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय खेल महासंघ (एनएसएफ) पहले अपने खिलाड़ियों की सिफारिश भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) को भेजेंगे। इसके बाद स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साइ) उनकी समीक्षा करेगी और अंतिम मंजूरी खेल मंत्रालय देगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले की उस व्यवस्था को बदलने का प्रयास किया है, जिसमें कई बार महासंघ मनमाने तरीके से चयन करते थे।
मांडविया ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय महासंघ से मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय खेल महासंघ (एनएसएफ) पहले अपने खिलाड़ियों की सिफारिश भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) को भेजेंगे। इसके बाद स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साइ) उनकी समीक्षा करेगी और अंतिम मंजूरी खेल मंत्रालय देगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले की उस व्यवस्था को बदलने का प्रयास किया है, जिसमें कई बार महासंघ मनमाने तरीके से चयन करते थे।
अनुष अग्रवाल को मिल सकती है राहत
एशियन गेम्स चयन को लेकर सबसे बड़ा विवाद घुड़सवारी खिलाड़ी अनुष अग्रवाल के बाहर होने को लेकर है। हालांकि हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट की एकल पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन मामला अब डिवीजन बेंच में लंबित है। सूत्रों के अनुसार खेल मंत्रालय ने उनके मामले की समीक्षा की है और माना है कि उन्हें एशियन गेम्स में मौका मिलना चाहिए। ऐसे में अंतिम भारतीय दल में उनके शामिल होने की संभावना बनी हुई है।
एशियन गेम्स चयन को लेकर सबसे बड़ा विवाद घुड़सवारी खिलाड़ी अनुष अग्रवाल के बाहर होने को लेकर है। हालांकि हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट की एकल पीठ ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन मामला अब डिवीजन बेंच में लंबित है। सूत्रों के अनुसार खेल मंत्रालय ने उनके मामले की समीक्षा की है और माना है कि उन्हें एशियन गेम्स में मौका मिलना चाहिए। ऐसे में अंतिम भारतीय दल में उनके शामिल होने की संभावना बनी हुई है।
अंतिम टीम पर मंत्रालय का होगा फैसला
खेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय खेल महासंघों द्वारा ट्रायल के बाद जारी की गई सूची केवल उनकी अनुशंसित सूची होती है। इसे अंतिम भारतीय दल नहीं माना जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि केवल उन्हीं खिलाड़ियों, कोचों और सहयोगी स्टाफ को आधिकारिक भारतीय दल का सदस्य माना जाएगा, जिनके नाम युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (एमवाईएएस) द्वारा जारी स्वीकृति आदेश में शामिल होंगे।
खेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय खेल महासंघों द्वारा ट्रायल के बाद जारी की गई सूची केवल उनकी अनुशंसित सूची होती है। इसे अंतिम भारतीय दल नहीं माना जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि केवल उन्हीं खिलाड़ियों, कोचों और सहयोगी स्टाफ को आधिकारिक भारतीय दल का सदस्य माना जाएगा, जिनके नाम युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय (एमवाईएएस) द्वारा जारी स्वीकृति आदेश में शामिल होंगे।
मनिका बत्राने भी जताई थी आपत्ति
टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा ने भी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अपने बाहर किए जाने का विरोध किया था। उनका कहना था कि राष्ट्रीय महासंघ ने घरेलू प्रतियोगिताओं में भागीदारी के आधार पर अपने ही संविधान का उल्लंघन करते हुए उन्हें टीम से बाहर किया। हालांकि बाद में उन्होंने अदालत जाने का फैसला वापस ले लिया।
टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा ने भी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अपने बाहर किए जाने का विरोध किया था। उनका कहना था कि राष्ट्रीय महासंघ ने घरेलू प्रतियोगिताओं में भागीदारी के आधार पर अपने ही संविधान का उल्लंघन करते हुए उन्हें टीम से बाहर किया। हालांकि बाद में उन्होंने अदालत जाने का फैसला वापस ले लिया।