{"_id":"69ec5d42efb7d9f869068a0d","slug":"olympic-medal-winning-hockey-player-gurbax-singh-grewal-passes-away-breathes-his-last-at-the-age-of-84-2026-04-25","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Gurbax Singh Grewal: ओलंपिक पदक विजेता हॉकी खिलाड़ी गुरबख्श सिंह का निधन, 84 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस","category":{"title":"Sports","title_hn":"खेल","slug":"sports"}}
Gurbax Singh Grewal: ओलंपिक पदक विजेता हॉकी खिलाड़ी गुरबख्श सिंह का निधन, 84 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Swapnil Shashank
Updated Sat, 25 Apr 2026 11:51 AM IST
विज्ञापन
सार
ओलंपिक कांस्य पदक विजेता गुरबख्श सिंह ग्रेवाल का 84 वर्ष की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। 1968 ओलंपिक में पदक जीतने वाले ग्रेवाल ने बाद में खेल प्रशासन और युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने में भी अहम योगदान दिया।
गुरबख्श सिंह
- फोटो : IANS
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
भारतीय हॉकी के एक और सितारे ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। ओलंपिक पदक विजेता गुरबख्श सिंह ग्रेवाल का 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनका निधन दिल का दौरा पड़ने की वजह से हुआ। उन्होंने जीरकपुर (चंडीगढ़ के पास) में अंतिम सांस ली।
खेल के मैदान से प्रशासन तक, एक विस्तृत यात्रा
गुरबख्श सिंह ग्रेवाल 1968 के मैक्सिको सिटी ओलपिंक 1968 में भारतीय टीम का हिस्सा थे, जिसने कांस्य पदक जीता था। उस समय उनकी भूमिका टीम के लिए बेहद अहम रही थी। एक खास उपलब्धि यह भी रही कि उसी ओलंपिक में उन्होंने अपने भाई बलबीर सिंह ग्रेवाल के साथ भारत का प्रतिनिधित्व किया। यह उन दुर्लभ मौकों में से एक था जब सगे भाई एक साथ ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा बने।
गुरबख्श सिंह ग्रेवाल का खेल जीवन सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं था। खेल से संन्यास लेने के बाद भी उन्होंने हॉकी के प्रशासन में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने वेस्टर्न रेलवे में वरिष्ठ खेल अधिकारी के रूप में काम किया और कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। रिटायरमेंट के बाद मुंबई में रहते हुए वे खेल प्रशासन से जुड़े रहे और मुंबई हॉकी एसोसिएशन के मानद सचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।
एक युग का अंत
गुरबख्श सिंह ग्रेवाल का निधन भारतीय खेल जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। उनकी स्मृति और उनका योगदान हमेशा हॉकी प्रेमियों के दिलों में जीवित रहेगा। उनके निधन से खेल जगत ने एक ऐसे दिग्गज को खो दिया है, जिन्होंने अपने खेल और अपने प्रशासनिक कार्यों से हॉकी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Trending Videos
खेल के मैदान से प्रशासन तक, एक विस्तृत यात्रा
गुरबख्श सिंह ग्रेवाल 1968 के मैक्सिको सिटी ओलपिंक 1968 में भारतीय टीम का हिस्सा थे, जिसने कांस्य पदक जीता था। उस समय उनकी भूमिका टीम के लिए बेहद अहम रही थी। एक खास उपलब्धि यह भी रही कि उसी ओलंपिक में उन्होंने अपने भाई बलबीर सिंह ग्रेवाल के साथ भारत का प्रतिनिधित्व किया। यह उन दुर्लभ मौकों में से एक था जब सगे भाई एक साथ ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा बने।
विज्ञापन
विज्ञापन
गुरबख्श सिंह ग्रेवाल का खेल जीवन सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं था। खेल से संन्यास लेने के बाद भी उन्होंने हॉकी के प्रशासन में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने वेस्टर्न रेलवे में वरिष्ठ खेल अधिकारी के रूप में काम किया और कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। रिटायरमेंट के बाद मुंबई में रहते हुए वे खेल प्रशासन से जुड़े रहे और मुंबई हॉकी एसोसिएशन के मानद सचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।
एक युग का अंत
गुरबख्श सिंह ग्रेवाल का निधन भारतीय खेल जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। उनकी स्मृति और उनका योगदान हमेशा हॉकी प्रेमियों के दिलों में जीवित रहेगा। उनके निधन से खेल जगत ने एक ऐसे दिग्गज को खो दिया है, जिन्होंने अपने खेल और अपने प्रशासनिक कार्यों से हॉकी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कमेंट
कमेंट X