29 बार जीत चुके वर्ल्ड टाइटल: दिग्गज पंकज आडवाणी को किनसे मिलती है प्रेरणा, जोकोविच का नाम लेकर क्या बोले?
पंकज आडवाणी ने बर्मिंघम में डब्ल्यूबीएल विश्व बिलियर्ड्स चैंपियनशिप जीतकर 29वां विश्व खिताब अपने नाम किया। 41 वर्षीय खिलाड़ी ने नोवाक जोकोविच को अपनी प्रेरणा बताते हुए कहा कि लंबे समय तक शीर्ष स्तर पर बने रहने के लिए कड़ी मेहनत के साथ स्मार्ट वर्क भी जरूरी है। उन्होंने अपनी तैयारी और करियर के उतार-चढ़ाव पर भी बात की।
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भारत के दिग्गज क्यू खिलाड़ी पंकज आडवाणी ने अपने करियर का 29वां विश्व खिताब जीत लिया है। 41 साल के आडवाणी का कहना है कि टेनिस के दिग्गज नोवाक जोकोविच उन्हें लगातार बेहतर करने और अपनी सीमाओं से आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। जोकोविच करीब दो दशक के करियर के बाद भी शीर्ष स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। आडवाणी के मुताबिक, उनकी निरंतरता और लंबे समय तक खुद को शीर्ष स्तर पर बनाए रखने की क्षमता से काफी कुछ सीखा जा सकता है।
आडवाणी ने बर्मिंघम में डब्ल्यूबीएल विश्व बिलियर्ड्स चैंपियनशिप जीतकर यह उपलब्धि हासिल की। पीटीआई को दिए एक ऑनलाइन साक्षात्कार में उन्होंने खिताबी जीत, अपनी तैयारी और बिलियर्ड्स व स्नूकर की अलग-अलग चुनौतियों पर बात की। वह इन दिनों इंग्लैंड के शेफील्ड में हैं, जहां इंदौर में होने वाली आगामी विश्व स्नूकर चैंपियनशिप की तैयारी कर रहे हैं।
आडवाणी ने कहा कि यह जीत उनके लिए बेहद खास है, क्योंकि उन्हें विश्व के शीर्ष खिलाड़ियों के बीच कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। प्रतियोगिता में कई पूर्व विश्व चैंपियन और शानदार फॉर्म में चल रहे खिलाड़ी शामिल थे। खिताब तक पहुंचने के दौरान उन्होंने अपने हमवतन सौरव कोठारी के अलावा डेविड कॉजियर और रॉबर्ट हॉल जैसे खिलाड़ियों को हराया। उन्होंने कहा, 'जो लोग मेरे सफर पर करीब से नजर नहीं रख रहे थे, उनके लिए यह जीत बहुत खास है। यह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के खिलाफ मिली है। इस प्रतियोगिता में कई पूर्व विश्व चैंपियन और शानदार फॉर्म में चल रहे खिलाड़ी थे। मुकाबला बेहद कठिन था।'
आडवाणी ने माना कि वह हमेशा निरंतर प्रदर्शन करने की कोशिश करते रहे हैं, भले ही हर बार नतीजे उनकी मेहनत के अनुरूप नहीं रहे हों। उन्होंने कहा, 'मेरा काम करने का तरीका हमेशा एक जैसा रहा है। इस बार मैंने सामान्य से थोड़ा ज्यादा मेहनत की, क्योंकि मैं शीर्ष पर पहुंचने के लिए बेहद दृढ़ और प्रेरित था।'
VIDEO | Legendary cueist Pankaj Advani on his 29th career world title by winning the WBL World Billiards Championship. The 41-year-old was the only Indian in the last-four stage and eventually came out on top. "I was obviously very excited because I've not won a billiards title in two years. For those who haven't been following my journey very closely. So this is a very, very special victory. And it comes against the very best players of the world." "If someone had to see the lineup of players that played in this event, all former world champions, current players who are in top form from England, from all over the world, it was a very, very competitive and tough field. So this victory is truly, truly satisfying for me. And as far as consistency is concerned, I've always tried to achieve that." "Sometimes the results reflect; sometimes the results don't reflect it. But my work ethic remains the same. And I feel like this time I worked a little harder than normal because I was super determined and motivated to get to the very top." (Full video available on PTI Videos - https://t.co/bIyFWTeOLF)
— Press Trust of India (@PTI_News) October 29, 2026
आडवाणी ने कहा कि रोजर फेडरर के संन्यास के बाद जोकोविच उनके लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत हैं। 24 ग्रैंडस्लैम खिताब जीत चुके जोकोविच 39 साल की उम्र में भी अपने से काफी कम उम्र के खिलाड़ियों को चुनौती दे रहे हैं। आडवाणी ने कहा, 'जोकोविच निरंतरता की मिसाल हैं। उनका करियर करीब दो दशक से चल रहा है और वह आज भी बड़े टूर्नामेंटों के निर्णायक दौर में पहुंचते हैं।'
उन्होंने आगे कहा, 'यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किसी लक्ष्य को कितना हासिल करना चाहते हैं। अगर आप सच में कुछ पाना चाहते हैं और सही दिशा में काम करते हैं, तो उसे हासिल कर सकते हैं। सिर्फ कड़ी मेहनत नहीं, बल्कि स्मार्ट तरीके से काम करना भी जरूरी है। मुझे लगता है कि फेडरर और जोकोविच ने अपने करियर में यही किया है।'
आडवाणी ने बताया कि बिलियर्ड्स और स्नूकर एक ही टेबल पर खेले जाते हैं, लेकिन दोनों खेलों की मांग अलग है। बिलियर्ड्स में लंबे समय तक एकाग्रता बनाए रखना और स्टैमिना महत्वपूर्ण है। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपनी तैयारी बदली। उन्होंने कहा, 'मैं पिछले एक महीने से हर दिन करीब चार से पांच घंटे अभ्यास कर रहा था। पिछले दो वर्षों में मैंने बिलियर्ड्स कम खेला था। नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, इसलिए इस प्रतियोगिता के लिए मैंने अलग तरीके से और व्यवस्थित तैयारी की।' उन्होंने अपने कोच अरविंद सावर और बड़े भाई श्री आडवाणी का भी आभार जताया। उनके बड़े भाई खेल मनोवैज्ञानिक हैं। आडवाणी ने कहा कि दोनों उन्हें बेहतर खिलाड़ी बनने के लिए लगातार प्रेरित करते हैं।
आडवाणी ने कहा कि दो दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्हें मुश्किल दौर और कड़वी हार का भी सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा, 'मैं जानता हूं कि मेरा सफर कितना कठिन रहा है। ऐसे साल भी आए, जब मैंने कोई बड़ा खिताब नहीं जीता। कुछ हार को स्वीकार करना मुश्किल था, तो कुछ जीत अप्रत्याशित रहीं। मैंने अपने करियर में सब कुछ देखा है।' उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि क्रिकेट के अलावा दूसरे खेलों के खिलाड़ियों की उपलब्धियों और लंबे समय तक लगातार अच्छे प्रदर्शन को भी उतना ही सम्मान मिले, जितना क्रिकेटरों को मिलता है। उनके मुताबिक, पांच, दस या 15 वर्षों तक निरंतरता दिखाने वाले खिलाड़ियों के सफर को भी पहचान मिलनी चाहिए।