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कैंडिडेट्स चेस: अब महिलाओं में भी होगी भारत की बादशाहत? विश्व चैंपियन बनने के लिए जू वेनजुन से भिड़ेंगी वैशाली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, साइप्रस
Published by: Swapnil Shashank
Updated Thu, 16 Apr 2026 08:57 AM IST
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सार
वैशाली की यह सफलता इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि एक समय वह इस टूर्नामेंट में भाग लेने को लेकर संशय में थीं। हालांकि, उन्होंने हिस्सा लिया और टूर्नामेंट भी अपने नाम किया। अब वह विश्व चैंपियन बनने के लिए भिड़ेंगी।
वैशाली
- फोटो : IANS
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विस्तार
भारत की स्टार शतरंज खिलाड़ी और प्रज्ञानंद की बहन आर वैशाली ने बुधवार को फिडे महिला कैंडिडेट्स टूर्नामेंट 2026 जीतकर इतिहास रच दिया। इस जीत के साथ ही उन्हें इस साल होने वाली विश्व चैंपियनशिप में मौजूदा चैंपियन जू वेनजुन को चुनौती देने का मौका मिलेगा।
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लाग्नो को हराकर जीता खिताब
24 वर्षीय वैशाली ने फाइनल राउंड में यूक्रेन की कातेरिना लाग्नो को सफेद मोहरों से हराकर 14 में से 8.5 अंक के साथ खिताब अपने नाम किया। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में शांत और प्रभावी खेल दिखाया और अपने प्रतिद्वंद्वियों से आधा अंक आगे रहते हुए जीत दर्ज की।
24 वर्षीय वैशाली ने फाइनल राउंड में यूक्रेन की कातेरिना लाग्नो को सफेद मोहरों से हराकर 14 में से 8.5 अंक के साथ खिताब अपने नाम किया। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में शांत और प्रभावी खेल दिखाया और अपने प्रतिद्वंद्वियों से आधा अंक आगे रहते हुए जीत दर्ज की।
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वैशाली का रहा दबदबा
यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि वैशाली ने टूर्नामेंट की शुरुआत कम रेटिंग वाले खिलाड़ियों में से एक के रूप में की थी, लेकिन शानदार प्रदर्शन से उन्होंने सभी को पीछे छोड़ दिया। उनका यह सफर भारत के ही युवा ग्रैंडमास्टर डी गुकेश के 2024 के कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतने जैसे यादगार अभियान की याद दिलाता है, जब उन्होंने भी उम्मीदों के विपरीत खिताब जीता था।
यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि वैशाली ने टूर्नामेंट की शुरुआत कम रेटिंग वाले खिलाड़ियों में से एक के रूप में की थी, लेकिन शानदार प्रदर्शन से उन्होंने सभी को पीछे छोड़ दिया। उनका यह सफर भारत के ही युवा ग्रैंडमास्टर डी गुकेश के 2024 के कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतने जैसे यादगार अभियान की याद दिलाता है, जब उन्होंने भी उम्मीदों के विपरीत खिताब जीता था।
वैशाली ने अपनाई बेहतरीन रणनीति
वैशाली ने अपने निर्णायक मुकाबले में बेहतरीन रणनीति अपनाई। शुरुआती चालों से ही उन्होंने बढ़त बना ली, जिसे उन्होंने पूरे मैच के दौरान बरकरार रखा। मिडिल गेम में सटीक चालें चलते हुए उन्होंने अपने प्यादे की बढ़त को जीत में बदल दिया। हालांकि, खिताब जीतने के लिए उन्हें अन्य मुकाबलों के परिणाम पर भी निर्भर रहना पड़ा। भारत की ही खिलाड़ी दिव्या देशमुख ने कजाखस्तान की बिबिसारा अस्सौबायेवा के खिलाफ ड्रॉ खेला, जिससे वैशाली की जीत पक्की हो गई।
वैशाली ने अपने निर्णायक मुकाबले में बेहतरीन रणनीति अपनाई। शुरुआती चालों से ही उन्होंने बढ़त बना ली, जिसे उन्होंने पूरे मैच के दौरान बरकरार रखा। मिडिल गेम में सटीक चालें चलते हुए उन्होंने अपने प्यादे की बढ़त को जीत में बदल दिया। हालांकि, खिताब जीतने के लिए उन्हें अन्य मुकाबलों के परिणाम पर भी निर्भर रहना पड़ा। भारत की ही खिलाड़ी दिव्या देशमुख ने कजाखस्तान की बिबिसारा अस्सौबायेवा के खिलाफ ड्रॉ खेला, जिससे वैशाली की जीत पक्की हो गई।
टूर्नामेंट में भाग लेने को लेकर था संशय
वैशाली की यह सफलता इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि एक समय वह इस टूर्नामेंट में भाग लेने को लेकर संशय में थीं। पिछले साल चेन्नई ग्रैंड मास्टर्स में खराब प्रदर्शन (सिर्फ 1.5 अंक) के बाद उन्होंने ग्रैंड स्विस में हिस्सा न लेने का भी विचार किया था। इसके बावजूद, उन्होंने बड़े मंच पर शानदार वापसी करते हुए खिताब अपने नाम किया और अब उनकी नजरें विश्व चैम्पियनशिप पर टिकी हैं।
वैशाली की यह सफलता इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि एक समय वह इस टूर्नामेंट में भाग लेने को लेकर संशय में थीं। पिछले साल चेन्नई ग्रैंड मास्टर्स में खराब प्रदर्शन (सिर्फ 1.5 अंक) के बाद उन्होंने ग्रैंड स्विस में हिस्सा न लेने का भी विचार किया था। इसके बावजूद, उन्होंने बड़े मंच पर शानदार वापसी करते हुए खिताब अपने नाम किया और अब उनकी नजरें विश्व चैम्पियनशिप पर टिकी हैं।

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