Victor Axelsen Retires: एक्सेलसन ने पेशेवर बैडमिंटन से लिया संन्यास; दो-दो बार ओलंपिक और विश्व चैंपियन रह चुके
दो बार के ओलंपिक चैंपियन विक्टर एक्सेलसन ने पीठ की गंभीर चोट के चलते 32 साल की उम्र में बैडमिंटन से संन्यास ले लिया। शानदार करियर के दौरान उन्होंने ओलंपिक, वर्ल्ड चैंपियनशिप और कई बड़े खिताब जीते और लंबे समय तक नंबर-1 खिलाड़ी रहे।
एक्सेलसन ने अपने संन्यास के पीछे की वजह साफ करते हुए कहा कि अब उनका शरीर उन्हें खेलने की अनुमति नहीं दे रहा है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर संन्यास का एलान करते हुए लिखा, 'जैसा कि ज्यादातर लोग जानते हैं, मैं काफी समय से अपनी पीठ की समस्या से जूझ रहा हूं। पिछले साल अप्रैल में मेरी सर्जरी हुई थी और उसके बाद लंबा रिहैबिलिटेशन चला, लेकिन अक्तूबर में मुझे फिर से झटका लगा। तब से मैं उस स्तर पर खेल या ट्रेनिंग नहीं कर पा रहा हूं, जैसा जरूरी है। दर्द की वजह से मैं खेल नहीं पा रहा हूं और इसी कारण मुझे यह बेहद कठिन फैसला लेना पड़ा।'
एक्सेलसन ने बताया कि यह फैसला उन्होंने डॉक्टरों और सर्जन की सलाह के बाद लिया है। उन्होंने कहा, 'यह फैसला मैंने अपने सर्जन और डॉक्टरों से सलाह लेकर लिया है। उनका कहना है कि जिस तरह का दर्द मैं अभी महसूस कर रहा हूं, उसमें फिर से सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। अगर वह सफल नहीं होती, तो और गंभीर ऑपरेशन करना पड़ सकता है। ऐसे में मैं उस स्तर पर प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाऊंगा। यह मेरा शरीर है जो मुझे रुकने का संकेत दे रहा है और मुझे डॉक्टरों की सलाह माननी होगी।'
एक्सेलसन ने बहुत कम उम्र में ही अपने टैलेंट का लोहा मनवा दिया था। 2010 में उन्होंने बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप जीतकर इतिहास रचा और ऐसा करने वाले पहले यूरोपीय खिलाड़ी बने। उसी साल उन्होंने सीनियर स्तर पर डेब्यू किया और साइप्रस इंटरनेशनल खिताब जीतकर अपने करियर की दमदार शुरुआत की।
2014 में उन्होंने स्विस ओपन ग्रां प्री गोल्ड जीतकर अपनी पहचान और मजबूत की। इसी साल उन्होंने बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल भी जीता। 2016 में उन्होंने इतिहास रचते हुए बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड सुपरसीरीज फाइनल्स में पुरुष एकल खिताब जीतने वाले पहले यूरोपीय खिलाड़ी बने।
ओलंपिक में रचा इतिहास
एक्सेलसन का करियर ओलंपिक में शानदार रहा। उन्होंने 2016 रियो ओलंपिक में महान लिन डैन को हराकर कांस्य पदक जीता था। इसके अलावा टोक्यो 2020 में उन्होंने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया था। इसके बाद 2024 पेरिस ओलंपिक में उन्होंने अपना टाइटल डिफेंड किया और स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया था। टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड जीतना उनके करियर का सबसे बड़ा मुकाम रहा, जिसने उन्हें बैडमिंटन सुपरस्टार बना दिया। वह 2017 में ग्लासगो और 2022 में टोक्यों में विश्व चैंपियन का खिताब भी जीत चुके हैं।

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