iPhone In Space: नासा के Artemis II मिशन में अंतरिक्ष यात्री ले गए आईफोन 17 प्रो मैक्स, जानें इसके पीछे की वजह
iPhone In Space: क्या आप जानते हैं कि नासा के अंतरिक्ष यात्री चांद पर iPhone 17 Pro Max लेकर जा रहे हैं? 50 साल बाद हो रहे इस एतिहासिक क्रू मिशन में स्मार्टफोन ने भारी-भरकम कैमरों की जगह ले ली है। जानिए अंतरिक्ष में फोन ले जाने की असली वजह और इसके इस्तेमाल से जुड़े नियम क्या हैं।
विस्तार
यह जानकर शायद आपको काफी हैरानी हो, लेकिन नासा के Artemis II मिशन में अंतरिक्ष यात्री अपने साथ एक ऐसी डिवाइस ले गए हैं जो बिल्कुल आईफोन 17 प्रो मैक्स जैसी दिखती है। यह अंतरिक्ष में ले जाए जाने वाले पुराने, भारी और खास उपकरणों की तुलना में एक बहुत बड़ा बदलाव है। अब अंतरिक्ष यात्री उस डिवाइस का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल करते हैं।
क्या है Artemis II मिशन?
Artemis II मिशन की बात करें तो 50 साल से भी ज्यादा समय में चंद्रमा की ओर जाने वाला नासा का यह पहला क्रू मिशन है। पहले की टेस्ट उड़ानों से अलग, इसमें अंतरिक्ष यात्री सवार हैं। इसका मुख्य मकसद भविष्य के मून मिशन के लिए अहम सिस्टम की टेस्टिंग करना है। यह 10 दिनों का मिशन है जिसमें क्रू चंद्रमा का चक्कर लगाकर वापस आएगा। यह मिशन भविष्य में चांद पर इंसान को उतारने का रास्ता तैयार करेगा।
अंतरिक्ष में स्मार्टफोन क्यों?
अब सवाल यह उठता है कि आखिर एक स्मार्टफोन को अंतरिक्ष में क्यों ले जाया जा रहा है? दरअसल, इसके पीछे का मुख्य कारण इसके इस्तेमाल में आसानी और बेहतरीन डॉक्युमेंटेशन की सुविधा है। किसी भी भारी उपकरण की तुलना में स्मार्टफोन को ऑपरेट करना कहीं ज्यादा आसान होता है।
अंतरिक्ष यात्री आईफोन का इस्तेमाल हाई-क्वालिटी फोटो और वीडियो खींचने, मिशन के दौरान अपने खास पलों को रिकॉर्ड करने और स्पेसक्राफ्ट के अंदर हो रही गतिविधियों को आसानी से कैद करने के लिए कर सकते हैं। आजकल के स्मार्टफोन कैमरे इतने शानदार हो गए हैं कि वे उन कामों को भी बड़ी आसानी से कर सकते हैं, जिनके लिए पहले बड़े और भारी-भरकम उपकरणों की जरूरत पड़ती थी।
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— Tech Bharat (Nitin Agarwal) (@techbharat) April 2, 2026
NASA Artemis moon Astronauts were given an iPhone 17 Pro Max Silver each to shoot & record their activities in space just like a vlogger!
It would be cool if they were given the orange one matching their spacesuit. pic.twitter.com/YvEKDLTSHR
अंतरिक्ष में आईफोन के लिए हैं सख्त नियम
भले ही ये फोन अंतरिक्ष में गए हों, लेकिन इनका इस्तेमाल धरती की तरह बिल्कुल नहीं हो रहा है। अंतरिक्ष में इनके इस्तेमाल के लिए कुछ खास और सख्त नियम बनाए गए हैं। सुरक्षा के लिहाज से पूरी यात्रा के दौरान इन फोंस को एयरप्लेन मोड में ही रखा जाएगा।
ऐसा करना इसलिए बेहद जरूरी है क्योंकि स्मार्टफोन ऐसे सिग्नल छोड़ते हैं जो स्पेसक्राफ्ट के अहम सिस्टम और सेंसर्स में रुकावट पैदा कर सकते हैं। नेटवर्क पूरी तरह से बंद रखने के कारण यह फोन संचार के बजाय सिर्फ एक स्टैंडअलोन डिवाइस के रूप में काम करेगा। इसका मुख्य इस्तेमाल एक शानदार कैमरे और रिकॉर्डिंग टूल की तरह ही किया जाएगा।
रोजमर्रा की तकनीक का बड़ा कदम
भले ही यह एक आम आईफोन जैसा दिखता हो, लेकिन अंतरिक्ष में इसका इस्तेमाल बहुत ही सीमित और कंट्रोल में किया जा रहा है। नासा ने अभी तक यह पूरी तरह से साफ नहीं किया है कि अंतरिक्ष में गए ये फोन कोई खास मॉडिफाइड (बदलाव वाले) वर्जन हैं या वही सामान्य फोन हैं जो हम बाजार से खरीदते हैं। इसके बावजूद, एक बात बिल्कुल साफ है कि अब अंतरिक्ष जैसे बेहद संवेदनशील माहौल में भी छोटे और पावरफुल कंज्यूमर गैजेट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।
आईफोन जैसी आम डिवाइस का अंतरिक्ष में जाना यह साबित करता है कि हमारी रोजमर्रा की तकनीक अब कितनी एडवांस हो चुकी है, और इसी वजह से ये स्पेस मिशन अब आम लोगों को थोड़े और जाने-पहचाने से लगने लगे हैं। हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपका फोन भी सीधे अंतरिक्ष की यात्रा पर जाने के लिए तैयार है! इन सभी डिवाइसेस का इस्तेमाल बेहद सख्त नियमों और निगरानी के तहत किया जा रहा है, क्योंकि किसी भी स्पेस मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा ही सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है।
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