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एआई जनरेटेड रिज्यूमे बने सिरदर्द: 74% रिक्रूटर्स को नहीं मिल रहा सही टैलेंट, LinkedIn की रिपोर्ट में दावा
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Tue, 03 Feb 2026 04:08 PM IST
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सार
LinkedIn: भारत का जॉब मार्केट एक अनोखे संकट से जूझ रहा है। लिंक्डइन की रिपोर्ट के मुताबिक, एआई से बने चमक-धमक वाले रिज्यूमे की बाढ़ ने सही उम्मीदवार चुनना मुश्किल बना दिया है। भर्ती प्रक्रिया तेज होने के बावजूद 74 फीसदी रिक्रूटर्स अब भी सही कैंडिडेट की कमी से परेशान हैं।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : freepik
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विस्तार
LinkedIn की ताजा रिसर्च बताती है कि 2026 में भारत के 74 प्रतिशत रिक्रूटर्स योग्य उम्मीदवार खोजने में संघर्ष कर रहे हैं। यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है, जब देश में हायरिंग गतिविधि महामारी से पहले के स्तर की तुलना में करीब 40 प्रतिशत ज्यादा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, रिक्रूटर्स को पहले से कहीं ज्यादा जॉब एप्लिकेशन मिल रहे हैं, लेकिन उनमें से कई काम के नहीं होते। आधे से ज्यादा रिक्रूटर्स का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जनरेटेड एप्लिकेशन की संख्या बढ़ने से समस्या बढ़ी है। ये एप्लिकेशन देखने में प्रोफेशनल लगते हैं, लेकिन अक्सर उम्मीदवार की असली स्किल्स को सही तरीके से नहीं दिखाते।
सही उम्मीदवार पहचानना हुआ मुश्किल
लिंक्डइन ने रिसर्च में बताया कि करीब आधे रिक्रूटर्स मानते हैं कि फर्जी या कम क्वालिटी वाले एप्लिकेशन को छांटने में काफी समय लग रहा है। इससे हायरिंग प्रोसेस धीमा हो रहा है और फैसले जल्दी लेना मुश्किल हो गया है। रिसर्च के मुताबिक, 2022 के बाद से हर जॉब पोस्ट पर आने वाले आवेदकों की संख्या दोगुनी से ज्यादा हो चुकी है। 72 प्रतिशत प्रोफेशनल नई नौकरी की तलाश में हैं, लेकिन 85 प्रतिशत मानते हैं कि वे हायरिंग प्रोसेस के लिए खुद को पूरी तरह तैयार नहीं महसूस करते।
रिक्रूटर्स ले रहे AI का सहारा
इन दबावों के बीच रिक्रूटर्स खुद AI टूल्स को तेजी से अपना रहे हैं। भारत में AI का इस्तेमाल करने वाले 71 प्रतिशत रिक्रूटर्स का कहना है कि इससे उन्हें ऐसे स्किल्ड उम्मीदवार मिले हैं, जिन्हें वे पहले नजरअंदाज कर सकते थे। वहीं, 80 प्रतिशत मानते हैं कि AI से उम्मीदवारों की वास्तविक क्षमता समझना आसान हुआ है और हायरिंग प्रक्रिया तेज हुई है।
आगे और बढ़ेगा AI का रोल
रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 80 प्रतिशत रिक्रूटर्स इस साल स्क्रीनिंग, कैंडिडेट रिव्यू और टैलेंट सर्च जैसे कामों में AI का इस्तेमाल और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। LinkedIn भारत में AI-आधारित सैलरी और नोटिस पीरियड फिल्टर, तेज शॉर्टलिस्टिंग टूल्स और छोटे व्यवसायों के लिए नए समाधान भी पेश कर रहा है।
लिंक्डइन टैलेंट सॉल्यूशंस की एशिया पैसिफिक वाइस प्रेसिडेंट रुची आनंद के अनुसार, हायरिंग अब डिग्री या कंपनियों के नाम से हटकर वास्तविक स्किल्स और क्षमताओं पर केंद्रित हो रही है। उन्होंने कहा कि बड़े स्तर पर ऐसा करना AI के बिना मुश्किल है और जिम्मेदारी से इस्तेमाल किया जाए तो यह भर्ती प्रक्रिया को ज्यादा निष्पक्ष और प्रभावी बना सकता है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, रिक्रूटर्स को पहले से कहीं ज्यादा जॉब एप्लिकेशन मिल रहे हैं, लेकिन उनमें से कई काम के नहीं होते। आधे से ज्यादा रिक्रूटर्स का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जनरेटेड एप्लिकेशन की संख्या बढ़ने से समस्या बढ़ी है। ये एप्लिकेशन देखने में प्रोफेशनल लगते हैं, लेकिन अक्सर उम्मीदवार की असली स्किल्स को सही तरीके से नहीं दिखाते।
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सही उम्मीदवार पहचानना हुआ मुश्किल
लिंक्डइन ने रिसर्च में बताया कि करीब आधे रिक्रूटर्स मानते हैं कि फर्जी या कम क्वालिटी वाले एप्लिकेशन को छांटने में काफी समय लग रहा है। इससे हायरिंग प्रोसेस धीमा हो रहा है और फैसले जल्दी लेना मुश्किल हो गया है। रिसर्च के मुताबिक, 2022 के बाद से हर जॉब पोस्ट पर आने वाले आवेदकों की संख्या दोगुनी से ज्यादा हो चुकी है। 72 प्रतिशत प्रोफेशनल नई नौकरी की तलाश में हैं, लेकिन 85 प्रतिशत मानते हैं कि वे हायरिंग प्रोसेस के लिए खुद को पूरी तरह तैयार नहीं महसूस करते।
रिक्रूटर्स ले रहे AI का सहारा
इन दबावों के बीच रिक्रूटर्स खुद AI टूल्स को तेजी से अपना रहे हैं। भारत में AI का इस्तेमाल करने वाले 71 प्रतिशत रिक्रूटर्स का कहना है कि इससे उन्हें ऐसे स्किल्ड उम्मीदवार मिले हैं, जिन्हें वे पहले नजरअंदाज कर सकते थे। वहीं, 80 प्रतिशत मानते हैं कि AI से उम्मीदवारों की वास्तविक क्षमता समझना आसान हुआ है और हायरिंग प्रक्रिया तेज हुई है।
आगे और बढ़ेगा AI का रोल
रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 80 प्रतिशत रिक्रूटर्स इस साल स्क्रीनिंग, कैंडिडेट रिव्यू और टैलेंट सर्च जैसे कामों में AI का इस्तेमाल और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। LinkedIn भारत में AI-आधारित सैलरी और नोटिस पीरियड फिल्टर, तेज शॉर्टलिस्टिंग टूल्स और छोटे व्यवसायों के लिए नए समाधान भी पेश कर रहा है।
लिंक्डइन टैलेंट सॉल्यूशंस की एशिया पैसिफिक वाइस प्रेसिडेंट रुची आनंद के अनुसार, हायरिंग अब डिग्री या कंपनियों के नाम से हटकर वास्तविक स्किल्स और क्षमताओं पर केंद्रित हो रही है। उन्होंने कहा कि बड़े स्तर पर ऐसा करना AI के बिना मुश्किल है और जिम्मेदारी से इस्तेमाल किया जाए तो यह भर्ती प्रक्रिया को ज्यादा निष्पक्ष और प्रभावी बना सकता है।
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