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बॉट्स से जंग की तैयारी: OpenAI ला सकता है ‘ह्यूमन-ओनली’ सोशल नेटवर्क, Face ID से होगी पहचान
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Mon, 02 Feb 2026 09:14 AM IST
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सार
ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI जल्द ही अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लॉन्च कर सकती है। इसमें सिर्फ असली इंसान ही अकाउंट बना पाएंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बॉट्स को रोकने के लिए बायोमेट्रिक पहचान जैसे Face ID का इस्तेमाल किया जा सकता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लाएगा OpenAI
- फोटो : AI जनरेटेड
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विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में बड़ा नाम बन चुकी OpenAI अब सोशल मीडिया के मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी एक ऐसे सोशल नेटवर्क पर काम कर रही है, जहां बॉट अकाउंट्स की कोई जगह नहीं होगी। सैम ऑल्टमैन की अगुवाई वाली यह AI कंपनी अपने प्लेटफॉर्म को पूरी तरह “ह्यूमन-ओनली” बनाना चाहती है, ताकि यह X (पहले Twitter), Instagram और TikTok जैसे मौजूदा प्लेटफॉर्म्स से अलग पहचान बना सके।
फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह सोशल नेटवर्क अभी शुरुआती चरण में है और इसे एक छोटे से दल द्वारा विकसित किया जा रहा है, जिसमें 10 से भी कम लोग शामिल हैं। इस प्लेटफॉर्म का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि यहां सिर्फ असली इंसानों को ही अकाउंट बनाने की अनुमति मिलेगी। OpenAI इस प्रोजेक्ट के जरिए ChatGPT और Sora जैसे अपने वायरल एप्स की लोकप्रियता का फायदा उठाना चाहती है।
बॉट्स की समस्या से निपटेगा OpenAI का प्लेटफॉर्म
रिपोर्ट में बताया गया है कि OpenAI इस सोशल नेटवर्क में बायोमेट्रिक पहचान को शामिल करने पर विचार कर रही है। इसके तहत यूजर्स से “प्रूफ ऑफ पर्सनहुड” यानी इंसान होने का प्रमाण मांगा जा सकता है। इसके लिए Apple के Face ID या फिर World Orb का इस्तेमाल हो सकता है।
World Orb एक खास तरह का आईरिस स्कैनर है, जो आंखों की पुतली के जरिए हर व्यक्ति की यूनिक पहचान बनाता है। यह सिस्टम Tools for Humanity नाम की कंपनी चलाती है, जिसे खुद सैम ऑल्टमैन ने स्थापित किया था और वह इसके चेयरमैन भी हैं।
बॉट्स लंबे समय से हैं समस्या का कारण
दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बॉट अकाउंट्स लंबे समय से बड़ी समस्या बने हुए हैं। ये अकाउंट्स अक्सर क्रिप्टोकरेंसी के दाम बढ़ाने, नफरत भरे कंटेंट को फैलाने या पब्लिक ओपिनियन को गुमराह करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। Twitter पर यह समस्या खास तौर पर तब बढ़ी, जब एलन मस्क ने कंपनी खरीदी, इसका नाम X रखा और करीब 80 फीसदी स्टाफ की छंटनी कर दी। इससे ट्रस्ट और सेफ्टी टीम भी कमजोर हुई। हालांकि मस्क ने बॉट्स के खिलाफ अभियान चलाया था और 2025 में करीब 17 लाख बॉट अकाउंट्स हटाए गए, लेकिन इसके बावजूद समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
सैम ऑल्टमैन भी जता चुके हैं नाराजगी
सैम ऑल्टमैन खुद 2008 से X पर सक्रिय यूजर रहे हैं और कई बार बॉट्स को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। सितंबर 2025 में उन्होंने लिखा था कि AI से भरे Twitter और Reddit अब पहले जैसे असली नहीं लगते। हाल ही में उन्होंने ‘डेड इंटरनेट थ्योरी’ का जिक्र करते हुए कहा कि अब सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में AI द्वारा चलाए जा रहे अकाउंट्स नजर आने लगे हैं। nstagram प्रमुख एडम मोसेरी ने भी दिसंबर 2025 में कहा था कि सोशल मीडिया फीड्स धीरे-धीरे “सिंथेटिक कंटेंट” से भरती जा रही हैं।
Facebook और LinkedIn से अलग होगी पहचान
फेसबुक और लिंक्डइन जैसे प्लेटफॉर्म आइडेंटिटी प्रूफ के लिए फोन नंबर, ईमेल और व्यवहारिक संकेतों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन वे बायोमेट्रिक पहचान नहीं अपनाते। OpenAI का तरीका इससे अलग हो सकता है। हालांकि, प्राइवेसी एक्सपर्ट्स ने World Orb जैसी तकनीक पर चिंता जताई है, क्योंकि आईरिस स्कैन बदला नहीं जा सकता और गलत हाथों में पड़ने पर खतरा पैदा कर सकता है।
कब होगा लॉन्च?
फिलहाल यह साफ नहीं है कि OpenAI का यह सोशल नेटवर्क उसके मौजूदा प्रोडक्ट्स से कैसे जुड़ेगा, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूजर्स को AI की मदद से वीडियो और इमेज जैसे कंटेंट बनाने की सुविधा मिल सकती है। अभी इसकी लॉन्च टाइमलाइन तय नहीं है और पब्लिक रिलीज से पहले इसमें कई बदलाव भी हो सकते हैं।
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फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह सोशल नेटवर्क अभी शुरुआती चरण में है और इसे एक छोटे से दल द्वारा विकसित किया जा रहा है, जिसमें 10 से भी कम लोग शामिल हैं। इस प्लेटफॉर्म का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि यहां सिर्फ असली इंसानों को ही अकाउंट बनाने की अनुमति मिलेगी। OpenAI इस प्रोजेक्ट के जरिए ChatGPT और Sora जैसे अपने वायरल एप्स की लोकप्रियता का फायदा उठाना चाहती है।
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बॉट्स की समस्या से निपटेगा OpenAI का प्लेटफॉर्म
रिपोर्ट में बताया गया है कि OpenAI इस सोशल नेटवर्क में बायोमेट्रिक पहचान को शामिल करने पर विचार कर रही है। इसके तहत यूजर्स से “प्रूफ ऑफ पर्सनहुड” यानी इंसान होने का प्रमाण मांगा जा सकता है। इसके लिए Apple के Face ID या फिर World Orb का इस्तेमाल हो सकता है।
World Orb एक खास तरह का आईरिस स्कैनर है, जो आंखों की पुतली के जरिए हर व्यक्ति की यूनिक पहचान बनाता है। यह सिस्टम Tools for Humanity नाम की कंपनी चलाती है, जिसे खुद सैम ऑल्टमैन ने स्थापित किया था और वह इसके चेयरमैन भी हैं।
बॉट्स लंबे समय से हैं समस्या का कारण
दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बॉट अकाउंट्स लंबे समय से बड़ी समस्या बने हुए हैं। ये अकाउंट्स अक्सर क्रिप्टोकरेंसी के दाम बढ़ाने, नफरत भरे कंटेंट को फैलाने या पब्लिक ओपिनियन को गुमराह करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। Twitter पर यह समस्या खास तौर पर तब बढ़ी, जब एलन मस्क ने कंपनी खरीदी, इसका नाम X रखा और करीब 80 फीसदी स्टाफ की छंटनी कर दी। इससे ट्रस्ट और सेफ्टी टीम भी कमजोर हुई। हालांकि मस्क ने बॉट्स के खिलाफ अभियान चलाया था और 2025 में करीब 17 लाख बॉट अकाउंट्स हटाए गए, लेकिन इसके बावजूद समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
सैम ऑल्टमैन भी जता चुके हैं नाराजगी
सैम ऑल्टमैन खुद 2008 से X पर सक्रिय यूजर रहे हैं और कई बार बॉट्स को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। सितंबर 2025 में उन्होंने लिखा था कि AI से भरे Twitter और Reddit अब पहले जैसे असली नहीं लगते। हाल ही में उन्होंने ‘डेड इंटरनेट थ्योरी’ का जिक्र करते हुए कहा कि अब सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में AI द्वारा चलाए जा रहे अकाउंट्स नजर आने लगे हैं। nstagram प्रमुख एडम मोसेरी ने भी दिसंबर 2025 में कहा था कि सोशल मीडिया फीड्स धीरे-धीरे “सिंथेटिक कंटेंट” से भरती जा रही हैं।
Facebook और LinkedIn से अलग होगी पहचान
फेसबुक और लिंक्डइन जैसे प्लेटफॉर्म आइडेंटिटी प्रूफ के लिए फोन नंबर, ईमेल और व्यवहारिक संकेतों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन वे बायोमेट्रिक पहचान नहीं अपनाते। OpenAI का तरीका इससे अलग हो सकता है। हालांकि, प्राइवेसी एक्सपर्ट्स ने World Orb जैसी तकनीक पर चिंता जताई है, क्योंकि आईरिस स्कैन बदला नहीं जा सकता और गलत हाथों में पड़ने पर खतरा पैदा कर सकता है।
कब होगा लॉन्च?
फिलहाल यह साफ नहीं है कि OpenAI का यह सोशल नेटवर्क उसके मौजूदा प्रोडक्ट्स से कैसे जुड़ेगा, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूजर्स को AI की मदद से वीडियो और इमेज जैसे कंटेंट बनाने की सुविधा मिल सकती है। अभी इसकी लॉन्च टाइमलाइन तय नहीं है और पब्लिक रिलीज से पहले इसमें कई बदलाव भी हो सकते हैं।
