Snapchat Layoff: आईटी सेक्टर में थम नहीं रहा ले-ऑफ का सिलसिला, स्नैपचैट करेगा 1 हजार कर्मचारियों की छंटनी
Snapchat Layoff: आईटी सेक्टर में छंटनी का सिलसिला थम नहीं रहा। इसी कड़ी में अब Snapchat की पैरेंट कंपनी Snap Inc ने बड़े पैमाने पर छंटनी का एलान किया है। इसमें कंपनी करीब 16% यानी लगभग 1 हजार कर्मचारियों को निकालने की तैयारी में है। इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह एआई का बढ़ता इस्तेमाल और खर्चों में कटौती है। कंपनी का दावा है कि इस कदम से वह हर साल करीब 4,100 करोड़ की बचत कर पाएगी।
विस्तार
टेक्नोलॉजी की दुनिया में लगातार नौकरियों में कटौती का सिलसिला जारी है। अब इस लिस्ट में स्नैपचैट की पैरेंट कंपनी Snap का नाम भी जुड़ गया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी अपनी वर्कफोर्स के 16% यानी करीब 1 हजार कर्मचारियों को निकालने की तैयारी में है। साथ ही, भविष्य के लिए खुली सैकड़ों नौकरियों की भर्तियों को भी रद्द करने का विचार है। इस छंटनी की तैयारी के पीछे सबसे बड़ा कारण तेजी से बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स को बताया जा रहा है। वर्ष 2022 के बाद से कंपनी में लगातार हो रही छंटनी के सिलसिले में यह एक और बड़ा कदम है।
आखिर क्यों हो रही है इतनी बड़ी छंटनी?
इस बार कर्मचारियों को निकाले जाने के पीछे खर्चों में कटौती और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का बढ़ता इस्तेमाल सबसे बड़ी वजहें हैं। दरअसल, स्नैपचैट की पैरेंट कंपनी स्नैप अब बड़ी टीमों के बजाय छोटी और ज्यादा फोकस टीमों के साथ काम करना चाहती है। कंपनी के अंदर होने वाले कई अहम काम, अब इंसानों की जगह तेजी से एआई टूल्स की मदद से किए जा रहे हैं।
यही वजह है कि नई भर्तियां करने के बजाय कंपनी अपने काम करने के पूरे तरीके को ही बदल रही है और सैकड़ों खाली पड़े पदों को हमेशा के लिए बंद किया जा रहा है। आसान शब्दों में कहें तो इसका सीधा मतलब यह है कि जो काम पहले कई लोग मिलकर करते थे, अब उसे कुछ ही लोगों की टीम एआई की मदद से आसानी से पूरा कर लेगी।
निवेशकों का दबाव और AR ग्लास का नुकसान
सिर्फ एआई ही इस छंटनी की इकलौती वजह नहीं है, बल्कि कंपनी के कामकाज को लेकर निवेशकों का भी भारी दबाव है। दरअसल, निवेशक लगातार यह मांग कर रहे हैं कि कंपनी अपने फालतू खर्चों पर लगाम लगाए और मुनाफा बढ़ाने पर ध्यान दे।
इसके अलावा, स्नैप ने अपने AR (ऑगमेंटेड रियलिटी) स्मार्ट ग्लास जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स पर पानी की तरह पैसा बहाया था, लेकिन बाजार में उसे वैसी सफलता नहीं मिली जैसी उम्मीद की जा रही थी। भारी निवेश के बावजूद मनमाफिक रिटर्न न मिलने और निवेशकों के दबाव के कारण ही अब कंपनी को मजबूरन अपने ऑपरेशंस को सख्त करना पड़ रहा है।
Snap का आगे का क्या प्लान है?
इस पूरी छंटनी और रीस्ट्रक्चरिंग के जरिए कंपनी असल में अपने भविष्य की पुख्ता तैयारी कर रही है। स्नैप का अनुमान है कि इन कड़े बदलावों के पूरी तरह से लागू होने के बाद, वे हर साल करीब 4,100 करोड़ रुपये से ज्यादा की भारी-भरकम बचत कर पाएंगे।
इसके साथ ही, कंपनी एक नए वर्किंग मॉडल की तरफ भी तेजी से कदम बढ़ा रही है। अब स्नैप का पूरा फोकस एक ऐसा 'तेज और अधिक कुशल' सिस्टम बनाने पर है, जहां छोटी टीमें एआई टूल्स की ताकत का इस्तेमाल करके पहले से कहीं ज्यादा और बेहतर काम कर सकें।
छंटनी के जरिए खुद को 'रिसेट' कर रही कंपनी
कंपनी ने खुद इस बात को माना है कि एक साथ इतने सारे लोगों को निकालने के बाद कामकाज में यह बदलाव इतना आसान नहीं होने वाला है। वैसे, देखा जाए तो स्नैपचैट इस रेस में अकेला नहीं है। पूरी टेक इंडस्ट्री में इस वक्त यही ट्रेंड चल रहा है कि कर्मचारियों की संख्या कम करो और एआई पर अपना निवेश बढ़ाओ। स्नैप के लिए यह कदम सिर्फ एक छंटनी नहीं है, बल्कि खुद को एक बार फिर से 'रीसेट' करने का एक तरीका है। हालांकि, अब देखना यह होगा कि क्या छोटी टीमों और एआई के भरोसे आगे बढ़ने का यह बड़ा दांव लंबे समय में कंपनी को सचमुच फायदा पहुंचाएगा? इसका सटीक जवाब तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
सिर्फ Snap नहीं, पूरी टेक इंडस्ट्री का है यही हाल
स्नैपचैट का यह कदम टेक इंडस्ट्री के एक बड़े ट्रेंड का हिस्सा भर है। इस साल अमेजन, मेटा, ब्लॉक, पिंटरेस्ट और एटलासियन जैसी कई दिग्गज कंपनियों ने भी सामूहिक रूप से हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है। इन सभी कंपनियों के अधिकारियों के बयानों पर गौर करें तो स्थिति काफी हद तक एक जैसी ही नजर आती है। दरअसल, एआई टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल के कारण अब कंपनियों को कोडिंग या अन्य तकनीकी कामों के लिए पहले जितने कर्मचारियों की जरूरत नहीं रह गई है।
इसके अलावा, एआई टेक्नोलॉजी के विकास और उसमें अरबों डॉलर के भारी निवेश के लिए कंपनियों को अपने बाकी विभागों में खर्च में कटौती करनी पड़ रही है, जिसका सीधा असर कर्मचारियों की नौकरियों पर पड़ रहा है।
इस तेजी से बदलते माहौल को लेकर एक्स के पूर्व प्रमुख और ब्लॉक के मौजूदा सीईओ जैक डोर्सी ने भी एक बड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि एआई टूल्स ने कंपनियों को बनाने और चलाने का तरीका बुनियादी रूप से बदल कर रख दिया है। डोर्सी ने यह भी अंदेशा जताया है कि यह सिलसिला शायद यहीं नहीं रुकेगा, बल्कि आने वाले साल में टेक इंडस्ट्री की ज्यादातर कंपनियों में इस तरह की और भी छंटनियां देखने को मिल सकती हैं।
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