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Meta को यूरोपीय आयोग की फटकार: WhatsApp पर AI फीस नियमों के खिलाफ, थर्ड-पार्टी एक्सेस बहाल करने का आदेश
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Thu, 16 Apr 2026 12:00 PM IST
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सार
WhatsApp AI assistant controversy: यूरोपीय आयोग ने मेटा पर कड़ा रुख अपनाया है। यूरोपियन कमिशन ने दिग्गज कंपनी मेटा को अधिकारिक तौर पर चेतावनी और संकेत दिए हैं कि कंपनी को अपने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप में किए गए हालिया बदलाव वापस लेने पड़ सकते हैं। जानें क्या है ये पूरा विवाद...
WhatsApp
- फोटो : FREEPIK
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विस्तार
Meta WhatsApp business policy : यूरोपीय आयोग ने मेटा को आदेश दिया है कि वह व्हाट्सएप बिजनेस पर थर्ड-पार्टी एआई असिस्टेंट्स के लिए वही पुरानी फ्री एक्सेस लाए, जो 15 अक्तूबर 2025 से पहले थी। इसमें आयोग का तर्क है कि नई फीस नीति का मकसद प्रतिद्वंद्वी एआई कंपनियों को मार्केट से बाहर करना है। वहीं, दूसरी तरफ मेटा का कहना है कि आयोग की इस जिद से छोटे व्यापारियों पर बड़े एआई कंपनियों जैसे ओपनएआई का खर्च बढ़ सकता है, जो उनके लिए नुकसानदेह है।
Third-party AI chatbots on WhatsApp: आखिर झगड़ा क्या है?
दरअसल, मेटा ने मार्च में एलान किया था कि वह थर्ड-पार्टी एआई चैटबॉट्स को व्हाट्सएप बिजनेस पर फीस देने के बाद ही अनुमति देगा, लेकिन यूरोपीय आयोग को यह पसंद नहीं आया।
इसपर आयोग का कहना है यह एक्सेस फीस केवल प्रतिस्पर्धा खत्म करने के लिए लगाई गई है, जिससे व्हाट्सएप पर केवल मेटा का अपना एआई राज कर सके, उन्होंने कहा यह ईयू यानी कि यूरोपियन यूनियन के निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा नियमों के खिलाफ है।
आयोग की बातों का जवाब देते हुए मेटा कंपनी के प्रवक्ता ने तर्क में एक सवाल पूछा, उन्होंने कहा कि क्या आप चाहते हैं कि फ्रांस की एक छोटी सी बेकरी, जो सिर्फ क्रोइसांट के ऑर्डर लेने के लिए हमारी सर्विस का इस्तेमाल कर रही है, वह ओपनएआई जैसे बड़े ब्रांड्स का भारी-भरकम बिल भी भरे? छोटे यूरोपीय बिजनेस को बड़े टेक दिग्गजों का खर्च नहीं उठाना चाहिए।
इटली में भी शुरू हुई जांच
बढ़ते तकरार के बीच यह मामला अब सिर्फ यूरोपियन कमिशन तक सीमित नहीं रहा। इटली में भी इस मुद्दे पर जांच तेजी हो गई है, यहां का कॉम्पिटिशन वॉचडॉग पहले से ही मेटा की नीतियों पर नजर रखे हुए है। ऐसे में अब इस मामले का यूरोपीय स्तर पर और विस्तार देने की कोशिश की जा रही है, इससे साफ है कि रेगुलेटर्स इसे गंभीरता से ले रहे हैं और बड़े स्तर पर कार्रवाई की तैयारी में हैं।
एक्सपर्ट्स का क्या मानना है?
यह मुद्दा सिर्फ व्हाट्सएप तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे एआई इकोसिस्टम से जुड़ा हुआ है। इसमें एआई मार्केट में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनाए रखना, बड़ी टेक कंपनियों की बढ़ती ताकत पर नियंत्रण और छोटे स्टार्टअप्स व डेवलपर्स को बराबरी का मौका देना जैसे अहम पहलू शामिल हैं। अगर यूरोपियन कमिशन सख्त कदम उठाता है, तो आने वाले समय में बिग टेक और रेगुलेटर्स के बीच टकराव और तेज होने की पूरी संभावना है।
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दरअसल, मेटा ने मार्च में एलान किया था कि वह थर्ड-पार्टी एआई चैटबॉट्स को व्हाट्सएप बिजनेस पर फीस देने के बाद ही अनुमति देगा, लेकिन यूरोपीय आयोग को यह पसंद नहीं आया।
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इसपर आयोग का कहना है यह एक्सेस फीस केवल प्रतिस्पर्धा खत्म करने के लिए लगाई गई है, जिससे व्हाट्सएप पर केवल मेटा का अपना एआई राज कर सके, उन्होंने कहा यह ईयू यानी कि यूरोपियन यूनियन के निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा नियमों के खिलाफ है।
आयोग की बातों का जवाब देते हुए मेटा कंपनी के प्रवक्ता ने तर्क में एक सवाल पूछा, उन्होंने कहा कि क्या आप चाहते हैं कि फ्रांस की एक छोटी सी बेकरी, जो सिर्फ क्रोइसांट के ऑर्डर लेने के लिए हमारी सर्विस का इस्तेमाल कर रही है, वह ओपनएआई जैसे बड़े ब्रांड्स का भारी-भरकम बिल भी भरे? छोटे यूरोपीय बिजनेस को बड़े टेक दिग्गजों का खर्च नहीं उठाना चाहिए।
इटली में भी शुरू हुई जांच
बढ़ते तकरार के बीच यह मामला अब सिर्फ यूरोपियन कमिशन तक सीमित नहीं रहा। इटली में भी इस मुद्दे पर जांच तेजी हो गई है, यहां का कॉम्पिटिशन वॉचडॉग पहले से ही मेटा की नीतियों पर नजर रखे हुए है। ऐसे में अब इस मामले का यूरोपीय स्तर पर और विस्तार देने की कोशिश की जा रही है, इससे साफ है कि रेगुलेटर्स इसे गंभीरता से ले रहे हैं और बड़े स्तर पर कार्रवाई की तैयारी में हैं।
एक्सपर्ट्स का क्या मानना है?
यह मुद्दा सिर्फ व्हाट्सएप तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे एआई इकोसिस्टम से जुड़ा हुआ है। इसमें एआई मार्केट में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनाए रखना, बड़ी टेक कंपनियों की बढ़ती ताकत पर नियंत्रण और छोटे स्टार्टअप्स व डेवलपर्स को बराबरी का मौका देना जैसे अहम पहलू शामिल हैं। अगर यूरोपियन कमिशन सख्त कदम उठाता है, तो आने वाले समय में बिग टेक और रेगुलेटर्स के बीच टकराव और तेज होने की पूरी संभावना है।
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