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सोशल मीडिया पर बैन की तैयारी में पोलैंड: तय हो सकती है 15 साल की उम्र सीमा, सख्त एज वेरिफिकेशन भी होगा लागू
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Fri, 27 Feb 2026 03:33 PM IST
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सार
15 years social media restriction: यूरोप में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है। पोलैंड की सरकार 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। प्रस्तावित कानून के तहत प्लेटफॉर्म्स को ही यूजर्स की उम्र की सख्त जांच करनी होगी, वरना भारी जुर्माना झेलना पड़ेगा।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : adobe stock
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विस्तार
पोलैंड की शिक्षा मंत्री बारबरा नोवाका ने एक इंटरव्यू में संकेत दिया कि सरकार एक नया विधेयक लाने जा रही है, जिसके तहत 15 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से दूर रखा जाएगा। ये प्रस्ताव सत्तारूढ़ दल सिविक कोएलिशन की ओर से पेश किया जाएगा। ड्राफ्ट में साफ कहा गया है कि अगर कोई प्लेटफॉर्म कम उम्र के बच्चों को एक्सेस देता पाया गया, तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि जुर्माने की राशि पर अभी चर्चा जारी है। सरकार का तर्क है कि बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य और बौद्धिक विकास पर सोशल मीडिया का नकारात्मक असर दिख रहा है। इसी वजह से यह कदम उठाया जा रहा है।
कब से लागू हो सकता है कानून?
सरकारी योजना के अनुसार यह कानून 2027 की शुरुआत तक लागू किया जा सकता है। इससे प्लेटफॉर्म्स को अपने सिस्टम में बड़े तकनीकी बदलाव करने होंगे, खासकर उम्र सत्यापन (Age Verification) के क्षेत्र में।
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क्यों जरूरी है यह प्रतिबंध?
शिक्षा मंत्री ने इसके पीछे दो प्रमुख कारण बताए हैं:
मानसिक स्वास्थ्य: सोशल मीडिया की वजह से बच्चों में एंग्जायटी और डिप्रेशन बढ़ रहा है।
बौद्धिक गिरावट: स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चों की सोचने-समझने और सीखने की क्षमता (Cognitive Abilities) में कमी आ रही है।
टेक कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?
यह कदम अमेरिकी टेक दिग्गजों जैसे मेटा और एक्स के लिए चुनौती बन सकता है। पिछले साल ऑस्ट्रेलिया ने ऐसा ही प्रतिबंध लागू किया था, तब तकस कुछ टेक कंपनियों ने इसका विरोध किया था। ऐसे में पोलैंड का प्रस्ताव यूरोप और अमेरिका के बीच डिजिटल नीतियों को लेकर नए तनाव को जन्म दे सकता है।
ये भी पढ़े: '16 घंटे एप चलाना लत नहीं': कोर्ट में बोले Instagram के सीईओ, दलील सुन भड़के माता-पिता
क्यों बढ़ रही है सख्ती?
टेक एक्सपर्ट कहते हैं कि बच्चों के सोशल मीडिया के प्रयोग से अत्यधिक स्क्रीन टाइम, सोशल मीडिया की लत, साइबर बुलिंग और फेक कंटेंट और एल्गोरिदमिक मैनिपुलेशन बढ़ते है। फिर ये सभी कारक किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालते हैं। कई शोधों में यह भी सामने आया है कि कम उम्र में सोशल मीडिया उपयोग से एकाग्रता और शैक्षणिक प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। अगर ये कानून पारित हो जाता है, तो प्लेटफॉर्म्स को मजबूत डिजिटल आईडी या बायोमेट्रिक आधारित उम्र सत्यापन सिस्टम लाना पड़ सकता है। यूरोप में डिजिटल रेगुलेशन और सख्त हो सकता है और अन्य देश भी इसी मॉडल को अपनाने पर विचार कर सकते हैं।
मेटा पर बढ़ता कानूनी दबाव
मेटा प्लेटफॉर्म्स, जो फेसबुक और इंस्टाग्राम की मालिक है, पर दुनियाभर में आरोप लग रहे हैं कि उसके प्लेटफॉर्म युवा यूजर्स के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अमेरिका में कंपनी पर हजारों मुकदमे चल रहे हैं, जिनमें आरोप है कि मेटा ने जानबूझकर अपने एप्स को नशे की तरह लत लगाने वाला बनाया है, जिससे नाबालिगों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
इन आरोपों के जवाब में इंस्टाग्राम प्रमुख एडम मोसेरी का तर्क है कि ज्यादातर आपत्तिजनक सामग्री प्राइवेट मैसेज के जरिए भेजी जाती है। उनके अनुसार, कंपनी के लिए चुनौती यह है कि वे सुरक्षा के नाम पर लोगों के निजी मैसेज नहीं पढ़ सकते क्योंकि इससे यूजर्स की प्राइवेसी का उल्लंघन होगा।
बढ़ते दबाव के चलते मेटा ने नीतियों में किए बदलाव
हालांकि, बढ़ते दबाव के बीच 2025 के अंत में मेटा ने अपनी नीतियों में कुछ कड़े बदलाव किए हैं। कंपनी ने अब एआई (AI) द्वारा तैयार की गई आपत्तिजनक या यौन सामग्री को पूरी तरह से हटाने का वादा किया है, बशर्ते वह मेडिकल या शैक्षिक उद्देश्य के लिए न हो। मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन का कहना है कि कंपनी सुरक्षा के क्षेत्र में प्रगति कर रही है और इसे और बेहतर बनाने के लिए लगातार काम जारी है।
दुनियाभर में बढ़ रही है सोशल मीडिया पर सख्ती
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कब से लागू हो सकता है कानून?
सरकारी योजना के अनुसार यह कानून 2027 की शुरुआत तक लागू किया जा सकता है। इससे प्लेटफॉर्म्स को अपने सिस्टम में बड़े तकनीकी बदलाव करने होंगे, खासकर उम्र सत्यापन (Age Verification) के क्षेत्र में।
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क्यों जरूरी है यह प्रतिबंध?
शिक्षा मंत्री ने इसके पीछे दो प्रमुख कारण बताए हैं:
मानसिक स्वास्थ्य: सोशल मीडिया की वजह से बच्चों में एंग्जायटी और डिप्रेशन बढ़ रहा है।
बौद्धिक गिरावट: स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चों की सोचने-समझने और सीखने की क्षमता (Cognitive Abilities) में कमी आ रही है।
टेक कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?
यह कदम अमेरिकी टेक दिग्गजों जैसे मेटा और एक्स के लिए चुनौती बन सकता है। पिछले साल ऑस्ट्रेलिया ने ऐसा ही प्रतिबंध लागू किया था, तब तकस कुछ टेक कंपनियों ने इसका विरोध किया था। ऐसे में पोलैंड का प्रस्ताव यूरोप और अमेरिका के बीच डिजिटल नीतियों को लेकर नए तनाव को जन्म दे सकता है।
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क्यों बढ़ रही है सख्ती?
टेक एक्सपर्ट कहते हैं कि बच्चों के सोशल मीडिया के प्रयोग से अत्यधिक स्क्रीन टाइम, सोशल मीडिया की लत, साइबर बुलिंग और फेक कंटेंट और एल्गोरिदमिक मैनिपुलेशन बढ़ते है। फिर ये सभी कारक किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालते हैं। कई शोधों में यह भी सामने आया है कि कम उम्र में सोशल मीडिया उपयोग से एकाग्रता और शैक्षणिक प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। अगर ये कानून पारित हो जाता है, तो प्लेटफॉर्म्स को मजबूत डिजिटल आईडी या बायोमेट्रिक आधारित उम्र सत्यापन सिस्टम लाना पड़ सकता है। यूरोप में डिजिटल रेगुलेशन और सख्त हो सकता है और अन्य देश भी इसी मॉडल को अपनाने पर विचार कर सकते हैं।
मेटा पर बढ़ता कानूनी दबाव
मेटा प्लेटफॉर्म्स, जो फेसबुक और इंस्टाग्राम की मालिक है, पर दुनियाभर में आरोप लग रहे हैं कि उसके प्लेटफॉर्म युवा यूजर्स के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अमेरिका में कंपनी पर हजारों मुकदमे चल रहे हैं, जिनमें आरोप है कि मेटा ने जानबूझकर अपने एप्स को नशे की तरह लत लगाने वाला बनाया है, जिससे नाबालिगों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
इन आरोपों के जवाब में इंस्टाग्राम प्रमुख एडम मोसेरी का तर्क है कि ज्यादातर आपत्तिजनक सामग्री प्राइवेट मैसेज के जरिए भेजी जाती है। उनके अनुसार, कंपनी के लिए चुनौती यह है कि वे सुरक्षा के नाम पर लोगों के निजी मैसेज नहीं पढ़ सकते क्योंकि इससे यूजर्स की प्राइवेसी का उल्लंघन होगा।
बढ़ते दबाव के चलते मेटा ने नीतियों में किए बदलाव
हालांकि, बढ़ते दबाव के बीच 2025 के अंत में मेटा ने अपनी नीतियों में कुछ कड़े बदलाव किए हैं। कंपनी ने अब एआई (AI) द्वारा तैयार की गई आपत्तिजनक या यौन सामग्री को पूरी तरह से हटाने का वादा किया है, बशर्ते वह मेडिकल या शैक्षिक उद्देश्य के लिए न हो। मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन का कहना है कि कंपनी सुरक्षा के क्षेत्र में प्रगति कर रही है और इसे और बेहतर बनाने के लिए लगातार काम जारी है।
दुनियाभर में बढ़ रही है सोशल मीडिया पर सख्ती
- दिसंबर 2025 में ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने ऑनलाइन सेफ्टी अमेंडमेंट एक्ट को लागू किया है। इसके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है।
- डेनमार्क की असेंबली ने नवंबर 2025 में 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर प्रतिबंध लगाने का समझौता किया गया। हालांकि, 13-14 साल के बच्चों को माता-पिता की अनुमति से छूट देने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
- इस साल जनवरी में फ्रांस की नेशनल असेंबली ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने का बिल पास किया।
- मलेशियाई सरकार ने भी सभी प्लेटफॉर्म्स को 16 साल से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं के लिए बैन करने का प्रस्ताव रखा है। वहीं, स्पेन ने भी 16 साल से कम उम्र के नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस बंद करने की योजना की घोषणा की है।
- ग्रीस और स्लोवेनिया भी 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने का बिल ला सकते हैं। वहीं, नॉर्वे में सोशल मीडिया के लिए सहमति की उम्र 13 से बढ़ाकर 15 करने का प्रस्ताव रखा गया है।
- भारत के आर्थिक सर्वेक्षण 2026-27 में बच्चों और किशोरों में बढ़ती सोशल मीडिया की लत पर चिंता जताई गई है। सर्वेक्षण में सोशल मीडिया एप्स के लिए उम्र के हिसाब से सीमाएं तय करने और प्लेटफॉर्म्स को सख्त नियम लागू करने की सिफारिश की गई है।
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