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AI ने एक झटके में खत्म कर दिया चमकता हुआ स्टार्टअप: फाउंडर ने X पर बयां किया दर्द, वायरल हुआ पोस्ट

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitish Kumar Updated Fri, 27 Feb 2026 04:38 PM IST
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सार

एआई सेक्टर में बड़ी कंपनियों की एक चाल छोटे स्टार्टअप्स पर भारी पड़ रही है। सैन फ्रांसिस्को की एक फाउंडर ने दावा किया है कि Anthropic के नए फीचर के आने के बाद उनका तेजी से बढ़ता एड-ऑटोमेशन स्टार्टअप अचानक संकट में आ गया।

san Francisco startup founder reveals her business went outdated overnight due to anthropic new ai model
एआई से खतरे में स्टार्टअप्स - फोटो : @irabukht/X
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विस्तार

एआई की दुनिया में बड़े खिलाड़ियों की एक चाल कैसे छोटे स्टार्टअप्स की कमर तोड़ सकती है, हाल ही में इसका ताजा उदाहरण सामने आया है। एक तेजी से बढ़ते एआई स्टार्टअप के फाउंडर ने बताया कि कैसे एक नए फीचर ने उनके पूरे बिजनेस मॉडल को रातों-रात बेकार बना दिया।
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सैन फ्रांसिस्कों की एक स्टार्टअप फाउंडर ने एक्स (X) पर दावा किया कि एंथ्रोपिक के एक नए टूल ने रातों-रात उनके बिजनेस को ही खत्म कर दिया। स्टार्टअप की फाउंडर इरा बोडनर ने बताया कि उनकी कंपनी का काम अपने कस्टमर्स के लिए विज्ञापनों को एआई के जरिए मैनेज और ऑटोमेट करना था। इस स्टार्टअप को खड़ा करने में उन्होंने महीनों मेहनत की थी। उनकी कंपनी ने सिर्फ दो महीनों में सैकड़ों पेड ग्राहक जोड़ लिए थे। ग्रोथ तेज थी और कंपनी का अपने ग्राहकों को रिटेन करने का रेट करीब 70% था।
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"सुबह तक खत्म हो चुका था स्टार्टअप"
इरा ने आगे जो बताया वह स्टार्टअप कंपनियों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि उनकी सर्विस ग्राहकों को यह सर्विस काफी पसंद आ रही थी क्योंकि यह उनका घंटों का काम मिनटों में कर रहा था। लेकिन, मुसीबत तब शुरू हुई जब Claude और Manus दोनों ने Meta Ads के लिए अपने नए कनेक्टर्स लॉन्च कर दिए। इससे उनका पूरा बिजनेस मॉडल ही एक झटके में आउटडेट हो गया।
 

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हालांकि, फाउंडर ने बताया कि फिलहाल Claude सीधे विज्ञापन अकाउंट में बदलाव नहीं कर सकता, बल्कि सिर्फ डेटा एनालिसिस तक सीमित है। साथ ही, उसे अभी Google Ads का एक्सेस भी हासिल नहीं है। लेकिन उनका मानना है कि आने वाले कुछ महीनों में ये सीमाएं भी खत्म हो सकती हैं। ऐसे में उनका कहना है कि अब इस क्षेत्र में नया प्रोडक्ट बनाना बेकार जैसा महसूस हो रहा है। 

यह मामला दिखाता है कि AI की दुनिया में प्रतिस्पर्धा कितनी तेज है। एक नया फीचर न सिर्फ मार्केट बदल सकता है, बल्कि पूरी प्रोडक्ट कैटेगरी को भी चुनौती दे सकता है।

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एआई से ऑटोमेट को रहे कई काम - फोटो : एआई जनरेटेड
बिजनेस को तेजी से बदल रहा है एआई
हाल ही में एंथ्रोपिक ने क्लाउड कोवर्क (Claude Cowork) ओपन-सोर्स एआई असिस्टेंट लॉन्च किया, जिससे अमेरिका और भारत आईटी कंपनियों के शेयर एक झटके में धड़ाम हो गए। हालात इतने खराब थे कि अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनी आईबीएम के शेयर 13% टूट गए। इससे आईटी कंपनियों में निवेशकों के लगे लाखों करोड़ रुपये स्वाहा हो गए। इस धक्के से बाजार संभला नहीं था कि कुछ दिनों बाद एंथ्रोपिक ने दूसरा एआई टूल 'क्लाउड कोड सिक्योरिटी' पेश कर दिया। इससे एक बार फिर बाजार में जबरदस्त गिरावट आई। इस टूल को खासतौर पर सॉफ्टवेयर और नेटवर्क को AI-आधारित साइबर हमलों से बचाने के लिए तैयार किया गया था।

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ये दोनों टूल एआई के जरिए उन सर्विसेज के लिए ऑटोमेशन प्रदान करती हैं, जिसके लिए अभी तक कंपनियां करोड़ों डॉलर खर्च करती हैं। इससे आईटी कंपनियों के पूरे बिजनेस मॉडल के लड़खड़ाने का डर है। सरल भाषा में समझें तो वह काम जो आईटी कंपनियां करती हैं, उसे अब ये नए एआई टूल्स बेहद मामूली खर्च में कर सकते हैं। इससे निवेशकों में आईटी कंपनियों के भविष्य को लेकर डर बैठ गया है और इसी वजह से बाजार में भारी उथल-पुथल का माहौल है।

तो क्या एआई से आईटी कंपनियों का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा? दरअसल, इस सवाल का जवाब थोड़ा पेचीदा है। एआई के वजह से काम करने के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। कहें तो पारंपरिक तरीके अब आउटडेटेड हो रहे हैं। ऐसे में कंपनियों को अपना अस्तित्व बचाने के लिए नए तौर-तरीकों को अपना होगा। इस बात को झुठलाया नहीं जा सकता कि ऐआई के वजह से कई तरह नौकरियां खत्म होंगी, लेकिन नई तकनीक के साथ नई नौकरियों की संभावनाएं भी पैदा होंगी।

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