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AI चैटबॉट को गुमराह कर मैक्सिको में सरकारी डेटा की चोरी: हैकर्स ने Claude-ChatGPT से ली मदद, 150GB डेटा लीक

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitish Kumar Updated Fri, 27 Feb 2026 02:53 PM IST
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सार

AI Used In Hacking: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब साइबर अपराधियों के लिए बड़ा हथियार बनता जा रहा है। एक हैकर ने एआई चैटबॉट क्लाउड की मदद से मैक्सिको की कई सरकारी एजेंसियों को निशाना बनाकर 150GB संवेदनशील डेटा चुरा लिया। इस खुलासे ने एआई टूल्स की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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एआई से बढ़ रहे साइबर हमले - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार

साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स ने दावा किया है कि एक अज्ञात हैकर ने एंथ्रोपिक (Anthropic) के एआई चैटबॉट क्लाउड (Claude) का इस्तेमाल करते हुए मैक्सिको की कई सरकारी वेबसाइटों और नेटवर्क में सेंध लगाकर अहम जानकारियां चुरा ली हैं।। इस हमले में करीब 150 गीगाबाइट (GB) संवेदनशील डेटा चोरी होने का दावा किया गया है।
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हैकर के जाल में ऐसे फंसा एआई
इजरायली साइबर स्टार्टअप गैंबिट सिक्योरिटी द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, हैकर ने स्पेनिश भाषा में क्लाउड को निर्देश दिए। उसने चैटबॉट को एक हैकर की तरह काम करने को कहा और उसे यह बोलकर झांसा दिया कि वह किसी 'बग बाउंटी' प्रोग्राम में काम कर रहा है। इससे एआई को लगा कि वह एक कानूनी और नेक काम में मदद कर रहा है, और इस तरह वह हैकर के जाल में फंस गया। इसके बाद हैकर एआई को सरकारी वेबसाइट्स की कमजोरियां खोजने, उसके लिए स्क्रिप्ट तैयार करने और डेटा चोरी की प्रक्रिया को ऑटोमेट करने का कमांड दिया।
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कंपनी के शोधकर्ताओं ने बताया कि वे ऑनलाइन हैकर गतिविधियों की निगरानी कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कुछ बातचीत और तकनीकी सबूत मिले, जिनसे मैक्सिको की सरकारी प्रणालियों में घुसपैठ का संकेत मिला।

करोड़ों लोगों के अहम दस्तावेज हुए चोरी
रिपोर्ट के मुताबिक, चोरी हुए डेटा में लगभग 19 करोड़ टैक्सपेयर्स के रिकॉर्ड, मतदाता सूची से जुड़ी जानकारी, सरकारी कर्मचारियों की पहचान संबंधी दस्तावेज और सिविल रजिस्ट्री फाइलों की जानकारियां शामिल थी। हमला दिसंबर में शुरू हुआ और करीब एक महीने तक चलता रहा।

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हैकर्स ने सरकारी संस्थानों को बनाया निशाना
रिसर्च में दावा किया गया है कि हैकर ने मैक्सिको के संघीय कर प्राधिकरण और राष्ट्रीय चुनाव संस्थान को निशाना बनाया। इसके अलावा जलिस्को, मिचोआकान और तामाउलिपास राज्यों की सरकारी प्रणालियां, मैक्सिको सिटी की सिविल रजिस्ट्री और मॉन्टेरी की जल आपूर्ति एजेंसी भी प्रभावित बताई गईं। हालांकि कई सरकारी एजेंसियों ने किसी बड़े डेटा लीक से इनकार किया है और सुरक्षा मजबूत करने का दावा किया है।

ChatGPT का भी लिया सहारा
रिपोर्ट के अनुसार, जब क्लाउड से पर्याप्त जानकारी नहीं मिली तो हैकर ने OpenAI के चैटजीपीटी का सहारा लिया। चैटजीपीटी से नेटवर्क में आगे बढ़ने, जरूरी क्रेडेंशियल्स पहचानने और पकड़े जाने की संभावना का आकलन करने जैसे सवाल पूछे गए। OpenAI ने बयान में कहा कि उसकी नीतियों का उल्लंघन करने की कोशिश करने वाले अकाउंट्स को बैन कर दिया गया है।

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एआई चैटबॉट्स की कमियां बन रही गलत इस्तेमाल की वजह  - फोटो : फ्रीपिक
एंथ्रोपिक ने हैकरों के अकाउंट किए बंद
फिलहाल एंथ्रोपिक ने जांच के बाद संबंधित अकाउंट्स बंद कर दिए और कहा कि कंपनी ऐसे मामलों से सीख लेकर अपने मॉडल को और मजबूत करती है। उसका नया मॉडल Claude Opus 4.6 दुरुपयोग रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा फीचर्स के साथ आता है।

एआई चैटबॉट्स की कमियां बन रही गलत इस्तेमाल की वजह 
फिलहाल यह साफ नहीं है कि चोरी किए गए डेटा का उपयोग किस मकसद से किया जाएगा। लेकिन इतने बड़े पैमाने पर सरकारी कर्मचारियों और नागरिकों की पहचान संबंधी जानकारी लीक होना भविष्य में बड़े साइबर अपराध या जासूसी गतिविधियों का कारण बन सकता है। इस मामले से यह भी साबित होता है कि एआई चैटबॉट्स की खामियों किस तरह हैकिर्स के लिए हथियार बनते जा रहे हैं। इनसे हैकिंग की घटनाओं को अंजाम देना हैकर्स के लिए काफी आसान हो गया है।

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एक तरफ एआई कंपनियां जहां उन्नत टूल्स बना रही हैं, वहीं साइबर अपराधी भी नई तकनीकों का फायदा उठाने के तरीके खोज रहे हैं। यह घटना डिजिटल दुनिया के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

एआई से और भी तेज और खतरनाक हुए साइबर हमले
साल 2025 में चीनी हैकर्स ने क्लाउड जैसे एआई मॉडल का उपयोग करके दुनिया भर की लगभग 30 बड़ी कंपनियों और सरकारी एजेंसियों पर हमले की कोशिश की। यह बिना मानवीय हस्तक्षेप के बड़े पैमाने पर किया गया पहला साइबर हमला माना जाता है। प्रमुख साइबर सिक्योरिटी कंपनी CrowdStrike की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, एआई की मदद से हैकर्स के सिस्टम में घुसने और डेटा चोरी करने की गति अब औसतन केवल 29 मिनट रह गई है।

2024 की तुलना में 2025 में एआई-बेस्ड साइबर हमलों में 89% की वृद्धि देखी गई है। रिपोर्ट बताती है कि मौजूदा समय में लगभग हर 6 में से 1 डेटा चोरी के मामले में एआई टूल्स का इस्तेमाल हो रहा है। एआई के वजह से अब फिशिंग जैसे साइबर हमले और अधिक पेशेवर हो गए है जिससे इनकी पहचान कठिन हो गई है। इसकी मदद से हैकर्स अब दुनिया की किसी भी भाषा में बिना किसी गलती के फिशिंग ईमेल भेज पा रहे हैं।

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