{"_id":"69a185a7dc3c510a160a2ce8","slug":"iit-delhi-develops-high-efficiency-ac-cuts-electricity-bills-33-check-how-this-hybrid-tech-works-2026-02-27","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"अब बिल की टेंशन खत्म: IIT दिल्ली ने बनाया हाइब्रिड AC; 33% कम होगी बिजली की खपत, जानें आम एसी से कैसे है अलग","category":{"title":"Tech Diary","title_hn":"टेक डायरी","slug":"tech-diary"}}
अब बिल की टेंशन खत्म: IIT दिल्ली ने बनाया हाइब्रिड AC; 33% कम होगी बिजली की खपत, जानें आम एसी से कैसे है अलग
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Fri, 27 Feb 2026 05:23 PM IST
विज्ञापन
सार
IIT Delhi High Efficiency AC: भीषण गर्मी और आसमान छूते बिजली के बिलों के बीच आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जो एयर कंडीशनिंग (AC) की दुनिया को बदल देगी। मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से तैयार किया गया यह नया हाइब्रिड AC, सामान्य AC की तुलना में बिजली की खपत को एक-तिहाई (लगभग 33%) तक कम कर देता है। जानें इसके बारे में विस्तार से....
ac
- फोटो : Adobe stock
विज्ञापन
विस्तार
देश में बढ़ती गर्मी और एयर कंडीशनर की तेज होती मांग के बीच आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों ने एक हाई-एफिशियंसी हाइब्रिड एसी तकनीक विकसित की है। यह नई तकनीक हवा से नमी हटाने के लिए लिक्विड डेसिकेंट और मेम्ब्रेन मॉड्यूल का उपयोग करती है और एसी की आउटडोर यूनिट से निकलने वाली बेकार गर्मी को दोबारा इस्तेमाल करती है। इससे 28% से 41.5% तक ऊर्जा बचत संभव है।
क्यों खास है यह एसी?
आमतौर पर हमारे घरों में लगने वाले एसी हवा को ठंडा करने और उसकी नमी सुखाने के लिए बहुत ज्यादा बिजली खर्च करते हैं। लेकिन प्रो. अनुराग गोयल और उनकी टीम पीएचडी स्कॉलर अनंतकृष्णन के.सहित ने एक ऐसा हाइब्रिड मेम्ब्रेन-लिक्विड डेसिकेंट सिस्टम बनाया है जो बेकार जाने वाली गर्मी का इस्तेमाल करके कूलिंग करता है।
ये भी पढ़े: Laptop Buying Guide: 2026 में स्टूडेंट्स के लिए कौन सा लैपटॉप रहेगा बेस्ट? खरीदने से पहले जान लें पूरी गाइड
Trending Videos
क्यों खास है यह एसी?
आमतौर पर हमारे घरों में लगने वाले एसी हवा को ठंडा करने और उसकी नमी सुखाने के लिए बहुत ज्यादा बिजली खर्च करते हैं। लेकिन प्रो. अनुराग गोयल और उनकी टीम पीएचडी स्कॉलर अनंतकृष्णन के.सहित ने एक ऐसा हाइब्रिड मेम्ब्रेन-लिक्विड डेसिकेंट सिस्टम बनाया है जो बेकार जाने वाली गर्मी का इस्तेमाल करके कूलिंग करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
ये भी पढ़े: Laptop Buying Guide: 2026 में स्टूडेंट्स के लिए कौन सा लैपटॉप रहेगा बेस्ट? खरीदने से पहले जान लें पूरी गाइड
आईआईटी दिल्ली ने बनाया हाइब्रिड एसी
- फोटो : home.iitd.ac.in
कैसे काम करती है यह नई टेक्नोलॉजी?
इस एसी के काम करने का तरीका मौजूदा मॉडल्स से बिल्कुल अलग और स्मार्ट है। इसमें:
बचत की बात करें तो आईआईटी दिल्ली के रिसर्च के अनुसार, यह हाइब्रिड सिस्टम बिजली बचाने में उस्ताद है:
2019 में जारी पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान रिपोर्ट के अनुसार, 2038 तक कूलिंग के लिए बिजली की खपत तीन गुना बढ़ जाएगी। ऐसे में आईआईटी दिल्ली की यह तकनीक प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करने और आम आदमी की जेब बचाने में मील का पत्थर साबित हो सकती है। यह रिसर्च हाल ही में मशहूर जर्नल ऑफ बिल्डिंग इंजीनियरिंग में भी प्रकाशित हुई है।
आम लोगों को क्या फायदा?
अगर यह तकनीक व्यावसायिक स्तर पर लागू होती है, तो इससे लाेगो का बहुत फायदा हो सकता है। जैसे बिजली बिल में बड़ी कमी, पावर कट की समस्या में राहत, कार्बन उत्सर्जन में कमी और पर्यावरण के अनुकूल कूलिंग। यह तकनीक खासतौर पर भारतीय परिस्थितियों के अनुसार डिजाइन की गई है, जहां नमी और तापमान दोनों बड़ी चुनौती हैं।
इस एसी के काम करने का तरीका मौजूदा मॉडल्स से बिल्कुल अलग और स्मार्ट है। इसमें:
- नमक के घोल से नमी का इलाज: इस सिस्टम में एक खास लिक्विड डेसिकेंट (नमक का घोल) इस्तेमाल होता है, जो बाहर की हवा से जलवाष्प यानी नमी को सोख लेता है।
- पॉलिमर मेम्ब्रेन का सुरक्षा कवच: हवा और इस घोल के बीच एक पतली पॉलिमर मेम्ब्रेन (झिल्ली) लगाई गई है, जिससे नमक के पार्टिकल यानी की कण कमरे की हवा में न मिलें।
- बेकार गर्मी का सदुपयोग: एसी की आउटडोर यूनिट (कंडेंसर) से जो गर्म हवा बाहर निकलती है, यह सिस्टम उसी वेस्ट हीट का उपयोग करके अपने नमक वाले घोल को फिर से सुखा लेता है। यानी अलग से बिजली खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती।
बचत की बात करें तो आईआईटी दिल्ली के रिसर्च के अनुसार, यह हाइब्रिड सिस्टम बिजली बचाने में उस्ताद है:
- बिजली की कमी: जहां एक साधारण एसी 1200 वॉट बिजली लेता है, वहीं यह हाइब्रिड एसी मात्र 800 वॉट में उतनी ही ठंडक देता है।
- इलाके के हिसाब से बचत: ज्यादा नमी वाले (Coastal) इलाकों में 28 प्रतिशत तक बचत हो सकती है। वहीं, शुष्क यानी ड्राई वाले इलाकों में 41.5% तक की बचत होने का अनुमान है।
2019 में जारी पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान रिपोर्ट के अनुसार, 2038 तक कूलिंग के लिए बिजली की खपत तीन गुना बढ़ जाएगी। ऐसे में आईआईटी दिल्ली की यह तकनीक प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करने और आम आदमी की जेब बचाने में मील का पत्थर साबित हो सकती है। यह रिसर्च हाल ही में मशहूर जर्नल ऑफ बिल्डिंग इंजीनियरिंग में भी प्रकाशित हुई है।
आम लोगों को क्या फायदा?
अगर यह तकनीक व्यावसायिक स्तर पर लागू होती है, तो इससे लाेगो का बहुत फायदा हो सकता है। जैसे बिजली बिल में बड़ी कमी, पावर कट की समस्या में राहत, कार्बन उत्सर्जन में कमी और पर्यावरण के अनुकूल कूलिंग। यह तकनीक खासतौर पर भारतीय परिस्थितियों के अनुसार डिजाइन की गई है, जहां नमी और तापमान दोनों बड़ी चुनौती हैं।