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एआई पर नरम पड़े सैम ऑल्टमैन: बोले- समाज की सुरक्षा के लिए रफ्तार धीमी करनी होगी, साइबर हमले के बाद बदला रुख
Thu, 30 Jul 2026 11:18 AM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Thu, 30 Jul 2026 11:18 AM IST
सार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास की तेज रफ्तार अब खुद टेक कंपनियों के लिए चिंता का विषय बन गई है। ओपनएआई, एंथ्रोपिक और गूगल डीपमाइंड समेत 1,000 से ज्यादा विशेषज्ञों ने सरकारों से सुरक्षित एआई विकास के लिए नई वैश्विक व्यवस्था बनाने और इसकी गति नियंत्रित करने की मांग की है।
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1,000 से ज्यादा विशेषज्ञों ने सरकारों से की अपील
- फोटो : AI जनरेटेड
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विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर अब तक तेजी से आगे बढ़ने की वकालत करने वाली दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों का रुख बदलता नजर आ रहा है। एआई से जुड़े बढ़ते साइबर जोखिमों और स्वायत्त सिस्टम की क्षमताओं को देखते हुए ओपनएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैम ऑल्टमैन ने पहली बार स्वीकार किया है कि भविष्य में एआई के विकास की गति को नियंत्रित करना जरूरी हो सकता है, ताकि समाज इस तकनीक के साथ सुरक्षित तरीके से तालमेल बिठा सके।
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1,000 से ज्यादा विशेषज्ञों ने सरकारों से की अपील
- ओपनएआई, एंथ्रोपिक, गूगल डीपमाइंड, मेटा एआई और थिंकिंग मशीन सहित कई प्रमुख एआई संस्थानों के 1,000 से अधिक शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों ने अमेरिकी प्रशासन से सुरक्षित एआई विकास के लिए वैश्विक स्तर पर नियम और निगरानी व्यवस्था तैयार करने की मांग की है।
- बताया गया है कि ओपनएआई और एंथ्रोपिक के 1,100 से अधिक कर्मचारियों ने पेसिंग द फ्रंटीयर नाम की एक याचिका का समर्थन किया है। इस पहल को एंथ्रोपिक के फाउंडर डारियो अमोदेई, मेटा एआई रिसर्च की उपाध्यक्ष डॉन सॉन्ग और ओपनएआई के मुख्य वैज्ञानिक याकुब पाचौकी सहित कई प्रमुख विशेषज्ञों का समर्थन मिला है।
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हगिंग फेस पर साइबर हमला बना बड़ा कारण
- एआई की गति धीमी करने की मांग के पीछे हाल में हुई एक गंभीर साइबर घटना को अहम वजह माना जा रहा है। ओपनएआई ने स्वीकार किया है कि उसके एक ओटोनोमस एआई एजेंट ने ओपन-सोर्स एआई प्लेटफॉर्म हगिंग फेस पर हमला करने के दौरान सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े कम से कम चार अलग-अलग अकाउंट्स का इस्तेमाल किया था।
- जांच में यह भी सामने आया कि हमले को अंजाम देने के लिए कई थर्ड-पार्टी सर्विस और अकाउंट्स का दुरुपयोग किया गया। ऑल्टमैन ने इसे अपने करियर का सबसे गंभीर सुरक्षा संकट बताया।
अब साइबर सुरक्षा टूल्स पर रहेगा फोकस
- तकनीकी कंपनियों का कहना है कि भविष्य में स्वायत्त एआई एजेंटों से साइबर हमलों का खतरा और बढ़ सकता है। ऐसे में एडवांस एआई सेफ्टी टूल्स विकसित किए जाएंगे ताकि संभावित जोखिमों को समय रहते रोका जा सके।
- विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई मॉडल खुद को इतनी तेजी से बेहतर बना सकते हैं कि उनके विकास को नियंत्रित करना अनिवार्य हो जाएगा।
ओपनएआई का 500 अरब डॉलर का बड़ा विस्तार अभियान
- इसी बीच चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई अपने स्टारगेट प्रोजेक्ट के तहत वैश्विक स्तर पर बड़े डेटा सेंटर स्थापित करने की योजना पर तेजी से काम कर रही है।
- रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी अमेरिका के ओहायो में लगभग 500 अरब डॉलर के विशाल डेटा सेंटर को लीज पर लेने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसकी अनुमानित क्षमता 10 गीगावाट बताई जा रही है।
भारत भी स्टारगेट रणनीति का अहम हिस्सा
- भारत को भी ओपनएआई की इस वैश्विक विस्तार योजना में महत्वपूर्ण स्थान मिला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी यहां करीब 1 गीगावाट क्षमता वाला डेटा सेंटर विकसित करने की तैयारी कर रही है, जो देश के सबसे बड़े डेटा सेंटरों में शामिल हो सकता है।
- इसके अलावा वर्ष 2026 के अंत तक भारत में लगभग 1 लाख जीपीयू (GPU) तैनात करने का लक्ष्य भी रखा गया है। हालांकि भारतीय परियोजना में होने वाले निवेश की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है।