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अलर्ट: मैक में एआई एजेंट्स को डेटा एक्सेस देना कितना सुरक्षित? एपल ने दी चेतावनी, आ रहे नए प्राइवेसी कंट्रोल्स
Sat, 03 Oct 2026 03:16 PM IST
जागृति शुक्ला
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जागृति शुक्ला
Updated Sat, 03 Oct 2026 03:16 PM IST
सार
क्या आप भी मैक में एआई एजेंट्स को अपने पर्सनल डेटा और मैसेज का पूरा एक्सेस दे रहे हैं? अगर हां, तो इससे जुड़े जोखिमों को लेकर एपल ने बड़ी चेतावनी दी है। इसी वजह से कंपनी यूजर्स की प्राइवेसी और सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए नए प्राइवेसी कंट्रोल्स लाने की तैयारी कर रही है। आइए जानते हैं कंपनी क्या कदम उठाने वाली है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amarujala.com
विस्तार
एआई एजेंट्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं और अब ये सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं हैं। कई एआई एजेंट यूजर्स की ओर से बिना लगातार मानवीय निगरानी के अलग-अलग काम कर सकते हैं, लेकिन इनकी बढ़ती क्षमता के साथ यूजर के पर्सनल डेटा तक व्यापक एक्सेस का जोखिम भी बढ़ रहा है। इसी को देखते हुए एपल मैक यूजर्स के लिए नए प्राइवेसी कंट्रोल लाने की तैयारी कर रही है। कंपनी का कहना है कि यूजर्स को किसी एप को फुल डिस्क एक्सेस देने से पहले संभावित जोखिमों की स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए। आइए जानते हैं एपल का नया कदम क्या है और एआई एजेंट्स को लेकर कंपनी की चिंता क्यों बढ़ी है।
मैक में फुल डिस्क एक्सेस को लेकर एपल का नया कदम
Apple Inc. ने कहा है कि वह मैक यूजर्स के लिए अतिरिक्त प्राइवेसी कंट्रोल पेश करने जा रही है। इन कंट्रोल का मकसद थर्ड-पार्टी सॉफ्टवेयर, खासकर एआई एजेंट्स को मिलने वाले व्यापक डेटा एक्सेस से जुड़े जोखिमों को कम करना है।
कंपनी के अनुसार, यूजर्स किसी एप को फुल डिस्क एक्सेस तभी दे सकेंगे, जब वे इसके लिए बहुत स्पष्ट तरीके से अनुमति दें। फुल डिस्क एक्सेस मिलने के बाद किसी एप को सिस्टम फाइल्स के साथ-साथ मेल, मैसेज और ब्राउजिंग हिस्ट्री जैसे डेटा तक व्यापक एक्सेस मिल सकता है। इसलिए एपल अब इस अनुमति को लेकर यूजर्स को ज्यादा स्पष्ट नियंत्रण और जानकारी देने की तैयारी कर रही है।
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एपल ने क्या कहा?
एपल ने अपने बयान में कहा कि कंपनी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि यूजर्स इस तरह का एक्सेस देने से पहले इससे जुड़े जोखिमों को स्पष्ट रूप से समझें। कंपनी के मुताबिक, इसका उद्देश्य यूजर्स को अपने डेटा और प्राइवेसी से जुड़े मामलों में सूचित फैसला लेने में मदद करना है।
एपल ने किसी खास प्रोग्राम या डेवलपर का नाम नहीं लिया। हालांकि, कंपनी ने AI एजेंट्स की बढ़ती क्षमता और स्वायत्तता को इस बदलाव की एक महत्वपूर्ण वजह बताया है।
एआई एजेंट्स से क्यों बढ़ रहा है प्राइवेसी का जोखिम?
एआई एजेंट्स ऐसे एआई टूल्स हैं जो यूजर्स की ओर से कई काम बिना लगातार मानवीय निगरानी के कर सकते हैं। इनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। कई एजेंट्स को सही तरीके से काम करने के लिए यूजर की पर्सनल फाइल्स, एप्स और दूसरे डेटा तक व्यापक एक्सेस की जरूरत पड़ती है।
एपल का कहना है कि जैसे-जैसे एआई एजेंट्स ज्यादा सक्षम और स्वायत्त होते जाएंगे, उन्हें इस स्तर का एक्सेस देने से जुड़े जोखिम भी बढ़ेंगे। कंपनी के अनुसार, कुछ डेवलपर्स फुल डिस्क एक्सेस का इस्तेमाल ऐसे तरीकों से कर रहे हैं, जो यूजर्स को जोखिम में डाल सकते हैं। साथ ही, कई बार यूजर्स को यह पूरी तरह समझ नहीं होता कि किसी एप को इतनी व्यापक अनुमति देने का मतलब क्या है।
दूसरे लोगों की प्राइवेसी पर भी पड़ सकता है असर
फुल डिस्क एक्सेस से जुड़ी चिंता सिर्फ उस यूजर तक सीमित नहीं है, जिसने एप को अनुमति दी है। कंपनी ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर किसी एप को यूजर के सभी मैसेज का एक्सेस मिल जाता है, तो इससे उन लोगों की प्राइवेसी भी प्रभावित हो सकती है, जिनसे यूजर बातचीत कर रहा है। यानी किसी व्यक्ति की ओर से दी गई अनुमति का असर उसके संपर्क में रहने वाले दूसरे लोगों के डेटा पर भी पड़ सकता है।
ओपनएआई के चैटजीपीटी मैक फीचर से जुड़ा है मामला
अगस्त में ओपनएआई ने चैटजीपीटी मैक एप के लिए एक ऑप्ट-इन फीचर जारी किया था। इसके जरिए चैटजीपीटी यूजर की ओर से टेक्स्ट मैसेज पढ़ सकता है, उनका सारांश बना सकता है, नए मैसेज लिख सकता है और उन्हें भेज सकता है।
इस फीचर को काम करने के लिए यूजर को फुल डिस्क एक्सेस देना पड़ता है। इसकी वजह यह है कि चैटजीपीटी को एपल मैसेजेस एप में मौजूद बातचीत की जानकारी तक पहुंच चाहिए। यानी यह उदाहरण दिखाता है कि एआई एजेंट को ज्यादा काम करने की क्षमता देने के लिए उसे सिस्टम और यूजर डेटा का व्यापक एक्सेस क्यों चाहिए हो सकता है।
एआई एजेंट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है
एआई एजेंट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ने की जानकारी कंपनियों के आंकड़ों से भी सामने आती है। ओपनएआई ने इस हफ्ते कहा कि उसके एजेंट टूल्स चैटजीपीटी वर्क और कोडक्स का इस्तेमाल 3.5 करोड़ से ज्यादा लोग कर रहे हैं। जुलाई में यह संख्या एक करोड़ थी। वहीं, मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक का म्यूज पिछले महीने लॉन्च होने के बाद एप स्टोर डाउनलोड चार्ट्स में टॉप पर रहा। इन एआई एजेंट्स की खासियत यह है कि वे यूजर की ओर से कई काम करने की कोशिश करते हैं। इसके लिए उन्हें यूजर की फाइल्स, एप्स और दूसरी जानकारी तक ज्यादा एक्सेस की जरूरत पड़ सकती है।
एपल का फोकस: एक्सेस देने से पहले यूजर को पूरी जानकारी
एपल के नए कंट्रोल का मुख्य उद्देश्य यूजर को किसी एप को फुल डिस्क एक्सेस देने से पहले ज्यादा स्पष्ट जानकारी और नियंत्रण देना है। कंपनी का कहना है कि यूजर्स को यह समझना जरूरी है कि किसी एप को व्यापक सिस्टम एक्सेस देने पर किस तरह के डेटा तक उसकी पहुंच हो सकती है। एआई एजेंट्स के ज्यादा सक्षम और स्वायत्त होने के साथ यह मुद्दा और महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि ऐसे टूल्स यूजर की ओर से ज्यादा काम करने में सक्षम होते जा रहे हैं।
एआई की सुविधा और डेटा प्राइवेसी के बीच संतुलन
एआई एजेंट्स यूजर्स के कई काम आसान कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें ज्यादा डेटा और सिस्टम एक्सेस की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में सुविधा के साथ प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा का सवाल भी जुड़ जाता है।
एपल का नया कदम इसी बढ़ते सवाल के बीच सामने आया है। कंपनी का कहना है कि यूजर्स को व्यापक एक्सेस देने से पहले जोखिमों को साफ तौर पर समझने और उसके बाद फैसला लेने में सक्षम होना चाहिए।
आने वाले समय में एआई एजेंट्स के ज्यादा सक्षम होने के साथ यह बहस और महत्वपूर्ण हो सकती है कि किसी एआई टूल को यूजर के डिवाइस और निजी डेटा तक कितनी पहुंच दी जानी चाहिए।
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मैक में फुल डिस्क एक्सेस को लेकर एपल का नया कदम
Apple Inc. ने कहा है कि वह मैक यूजर्स के लिए अतिरिक्त प्राइवेसी कंट्रोल पेश करने जा रही है। इन कंट्रोल का मकसद थर्ड-पार्टी सॉफ्टवेयर, खासकर एआई एजेंट्स को मिलने वाले व्यापक डेटा एक्सेस से जुड़े जोखिमों को कम करना है।
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कंपनी के अनुसार, यूजर्स किसी एप को फुल डिस्क एक्सेस तभी दे सकेंगे, जब वे इसके लिए बहुत स्पष्ट तरीके से अनुमति दें। फुल डिस्क एक्सेस मिलने के बाद किसी एप को सिस्टम फाइल्स के साथ-साथ मेल, मैसेज और ब्राउजिंग हिस्ट्री जैसे डेटा तक व्यापक एक्सेस मिल सकता है। इसलिए एपल अब इस अनुमति को लेकर यूजर्स को ज्यादा स्पष्ट नियंत्रण और जानकारी देने की तैयारी कर रही है।
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एपल ने क्या कहा?
एपल ने अपने बयान में कहा कि कंपनी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि यूजर्स इस तरह का एक्सेस देने से पहले इससे जुड़े जोखिमों को स्पष्ट रूप से समझें। कंपनी के मुताबिक, इसका उद्देश्य यूजर्स को अपने डेटा और प्राइवेसी से जुड़े मामलों में सूचित फैसला लेने में मदद करना है।
एपल ने किसी खास प्रोग्राम या डेवलपर का नाम नहीं लिया। हालांकि, कंपनी ने AI एजेंट्स की बढ़ती क्षमता और स्वायत्तता को इस बदलाव की एक महत्वपूर्ण वजह बताया है।
एआई एजेंट्स से क्यों बढ़ रहा है प्राइवेसी का जोखिम?
एआई एजेंट्स ऐसे एआई टूल्स हैं जो यूजर्स की ओर से कई काम बिना लगातार मानवीय निगरानी के कर सकते हैं। इनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। कई एजेंट्स को सही तरीके से काम करने के लिए यूजर की पर्सनल फाइल्स, एप्स और दूसरे डेटा तक व्यापक एक्सेस की जरूरत पड़ती है।
एपल का कहना है कि जैसे-जैसे एआई एजेंट्स ज्यादा सक्षम और स्वायत्त होते जाएंगे, उन्हें इस स्तर का एक्सेस देने से जुड़े जोखिम भी बढ़ेंगे। कंपनी के अनुसार, कुछ डेवलपर्स फुल डिस्क एक्सेस का इस्तेमाल ऐसे तरीकों से कर रहे हैं, जो यूजर्स को जोखिम में डाल सकते हैं। साथ ही, कई बार यूजर्स को यह पूरी तरह समझ नहीं होता कि किसी एप को इतनी व्यापक अनुमति देने का मतलब क्या है।
दूसरे लोगों की प्राइवेसी पर भी पड़ सकता है असर
फुल डिस्क एक्सेस से जुड़ी चिंता सिर्फ उस यूजर तक सीमित नहीं है, जिसने एप को अनुमति दी है। कंपनी ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर किसी एप को यूजर के सभी मैसेज का एक्सेस मिल जाता है, तो इससे उन लोगों की प्राइवेसी भी प्रभावित हो सकती है, जिनसे यूजर बातचीत कर रहा है। यानी किसी व्यक्ति की ओर से दी गई अनुमति का असर उसके संपर्क में रहने वाले दूसरे लोगों के डेटा पर भी पड़ सकता है।
ओपनएआई के चैटजीपीटी मैक फीचर से जुड़ा है मामला
अगस्त में ओपनएआई ने चैटजीपीटी मैक एप के लिए एक ऑप्ट-इन फीचर जारी किया था। इसके जरिए चैटजीपीटी यूजर की ओर से टेक्स्ट मैसेज पढ़ सकता है, उनका सारांश बना सकता है, नए मैसेज लिख सकता है और उन्हें भेज सकता है।
इस फीचर को काम करने के लिए यूजर को फुल डिस्क एक्सेस देना पड़ता है। इसकी वजह यह है कि चैटजीपीटी को एपल मैसेजेस एप में मौजूद बातचीत की जानकारी तक पहुंच चाहिए। यानी यह उदाहरण दिखाता है कि एआई एजेंट को ज्यादा काम करने की क्षमता देने के लिए उसे सिस्टम और यूजर डेटा का व्यापक एक्सेस क्यों चाहिए हो सकता है।
एआई एजेंट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है
एआई एजेंट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ने की जानकारी कंपनियों के आंकड़ों से भी सामने आती है। ओपनएआई ने इस हफ्ते कहा कि उसके एजेंट टूल्स चैटजीपीटी वर्क और कोडक्स का इस्तेमाल 3.5 करोड़ से ज्यादा लोग कर रहे हैं। जुलाई में यह संख्या एक करोड़ थी। वहीं, मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक का म्यूज पिछले महीने लॉन्च होने के बाद एप स्टोर डाउनलोड चार्ट्स में टॉप पर रहा। इन एआई एजेंट्स की खासियत यह है कि वे यूजर की ओर से कई काम करने की कोशिश करते हैं। इसके लिए उन्हें यूजर की फाइल्स, एप्स और दूसरी जानकारी तक ज्यादा एक्सेस की जरूरत पड़ सकती है।
एपल का फोकस: एक्सेस देने से पहले यूजर को पूरी जानकारी
एपल के नए कंट्रोल का मुख्य उद्देश्य यूजर को किसी एप को फुल डिस्क एक्सेस देने से पहले ज्यादा स्पष्ट जानकारी और नियंत्रण देना है। कंपनी का कहना है कि यूजर्स को यह समझना जरूरी है कि किसी एप को व्यापक सिस्टम एक्सेस देने पर किस तरह के डेटा तक उसकी पहुंच हो सकती है। एआई एजेंट्स के ज्यादा सक्षम और स्वायत्त होने के साथ यह मुद्दा और महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि ऐसे टूल्स यूजर की ओर से ज्यादा काम करने में सक्षम होते जा रहे हैं।
एआई की सुविधा और डेटा प्राइवेसी के बीच संतुलन
एआई एजेंट्स यूजर्स के कई काम आसान कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें ज्यादा डेटा और सिस्टम एक्सेस की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में सुविधा के साथ प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा का सवाल भी जुड़ जाता है।
एपल का नया कदम इसी बढ़ते सवाल के बीच सामने आया है। कंपनी का कहना है कि यूजर्स को व्यापक एक्सेस देने से पहले जोखिमों को साफ तौर पर समझने और उसके बाद फैसला लेने में सक्षम होना चाहिए।
आने वाले समय में एआई एजेंट्स के ज्यादा सक्षम होने के साथ यह बहस और महत्वपूर्ण हो सकती है कि किसी एआई टूल को यूजर के डिवाइस और निजी डेटा तक कितनी पहुंच दी जानी चाहिए।