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Robot: जमा देने वाली भीषण ठंड में ह्यूमनॉइड रोबोट का कमाल, बर्फ पर 1.3 लाख कदम चलकर बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति Updated Thu, 05 Feb 2026 06:39 PM IST
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सार

Unitree G1 Robot: चीन की रोबोटिक्स कंपनी ने अत्यधिक ठंडे मौसम में ह्यूमनॉइड रोबोट की क्षमता का ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। कंपनी के G1 ह्यूमनॉइड रोबोट ने माइनस 47.4 डिग्री सेल्सियस तापमान में बर्फ से ढके मैदान पर चलकर 1.3 लाख से अधिक कदम पूरे किए। जानें इस रोबोट के बारे में विस्तार से....
 

China’s Unitree G1 Humanoid Robot Walks Autonomously -47°C, Sets New Cold-Weather Milestone
G1 रोबोट - फोटो : @UnitreeRobotics
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विस्तार

जहां इंसान और मशीनें जम जाती हैं, वहां यूनिट्री (Unitree) का G1 रोबोट शान से चला। चीन के अल्ताय क्षेत्र की बर्फीली वादियों में इसने 1,30,000 से ज्यादा कदम रखे। खास बात ये रही कि इसने बर्फ पर 186 मीटर लंबा विंटर ओलंपिक्स का लोगो बनाया, जो इसकी सटीकता को दर्शाता है।

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बेहद ठंड में पहली बार खुद से चला ह्यूमनॉइड

रिपोर्ट के अनुसार, ये पहली बार है जब किसी ह्यूमनॉइड रोबोट ने -47°C जैसे तापमान में पूरी तरह ऑटोनॉमस तरीके से वॉक की है। इस उपलब्धि में चीन के बेइदौ सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम की अहम भूमिका रही, जिसने सेंटीमीटर-लेवल तक सटीक लोकेशन डेटा उपलब्ध कराया। इसके साथ ही, रोबोट की अनुकूली पथ योजना (Adaptive Path Planning) टेक्नोलॉजी ने बर्फीले और फिसलन भरे रास्ते में संतुलन बनाए रखने में मदद की।

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China’s Unitree G1 Humanoid Robot Walks Autonomously -47°C, Sets New Cold-Weather Milestone
चीन के G1 ह्यूमनॉइड ने बर्फीले मैदान में रचा इतिहास - फोटो : @UnitreeRobotics

इस रोबोट की खूबियां क्या है?

ये जी 1 ह्यूमनॉइड रोबोट एडवांस्ड हार्डवेयर और एआई का बेहतरीन उदाहरण है। मात्र 35 किलो वजन वाला ये रोबोट अपने शरीर में 43 जॉइंट मोटर्स समेटे हुए है। इसमें यूनिफोएलएमनाम का अपना बड़ा एआई मॉडल लगा है। इसमें लगे 3D LiDAR ( लिडार )और डेप्थ कैमरे इसे अंधेरे और धुंध में भी रास्ता देखने में मदद करते हैं। एक बार चार्ज होने पर इसकी बैटरी 2 घंटे तक कड़ी मेहनत कर सकती है।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, ये परीक्षण साबित करता है कि ह्यूमनाॅइड रोबोट अब सिर्फ लैब या इंडोर फैक्ट्री तक सीमित नहीं हैं। बेहद ठंडे और चुनौतीपूर्ण वातावरण में उनकी सफलता भविष्य में पोलर और हाई-एल्टीट्यूड रिसर्च, आपदा राहत और रेस्क्यू ऑपरेशंस, खनन और सीमावर्ती निगरानी और अंतरिक्ष व आर्कटिक एक्सप्लोरेशन जैसे क्षेत्रों में गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

साथ ही टेक एक्सपर्ट्स ये भी मानते हैं कि ये टेस्ट सिर्फ एक दिखावा नहीं है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में जब कहीं भीषण बर्फीला तूफान आएगा या माइनस डिग्री तापमान में किसी को बचाना (Rescue) होगा, तो इंसान की जगह ये रोबोट अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर सकेंगे।

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