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भारत में तेजी से बढ़ा K-कल्चर: फिल्मों से लेकर खाने की थाली तक, हर जगह हावी हुआ कोरियन ट्रेंड, देखें आंकड़े
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Fri, 06 Feb 2026 06:15 PM IST
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सार
K-Culture In India: बीते पांच वर्षों में भारत के युवाओं के बीच कोरियन कल्चर का क्रेज तेजी से बढ़ा है। टीनएजर्स में कोरियन ड्रामा सीरीज, गेम्स, फूड और फैशन की डिमांड कई गुना बढ़ी है। गूगल सर्च के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में के-कल्चर ने कितनी तेजी से अपने पैर पसारे हैं।
टीनएजर्स में बढ़ा के-कल्चर का असर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गाजियाबाद में तीन बहनों के सुसाइड के मामले में होने वाले खुलासे चौंकाने वाले हैं। अब तक की जांच में पता चला है कि तीनों बहनों पर कोरियन लाइफस्टाइल का गहरा असर था। वह खुद को भारतीय नहीं बल्कि कोरियन समझने लगी थीं। बताया जा रहा है कि कोरियन जैसा दिखने और उसी संस्कृति को अपनाने की चाह इस कदर हावी हो गई थी कि तीनों ने अपने नाम भी कोरियन लड़कियों जैसे रख लिए थे।
तीनों बहनों के स्कूल छूट चुके थे, वे घर से भी कम ही निकलती थीं और कमरे में ज्यादातर समय मोबाइल पर कोरियन कंटेंट देखने में बिताती थीं। पुसिल के मुताबिक, पिता के डांटने और मोबाइल छिनने से बहनें कोरियन कंटेंट नहीं देख पा रहीं थीं। इसी से तनाव और अवसाद में आकर उन्होंने अपनी जिंदगी ही खत्म करने का फैसला कर लिया।
टीनएजर्स में कोरियन कंटेंट की लोकप्रियता बढ़ी
बात सिर्फ इन तीन बहनों की ही नहीं है, बल्कि देखा जाए तो भारत के युवाओं में पिछले कुछ वर्षों में कोरियन कल्चर को लेकर दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है। हाल ही के कुछ वर्षों में भारत में कोरियन ड्रॉमा, फिल्में, गाने, फैशन और खान-पान का क्रेज जबरदस्त तरीके से बढ़ा है। इस ट्रेंड को देखते हुए ओटीटी प्लेटफॉर्म्स से लेकर फूड और फैशन कंपनियां तक इसे एक बड़े बाजार के रूप में भुना रही हैं।
खासतौर पर कोरोना महामारी के दौरान स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थान बंद होने से युवा लंबे समय तक घरों में सीमित रहे। इस दौरान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर के-पॉप, के-ड्रामा और कोरियन गेम्स जैसे कंटेंट का जमकर कंजम्प्शन हुआ, जिसने इस कल्चर को और लोकप्रिय बना दिया।
लॉकडाउन और सस्ते इंटरनेट से K-पॉप घर-घर तर पहुंचा
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तीनों बहनों के स्कूल छूट चुके थे, वे घर से भी कम ही निकलती थीं और कमरे में ज्यादातर समय मोबाइल पर कोरियन कंटेंट देखने में बिताती थीं। पुसिल के मुताबिक, पिता के डांटने और मोबाइल छिनने से बहनें कोरियन कंटेंट नहीं देख पा रहीं थीं। इसी से तनाव और अवसाद में आकर उन्होंने अपनी जिंदगी ही खत्म करने का फैसला कर लिया।
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टीनएजर्स में कोरियन कंटेंट की लोकप्रियता बढ़ी
बात सिर्फ इन तीन बहनों की ही नहीं है, बल्कि देखा जाए तो भारत के युवाओं में पिछले कुछ वर्षों में कोरियन कल्चर को लेकर दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है। हाल ही के कुछ वर्षों में भारत में कोरियन ड्रॉमा, फिल्में, गाने, फैशन और खान-पान का क्रेज जबरदस्त तरीके से बढ़ा है। इस ट्रेंड को देखते हुए ओटीटी प्लेटफॉर्म्स से लेकर फूड और फैशन कंपनियां तक इसे एक बड़े बाजार के रूप में भुना रही हैं।
खासतौर पर कोरोना महामारी के दौरान स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थान बंद होने से युवा लंबे समय तक घरों में सीमित रहे। इस दौरान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर के-पॉप, के-ड्रामा और कोरियन गेम्स जैसे कंटेंट का जमकर कंजम्प्शन हुआ, जिसने इस कल्चर को और लोकप्रिय बना दिया।
लॉकडाउन और सस्ते इंटरनेट से K-पॉप घर-घर तर पहुंचा
- गूगल ट्रेंड्स के आंकड़े बताते हैं कि 2014 के बाद भारत में 4G इंटरनेट क्रांति ने लोगों को वैश्विक संस्कृति से सीधे जोड़ दिया। सस्ते इंटरनेट ने अंतरराष्ट्रीय कंटेंट को हर घर तक पहुंचाया। इसी दौर में कोरियन कंटेंट से जुड़ी ऑनलाइन सर्च में 50 फीसदी से ज्यादा का उछाल देखा गया।
- हालांकि, कोरोना लॉकडाउन के दौरान यह ट्रेंड अपने चरम पर पहुंच गया। साल 2020 में कोरियन वीडियो गेम्स और टीवी सीरीज का कंजम्प्शन पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए 78 फीसदी से ज्यादा बढ़ गया। 2021 तक के-पॉप गाने और के-ड्रामा भारत में ट्रेंड करने लगे और इनसे जुड़ी सर्च में 100 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
समय के साथ बढ़ा के-पॉप ट्रेंड
- फोटो : अमर उजाला
कोरियन ड्रामा और फिल्मों की जबरदस्त लोकप्रियता
के-कल्चर फैशन और खाने तक भी पहुंच गया
कोरियन गेम्स की बढ़ती लोकप्रियता
भारत में कोरियन गेम्स को लेकर भी युवाओं का झुकाव तेजी से बढ़ा है। गूगल ट्रेंड्स के मुताबिक ‘पॉपी प्लेटाइम’, ‘द बेबी इन येलो’, ‘एविल नन’ और ‘आइसक्रीम मैन’ जैसे गेम्स यूथ के बीच काफी लोकप्रिय हुए। खास बात यह है कि ‘पॉपी प्लेटाइम’ वही गेम था जिसे गाजियाबाद की तीनों बहनें सबसे ज्यादा खेलती थीं।
इन गेम्स से जुड़े लाइव स्ट्रीमिंग यूट्यूब चैनलों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ है, जो इस ट्रेंड की गहराई को दिखाता है।
बड़े खतरे की ओर संकेत
गाजियाबाद की तीन बहनों की मौत सिर्फ एक परिवार की निजी त्रासदी नहीं, बल्कि यह डिजिटल युग में युवाओं के सामने खड़े एक बड़े सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करती है। किसी भी विदेशी संस्कृति या कंटेंट को पसंद करना गलत नहीं है, लेकिन जब यह लगाव पहचान, मानसिक संतुलन और वास्तविक जीवन से दूरी का कारण बनने लगे, तो खतरा गंभीर हो जाता है।
आज जरूरत इस बात की है कि माता-पिता, स्कूल और समाज मिलकर बच्चों की डिजिटल आदतों पर नजर रखें, उनसे खुलकर संवाद करें और यह समझाएं कि मनोरंजन और जीवन के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है।
- पिछले पांच वर्षों (2021-2025) के गूगल ट्रेंड के आंकड़ों के मुताबिक भारत में कोरियन ड्रामा, फिल्में, पॉप सॉन्ग और कोरियन कंटेंट उपलब्ध कराने वाले प्लेटफॉर्म्स के बारे में सर्च सबसे तेजी से बढ़ी। इस दौरान कोरियन बैंड बीटीएस (BTS) के बारे में भी लोगों ने खूब सर्च किया। 'कोरियन ड्रामा', 'के-ड्रामा' और 'कोरियन ड्रामा हिंदी' जैसे की-वर्ड्स गूगल सर्च इंजन पर सबसे ज्यादा बार सर्च हुए। यह ट्रेंड बताते हैं कि देश में लॉकडाउन के समय से ही कोरियन कंटेंट के प्रति लोगों को लगाव कितनी तेजी से बढ़ा है।
- ‘इस दौरान के-ड्रामा थ्रिलर सीरीज 'स्क्विड गेम्स' सर्च में टॉप पर रहा। इस थ्रिलर सीरीज को दुनियाभर में जबरदस्त लोकप्रियता मिली और भारत में भी लोगों ने इसे खूब पसंद किया। स्क्विड गेम्स को लॉकडाउन के दौरान सबसे ज्यादा देखा जा रहा था, जबकि 2025 में नया सीजन आने के बाद भारत में भी इसने काफी लोकप्रियता हासिल की।
- इसके अलावा, टॉप सर्च में "ऑल ऑफ अस आर डेड", "विनसेंजो" और "मनी हाइस्ट-कोरियन" जैसे कोरियन टीवी सीरीज भी काफी पॉपुलर रहे। लोगों ने कोरियन फिल्मों के हिंदी डबिंग को भी इंटरनेट पर काफी सर्च किया। वहीं, कोरियन भाषा और लड़कियों के बारे में जानने में भी काफी दिलचस्पी दिखी।
के-कल्चर फैशन और खाने तक भी पहुंच गया
- भारत में कोरियन ट्रेंड सिर्फ स्क्रीन तक ही सीमित नहीं रहा। 2023 में हालात सामान्य होने के बाद कोरियन ओवरसाइज टी-शर्ट, बैगी पैंट और लूज फिट कपड़े युवाओं के बीच फैशन स्टेटमेंट बन गए। इस दौरान कोरियन फैशन से जुड़े सर्च में करीब 100 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यूथ ने "कोरियन फिट पैंट्स", "कोरियन लूज पैंट" और "कोरियन बैगी जींस" के बारे में जमकर सर्च किया।
- वहीं, 2020 के बाद से भारत में कोरियन फूड का भी जबरदस्त क्रेज देखने को मिला। 2025 में ‘किमची’, कोरियन रेस्त्रां और बार्बेक्यू डिश ‘सैमग्येओप्सल’ से जुड़ी सर्च अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।
कोरियन गेम्स की बढ़ती लोकप्रियता
भारत में कोरियन गेम्स को लेकर भी युवाओं का झुकाव तेजी से बढ़ा है। गूगल ट्रेंड्स के मुताबिक ‘पॉपी प्लेटाइम’, ‘द बेबी इन येलो’, ‘एविल नन’ और ‘आइसक्रीम मैन’ जैसे गेम्स यूथ के बीच काफी लोकप्रिय हुए। खास बात यह है कि ‘पॉपी प्लेटाइम’ वही गेम था जिसे गाजियाबाद की तीनों बहनें सबसे ज्यादा खेलती थीं।
इन गेम्स से जुड़े लाइव स्ट्रीमिंग यूट्यूब चैनलों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ है, जो इस ट्रेंड की गहराई को दिखाता है।
बड़े खतरे की ओर संकेत
गाजियाबाद की तीन बहनों की मौत सिर्फ एक परिवार की निजी त्रासदी नहीं, बल्कि यह डिजिटल युग में युवाओं के सामने खड़े एक बड़े सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करती है। किसी भी विदेशी संस्कृति या कंटेंट को पसंद करना गलत नहीं है, लेकिन जब यह लगाव पहचान, मानसिक संतुलन और वास्तविक जीवन से दूरी का कारण बनने लगे, तो खतरा गंभीर हो जाता है।
आज जरूरत इस बात की है कि माता-पिता, स्कूल और समाज मिलकर बच्चों की डिजिटल आदतों पर नजर रखें, उनसे खुलकर संवाद करें और यह समझाएं कि मनोरंजन और जीवन के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है।
