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सिस्को भारत में करेगी चिप डिजाइन टीम का विस्तार: जल्द लाएगी नई टेक्नोलॉजी, सीईओ ने बताया क्यों खास है बाजार
Wed, 14 Oct 2026 05:31 PM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Wed, 14 Oct 2026 05:31 PM IST
सार
भारत के सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए बड़ी खबर है। सिस्को भारत में अपनी चिप डिजाइन टीम का विस्तार करने की तैयारी में है। कंपनी के CEO चक रॉबिन्स ने भारतीय बाजार को रणनीतिक रूप से अहम बताते हुए कहा कि यहां विकास की काफी संभावनाएं हैं। इसके अलावा, सिस्को आने वाले महीनों में अपनी सॉवरेन क्रिटिकल टेक्नोलॉजी भी भारत में लाने वाली है।
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सिस्को ने भारत को बताया रणनीतिक बाजार।
- फोटो : Cisco
विस्तार
भारत के टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए एक अहम खबर सामने आई है। अमेरिकी नेटवर्किंग और टेक्नोलॉजी कंपनी सिस्को (Cisco) भारत में अपनी चिप डिजाइन टीम का विस्तार करने की योजना बना रही है। कंपनी के चेयरमैन और सीईओ चक रॉबिन्स ने कहा है कि भारत में टैलेंट की उपलब्धता और कारोबार बढ़ाने की संभावनाओं को देखते हुए इस दिशा में काफी अवसर हैं।
14 अक्टूबर को पीटीआई को दिए इंटरव्यू में रॉबिन्स ने भारत को कंपनी के लिए एक रणनीतिक बाजार बताया। उन्होंने देश की विकास दर, इंजीनियरिंग क्षमता और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में हो रही प्रगति की भी सराहना की। इसके अलावा, सिस्को आने वाले महीनों में अपनी 'सॉवरेन क्रिटिकल टेक्नोलॉजी' से जुड़ी सेवाएं और समाधान भारत में लाने की तैयारी कर रही है।
भारत में चिप डिजाइन टीम का विस्तार करेगी कंपनी
चक रॉबिन्स के मुताबिक, सिस्को के लिए भारत में सबसे बड़े अवसरों में से एक अपनी सिलिकॉन डिजाइन टीम को बढ़ाना है। फिलहाल कंपनी के पास इस क्षेत्र में अमेरिका और इजरायल में बड़ी टीमें हैं, जबकि भारत में इससे जुड़ा छोटा समूह काम कर रहा है।
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कंपनी अब भारत में इस टीम को बड़ा करने की संभावनाएं तलाश रही है। रॉबिन्स ने कहा कि भारत में जरूरी प्रतिभा मौजूद है और कंपनी के पास कामकाज के लिए आवश्यक ढांचा भी है। ऐसे में अब सही लोगों की पहचान कर उन्हें टीम में शामिल करना अहम होगा।
भारत में चिप डिजाइन क्षमता को बढ़ावा देने के लिए सरकार भी कई कदम उठा रही है। इसी संदर्भ में रॉबिन्स से पूछा गया कि क्या सिस्को नई सेमीकंडक्टर 2.0 पहल का फायदा उठाएगी। हालांकि, उन्होंने किसी खास योजना की नहीं की, लेकिन भारत में टीम विस्तार को कंपनी के लिए एक बड़ा अवसर बताया।
भारत को क्यों अहम मानती है सिस्को?
रॉबिन्स ने कहा कि भारत लंबे समय से सिस्को के लिए एक रणनीतिक बाजार रहा है और आगे भी इसकी अहमियत बनी रहेगी। इसके पीछे उन्होंने देश का बड़ा बाजार, महत्वाकांक्षी विकास लक्ष्य, इंजीनियरिंग पर फोकस और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता जैसे कारण गिनाए। उन्होंने भारत की आर्थिक नीतियों को विकास पर केंद्रित बताते हुए कहा कि देश की जीडीपी ग्रोथ से संकेत मिलता है कि यह रणनीति काम कर रही है।
रॉबिन्स के अनुसार, अमेरिका सिस्को का सबसे बड़ा बाजार है। वहीं, अमेरिका के बाहर भारत और मिडिल ईस्ट कंपनी के लिए सबसे अहम बाजारों में शामिल हैं। उन्होंने इन क्षेत्रों को कंपनी के लिए सबसे ज्यादा विकास की संभावनाओं वाले बाजारों में गिना।
भारत में जल्द आएगी सिस्को की सॉवरेन टेक्नोलॉजी
चिप डिजाइन टीम के विस्तार के अलावा सिस्को भारत में अपनी 'सॉवरेन क्रिटिकल टेक्नोलॉजी' भी लाने वाली है। रॉबिन्स ने कहा कि कंपनी आने वाले महीनों में इसे भारत में पेश करेगी। सिस्को इससे पहले यूरोप और कनाडा में इस टेक्नोलॉजी को पेश कर चुकी है।
सॉवरेन टेक्नोलॉजी का मकसद किसी देश की जरूरतों के मुताबिक महत्वपूर्ण डिजिटल सिस्टम और तकनीकी संसाधनों पर उसके नियंत्रण से जुड़ा होता है। हालांकि, भारत में सिस्को इस श्रेणी के तहत कौन-कौन से उत्पाद या समाधान पेश करेगी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
भारत के टेक और सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए क्या मायने?
सिस्को की योजना से भारत में चिप डिजाइन से जुड़े काम और कुशल इंजीनियरों की मांग बढ़ने की संभावना है। अगर कंपनी अपनी टीम का विस्तार करती है, तो इस क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
यह कदम ऐसे समय में अहम है, जब भारत सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। हालांकि, सिस्को ने अभी यह नहीं बताया है कि भारत में कितने नए लोगों को भर्ती किया जाएगा या टीम का विस्तार कब तक पूरा होगा।
कंपनी ने अपने बयान में भारत के प्रति लंबे समय की प्रतिबद्धता दोहराई है। आने वाले महीनों में सॉवरेन टेक्नोलॉजी की शुरुआत और चिप डिजाइन टीम को बढ़ाने की योजना पर आगे की जानकारी का इंतजार रहेगा।
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14 अक्टूबर को पीटीआई को दिए इंटरव्यू में रॉबिन्स ने भारत को कंपनी के लिए एक रणनीतिक बाजार बताया। उन्होंने देश की विकास दर, इंजीनियरिंग क्षमता और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में हो रही प्रगति की भी सराहना की। इसके अलावा, सिस्को आने वाले महीनों में अपनी 'सॉवरेन क्रिटिकल टेक्नोलॉजी' से जुड़ी सेवाएं और समाधान भारत में लाने की तैयारी कर रही है।
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भारत में चिप डिजाइन टीम का विस्तार करेगी कंपनी
चक रॉबिन्स के मुताबिक, सिस्को के लिए भारत में सबसे बड़े अवसरों में से एक अपनी सिलिकॉन डिजाइन टीम को बढ़ाना है। फिलहाल कंपनी के पास इस क्षेत्र में अमेरिका और इजरायल में बड़ी टीमें हैं, जबकि भारत में इससे जुड़ा छोटा समूह काम कर रहा है।
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कंपनी अब भारत में इस टीम को बड़ा करने की संभावनाएं तलाश रही है। रॉबिन्स ने कहा कि भारत में जरूरी प्रतिभा मौजूद है और कंपनी के पास कामकाज के लिए आवश्यक ढांचा भी है। ऐसे में अब सही लोगों की पहचान कर उन्हें टीम में शामिल करना अहम होगा।
भारत में चिप डिजाइन क्षमता को बढ़ावा देने के लिए सरकार भी कई कदम उठा रही है। इसी संदर्भ में रॉबिन्स से पूछा गया कि क्या सिस्को नई सेमीकंडक्टर 2.0 पहल का फायदा उठाएगी। हालांकि, उन्होंने किसी खास योजना की नहीं की, लेकिन भारत में टीम विस्तार को कंपनी के लिए एक बड़ा अवसर बताया।
भारत को क्यों अहम मानती है सिस्को?
रॉबिन्स ने कहा कि भारत लंबे समय से सिस्को के लिए एक रणनीतिक बाजार रहा है और आगे भी इसकी अहमियत बनी रहेगी। इसके पीछे उन्होंने देश का बड़ा बाजार, महत्वाकांक्षी विकास लक्ष्य, इंजीनियरिंग पर फोकस और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता जैसे कारण गिनाए। उन्होंने भारत की आर्थिक नीतियों को विकास पर केंद्रित बताते हुए कहा कि देश की जीडीपी ग्रोथ से संकेत मिलता है कि यह रणनीति काम कर रही है।
रॉबिन्स के अनुसार, अमेरिका सिस्को का सबसे बड़ा बाजार है। वहीं, अमेरिका के बाहर भारत और मिडिल ईस्ट कंपनी के लिए सबसे अहम बाजारों में शामिल हैं। उन्होंने इन क्षेत्रों को कंपनी के लिए सबसे ज्यादा विकास की संभावनाओं वाले बाजारों में गिना।
भारत में जल्द आएगी सिस्को की सॉवरेन टेक्नोलॉजी
चिप डिजाइन टीम के विस्तार के अलावा सिस्को भारत में अपनी 'सॉवरेन क्रिटिकल टेक्नोलॉजी' भी लाने वाली है। रॉबिन्स ने कहा कि कंपनी आने वाले महीनों में इसे भारत में पेश करेगी। सिस्को इससे पहले यूरोप और कनाडा में इस टेक्नोलॉजी को पेश कर चुकी है।
सॉवरेन टेक्नोलॉजी का मकसद किसी देश की जरूरतों के मुताबिक महत्वपूर्ण डिजिटल सिस्टम और तकनीकी संसाधनों पर उसके नियंत्रण से जुड़ा होता है। हालांकि, भारत में सिस्को इस श्रेणी के तहत कौन-कौन से उत्पाद या समाधान पेश करेगी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
भारत के टेक और सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए क्या मायने?
सिस्को की योजना से भारत में चिप डिजाइन से जुड़े काम और कुशल इंजीनियरों की मांग बढ़ने की संभावना है। अगर कंपनी अपनी टीम का विस्तार करती है, तो इस क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
यह कदम ऐसे समय में अहम है, जब भारत सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। हालांकि, सिस्को ने अभी यह नहीं बताया है कि भारत में कितने नए लोगों को भर्ती किया जाएगा या टीम का विस्तार कब तक पूरा होगा।
कंपनी ने अपने बयान में भारत के प्रति लंबे समय की प्रतिबद्धता दोहराई है। आने वाले महीनों में सॉवरेन टेक्नोलॉजी की शुरुआत और चिप डिजाइन टीम को बढ़ाने की योजना पर आगे की जानकारी का इंतजार रहेगा।