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यूरोप में गर्मी का कहर: AC और कूलर खरीदने के लिए दुकानों पर टूट पड़े लोग, हीटवेव से मची अफरा-तफरी!

Mon, 29 Jun 2026 12:46 PM IST
Suyash Pandey टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीे
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीे Published by: Suyash Pandey Updated Mon, 29 Jun 2026 12:46 PM IST
सार

Europe Heatwave: यूरोप में रिकॉर्ड गर्मी और हीटवेव के बीच एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों की मांग अचानक बढ़ गई है। कई शहरों में लोग स्टोर खुलते ही कूलिंग प्रोडक्ट्स खरीदने के लिए टूट पड़े। जानिए यूरोप में AC का इस्तेमाल भारत और अमेरिका की तुलना में इतना कम क्यों है और वहां AC लगवाना इतना मुश्किल क्यों माना जाता है।

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Europe Heatwave Sparks Rush for Air Conditioners as Soaring Temperatures Trigger Buying Frenzy
सुपरमार्केट में AC के लिए मची लूट - फोटो : एआई

विस्तार

भारत में चिलचिलाती गर्मी और लू से हम सब वाकिफ हैं, लेकिन इस साल यूरोप का मौसम भी कुछ ऐसा ही हो गया है। अचानक बढ़ी भयंकर गर्मी के कारण यूरोप के शहरों में एयर कंडीशनर (AC), कूलर और पंखों की मांग इतनी बढ़ गई है कि सुपरमार्केट में इन्हें खरीदने के लिए लोगों के बीच छीना-झपटी मच गई है।

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सोशल मीडिया और यूट्यूब पर ऐसे कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें स्टोर खुलते ही लोग आंधी की तरह अंदर घुसते और कूलिंग गैजेट्स लूटते नजर आ रहे हैं। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि यूरोप में अचानक AC की इतनी कमी क्यों हो गई और वहां इसे लगाना भारत जितना आसान क्यों नहीं है? आइए आसान भाषा में समझते हैं।

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यूरोप में AC का इस्तेमाल इतना कम क्यों होता है?

भारत, अमेरिका या जापान जैसे देशों की तुलना में यूरोपीय लोग AC पर बहुत कम निर्भर हैं। इसके कुछ मुख्य कारण हैं:

  • ठंडा मौसम: यूरोप में साल के ज्यादातर महीने सर्दी रहती है। गर्मी का मौसम बहुत छोटा होता है, इसलिए वहां के लोग घर को ठंडा रखने के लिए साधारण पंखे या कूलर से ही काम चला लेते हैं।
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  • आंकड़े क्या कहते हैं: डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के अनुसार, अमेरिका में जहां करीब 90% लोग AC का इस्तेमाल करते हैं, वहीं यूरोप में सिर्फ 20% घरों में ही AC लगा है।

 

 


यूरोप के घरों में AC इंस्टॉलेशन एक बड़ी चुनौती क्यों है?

भारत में आप दुकान से AC खरीदते हैं और कुछ ही घंटों में मैकेनिक उसे आपके कमरे की दीवार पर टांग देता है। लेकिन यूरोप में यह इतना आसान नहीं है:

  • एतिहासिक इमारतें और कड़े नियम: यूरोप के ज्यादातर शहर अपनी एतिहासिक खूबसूरती के लिए जाने जाते हैं। वहां की पुरानी इमारतों का बाहरी लुक बदलने या उनमें तोड़फोड़ करने पर सख्त पाबंदी है। इसलिए, आप दीवार में छेद करके स्पिल्ट या विंडो AC आसानी से नहीं लगा सकते।
  • सोसायटी और प्रशासन की रोक-टोक: अगर बिल्डिंग नई भी है, तो वहां AC लगाने के लिए स्थानीय निकाय और सोसायटी मेंबर्स से ढेरों अप्रूवल लेने पड़ते हैं, जो काफी लंबा और मुश्किल काम है।


किराएदारों के लिए तो AC लगाना लोहे के चने चबाना है

यूरोप के कई देशों में लगभग आधी आबादी किराए के घरों में रहती है। किराएदारों के लिए AC लगाना और भी बड़ी सिरदर्दी है:

  • मकान मालिक की पाबंदी: ज्यादातर मकान मालिक घर में किसी भी तरह की तोड़फोड़ या बदलाव की परमिशन नहीं देते।
  • भारी खर्च: अगर कुछ कड़ी शर्तों के साथ परमिशन मिल भी जाए, तो इंस्टॉलेशन का खर्च इतना ज्यादा होता है कि किराएदार उसे वहन नहीं कर पाते।
  • नतीजा: यही वजह है कि अब जब यूरोप में अचानक भीषण गर्मी पड़ी है, तो लोग ऐसे कूलिंग प्रोडक्ट्स की तरफ भाग रहे हैं, जिनमें इंस्टॉलेशन का झंझट न हो। इसी कारण सुपरमार्केट्स में अचानक से इतनी भीड़ टूट पड़ी है।
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