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Cyber Attacks: चीन या रूस... दुनिया के सबसे खतरनाक साइबर हमलों के पीछे कौन? भारत का पड़ोसी देश टॉप पर
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Mon, 18 May 2026 01:36 PM IST
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सार
Global Cyber Threats: इंटरनेट ने हमारी जिंदगी जितनी आसान बनाई है, खतरे भी उतने ही बढ़ा दिए हैं। पलक झपकते ही डेटा और जीवन भर की कमाई गायब हो जाती है। क्या आपने कभी सोचा है कि ये शातिर हैकर्स आखिर कहां बैठे हैं? आइए जानते हैं उन देशों के बारे में जहां से रचे जाते हैं सबसे खतरनाक साइबर हमले।
साइबर अटैक
- फोटो : AI जनरेटेड
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विस्तार
आज के दौर में हम सभी इंटरनेट से पूरी तरह जुड़े हुए हैं। डिजिटल तकनीक के फायदे अनेक हैं। लेकिन इसके नुकसान भी कम नहीं हैं। डिजिटल दुनिया में साइबर अटैक आज एक बड़ा और खौफनाक सच बन चुका है। हैकर्स कुछ ही सेकंड में आपका पर्सनल डेटा उड़ा सकते हैं। आपकी जीवन भर की गाढ़ी कमाई पल भर में बैंक से गायब हो सकती है। ऐसे में एक सवाल मन में जरूर आता है।
आखिर ये साइबर अटैक होते कहां से हैं? हैकर्स कहां छुपकर बैठे होते हैं? इसे समझने के लिए हमें साइबर हमलों के तरीकों को जानना होगा। इंटरनेट पर मुख्य रूप से दो तरह के साइबर हमले होते हैं। पहला, जो डेटा चोरी या जासूसी के लिए किसी देश के इशारे (स्टेट-स्पॉन्सर्ड) पर होते हैं। दूसरा, जो आर्थिक लाभ यानी सिर्फ पैसे लूटने के लिए किए जाते हैं। इन दोनों ही तरह के हमलों में चीन और रूस का दबदबा सबसे ज्यादा है।
यहां से रची जाती हैं साइबर हमलों की सबसे ज्यादा साजिश
1. पहले नंबर पर है चीन
पैटेंटपीसी (PatentPC) ग्लोबल थ्रेट स्टैट्स की एक रिपोर्ट काफी चौंकाने वाली है। इसके मुताबिक, दुनिया भर में होने वाले लगभग 40% साइबर हमले अकेले चीन से शुरू होते हैं। चीनी हैकर्स का मुख्य टारगेट कॉरपोरेट जासूसी होता है। ये हैकर्स इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और दूसरे देशों का सरकारी डेटा चुराने में माहिर हैं।
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2. दूसरे नंबर पर रूस
वैश्विक स्तर पर साइबर हमलों के मामले में रूस दूसरे स्थान पर आता है। दुनिया के कुल हमलों में रूस की हिस्सेदारी 15% से 25% के बीच है। रूसी हैकर्स 'रैंसमवेयर' के लिए सबसे ज्यादा कुख्यात हैं। ये कंप्यूटर सिस्टम को लॉक कर देते हैं और फिर उसे खोलने के एवज में भारी फिरौती मांगते हैं। इसके अलावा ये DDoS हमलों के लिए भी जाने जाते हैं।
2025 में साइबर हमलों के सबसे बड़े शिकार बने ये 6 देश
हैकर्स के निशाने पर सिर्फ आम इंसान नहीं, बल्कि पूरी की पूरी सरकारें और देश होते हैं। क्लाउडसेक (CloudSEK) की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में जिन देशों ने सबसे ज्यादा साइबर हमले झेले, उनकी लिस्ट इस प्रकार है:
अमेरिका (नंबर 1): अमेरिका इस लिस्ट में टॉप पर रहा। पूरे साल में यहां 31,020 हमले दर्ज किए गए। बैंक, सरकारी एजेंसियां और खास तौर पर अस्पताल हैकर्स के मुख्य निशाने पर रहे। रैंसमवेयर के कारण कई अस्पतालों का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया।
ब्रिटेन (नंबर 2): अमेरिका के बाद ब्रिटेन का नंबर आता है, जहां 2,622 घटनाएं सामने आईं। सबसे ज्यादा हमले बैंकिंग, टेलीकॉम और रिटेल सेक्टर पर हुए। यहां पासवर्ड चोरी और फिशिंग (धोखाधड़ी वाले लिंक) के मामले लगातार बढ़ते रहे।
कनाडा (नंबर 3): इस देश में 2,581 हमले दर्ज किए गए। अमेरिका से सीधा डिजिटल नेटवर्क जुड़ा होने के कारण कनाडा को भी सीमा पार से होने वाले साइबर खतरों का सामना करना पड़ा। ऊर्जा कंपनियों और स्कूलों पर ज्यादा हमले हुए।
जर्मनी (नंबर 4): यहां कुल 7,144 साइबर घटनाएं रिकॉर्ड की गईं। जर्मनी की मशहूर ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री हैकर्स के राडार पर रही। हैकर्स ने कंपनियों के रिसर्च सिस्टम तक पहुंचने की काफी कोशिशें कीं।
ऑस्ट्रेलिया (नंबर 5): इस लिस्ट में ऑस्ट्रेलिया पांचवें नंबर पर है। हैकर्स ने क्लाउड सिस्टम की कमजोरियों का खूब फायदा उठाया। उन्होंने सरकारी प्लेटफॉर्म, टेलीकॉम नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स कंपनियों में कई बार सेंध लगाई।
भारत (नंबर 6): दुनिया भर में होने वाले साइबर हमलों की लिस्ट में भारत छठे स्थान पर है। 2025 में देश में करीब 13,883 साइबर घटनाएं दर्ज की गईं। डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ हैकर्स सक्रिय हुए हैं। भारत में सबसे ज्यादा मामले फिशिंग और पासवर्ड चोरी के देखने को मिले।
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यहां से रची जाती हैं साइबर हमलों की सबसे ज्यादा साजिश
1. पहले नंबर पर है चीन
पैटेंटपीसी (PatentPC) ग्लोबल थ्रेट स्टैट्स की एक रिपोर्ट काफी चौंकाने वाली है। इसके मुताबिक, दुनिया भर में होने वाले लगभग 40% साइबर हमले अकेले चीन से शुरू होते हैं। चीनी हैकर्स का मुख्य टारगेट कॉरपोरेट जासूसी होता है। ये हैकर्स इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और दूसरे देशों का सरकारी डेटा चुराने में माहिर हैं।
2. दूसरे नंबर पर रूस
वैश्विक स्तर पर साइबर हमलों के मामले में रूस दूसरे स्थान पर आता है। दुनिया के कुल हमलों में रूस की हिस्सेदारी 15% से 25% के बीच है। रूसी हैकर्स 'रैंसमवेयर' के लिए सबसे ज्यादा कुख्यात हैं। ये कंप्यूटर सिस्टम को लॉक कर देते हैं और फिर उसे खोलने के एवज में भारी फिरौती मांगते हैं। इसके अलावा ये DDoS हमलों के लिए भी जाने जाते हैं।
2025 में साइबर हमलों के सबसे बड़े शिकार बने ये 6 देश
हैकर्स के निशाने पर सिर्फ आम इंसान नहीं, बल्कि पूरी की पूरी सरकारें और देश होते हैं। क्लाउडसेक (CloudSEK) की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में जिन देशों ने सबसे ज्यादा साइबर हमले झेले, उनकी लिस्ट इस प्रकार है:
अमेरिका (नंबर 1): अमेरिका इस लिस्ट में टॉप पर रहा। पूरे साल में यहां 31,020 हमले दर्ज किए गए। बैंक, सरकारी एजेंसियां और खास तौर पर अस्पताल हैकर्स के मुख्य निशाने पर रहे। रैंसमवेयर के कारण कई अस्पतालों का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया।
ब्रिटेन (नंबर 2): अमेरिका के बाद ब्रिटेन का नंबर आता है, जहां 2,622 घटनाएं सामने आईं। सबसे ज्यादा हमले बैंकिंग, टेलीकॉम और रिटेल सेक्टर पर हुए। यहां पासवर्ड चोरी और फिशिंग (धोखाधड़ी वाले लिंक) के मामले लगातार बढ़ते रहे।
कनाडा (नंबर 3): इस देश में 2,581 हमले दर्ज किए गए। अमेरिका से सीधा डिजिटल नेटवर्क जुड़ा होने के कारण कनाडा को भी सीमा पार से होने वाले साइबर खतरों का सामना करना पड़ा। ऊर्जा कंपनियों और स्कूलों पर ज्यादा हमले हुए।
जर्मनी (नंबर 4): यहां कुल 7,144 साइबर घटनाएं रिकॉर्ड की गईं। जर्मनी की मशहूर ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री हैकर्स के राडार पर रही। हैकर्स ने कंपनियों के रिसर्च सिस्टम तक पहुंचने की काफी कोशिशें कीं।
ऑस्ट्रेलिया (नंबर 5): इस लिस्ट में ऑस्ट्रेलिया पांचवें नंबर पर है। हैकर्स ने क्लाउड सिस्टम की कमजोरियों का खूब फायदा उठाया। उन्होंने सरकारी प्लेटफॉर्म, टेलीकॉम नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स कंपनियों में कई बार सेंध लगाई।
भारत (नंबर 6): दुनिया भर में होने वाले साइबर हमलों की लिस्ट में भारत छठे स्थान पर है। 2025 में देश में करीब 13,883 साइबर घटनाएं दर्ज की गईं। डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ हैकर्स सक्रिय हुए हैं। भारत में सबसे ज्यादा मामले फिशिंग और पासवर्ड चोरी के देखने को मिले।