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Likeness Detection: अब डीपफेक कंटेंट पहचानना आसान, यूट्यूब ने पेश किया कमाल का सेफ्टी फीचर; ऐसे करें इस्तेमाल

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jagriti Updated Sun, 17 May 2026 04:58 PM IST
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सार

YouTube Likeness Detection Tool For Everyone: AI-जनरेटेड डीपफेक वीडियो और फेक कंटेंट के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। जिसे देखते हुए YouTube ने बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने अपना नया AI-पावर्ड Likeness Detection फीचर पेश किया है। इस फीचर की मदद से अब आम यूजर भी अपने चेहरे वाले फेक AI वीडियो को आसानी से खोज सकेंगे। जानिए कैसे...
 

YouTube Launches AI Deepfake Detection Tool  Protect Users
यूट्यूब लाइकनेस डिटेक्शन टूल - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार

YouTube Privacy Policy for Deepfakes: इंटरनेट पर फैल रहे फर्जी वीडियो और डीपफेक के जाल को तोड़ने के लिए यूट्यूब ने अपने लाइकनेस डिटेक्शन प्रोग्राम का दायरा बढ़ा दिया है। कंपनी ने बताया कि अब सिर्फ सेलिब्रिटी या बड़े नेता ही नहीं, बल्कि 18 साल से ऊपर को काई भी यूजर इस लाइकनेस डिटेक्शन टूल का इस्तेमाल कर सकेगा। इससे प्लेटफॉर्म पर आपकी अनुमति के बिना अगर कोई आपका एआई-जनरेटेड हमशक्ल या डीपफेक चेहरा इस्तेमाल करेगा, तो यह टूल उस पर तुरंत कड़ा एक्शन लेने की पावर दे सकता है।


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यूट्यूब का यह नया फीचर एआई की मदद से प्लेटफॉर्म पर ऐसे वीडियो ढूंढता है, जिनमें किसी व्यक्ति का चेहरा या लाइकनेस इस्तेमाल का इस्तेमाल किया जाता है। यह सिस्टम काफी हद तक YouTube के Content ID टूल जैसा काम करता है, लेकिन फर्क इतना है कि यहां कॉपीराइट कंटेंट की जगह व्यक्ति के चेहरे की पहचान की जाती है।


Prevent AI Face Theft Online: कैसे काम करता है यह टूल?
यह फीचर अधिक कंटेंट आईडी सिस्टम की तरह काम करता है। जहां कंटेंट आईडी किसी की चुराई ऑडियो या वीडियो को (कॉपीराइट सामग्री) सिस्टम की तरह ही काम करता है। वहीं यह टूल किसी व्यक्ति के असली चेहरे (लाइकनेस) की चोरी को खोज निकालता है। इसका काम करने का तरीका बिल्कुल आसान है।



सबसे पहले यूजर को एक सेल्फी-स्टाइल स्कैन के जरिए अपना असली चेहरा सिस्टम में अपलोड करना होता है। फिर यूट्यूब का यह एआई टूल पूरे प्लेटफॉर्म पर मौजूद अरबों वीडियो पर लगातार नजर रखता है। जैसे ही प्लेटफॉर्म पर कहीं भी आपकी लाइकनेस (यानी हूबहू आपका चेहरा) मैच होती है, यह सिस्टम तुरंत आपको अलर्ट भेजता है। इसके बाद यूजर को उस आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने का पूरा विकल्प मिल जाता है।

Jack Malon YouTube Statement: पहले किन लोगों को मिलती थी यह सुविधा?
अब तक यह फीचर केवल बड़े क्रिएटर्स, सरकारी अधिकारियों, पत्रकारों, राजनेताओं और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के लिए उपलब्ध था, लेकिन अब यूट्यूब ने इसे सभी यूजर्स के लिए रोलआउट कर दिया है। यूट्यूब के प्रवक्ता जैक मैलोन के अनुसार कंपनी चाहती है कि प्लेटफॉर्म पर नए और पुराने सभी क्रिएटर्स को समान सुरक्षा मिले।

How to Remove AI Deepfake from YouTube: कैसे करें इस्तेमाल?



अगर आप भी इस फीचर को अपने यूट्यूब पर एक्टिवेट करना चाहते हैं, तो नीचे बताए गए इन स्टेप्स को फॉलो करें...
  • सबसे पहले यूट्यूब वीडियो खोलें।
  • बाईं तरफ मौजूद मेन्यू में जाएं।
  • कंटेंट डिटेक्शन ऑप्शन पर क्लिक करें।
  • फिर लाइकनेस सेक्शन चुनें। 
  • इसके बाद स्टार्ट नाउ पर क्लिक करके सेटअप पूरा कर लें।

Remove AI Generated Face Video: किन बातों का रखना होगा ध्यान?
यूट्यूब ने साफ किया है कि यह टूल ऐसी भी वीडियो दिखा सकता है, जिनमें आपका असली चेहरा हो और वे AI-जनरेटेड न हों। ऐसे कंटेंट को Privacy Policy के तहत हटाया नहीं जा सकेगा। कंपनी के अनुसार फिलहाल इस फीचर के जरिए आने वाली रिमूवल रिक्वेस्ट की संख्या काफी कम है। हालांकि इस फीचर को अहम बताया जा रहा है क्योंकि कई बार लोगों की तस्वीरों और वीडियो का गलत इस्तेमाल कर फर्जी कंटेंट बनाया जाता है। ऐसे में यह नया फीचर डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन प्राइवेसी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।


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